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ये क्या हो रहा है? करकाभाट के जंगल में मिले 44 गायें रस्सी से बंधे, बजरंग दल ने कहा हो रही थी तस्करी, हमारे दबिश पर भाग गए तस्कर

पुलिस प्रशासन का नहीं मिल रहा अपेक्षित सहयोग, बजरंग दल ने अपने दम पर 44 गोवंश को छुड़ाया

बालोद। शासन प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद बालोद जिले में मवेशी तस्करी नहीं थम रही है। भले ही शासन प्रशासन यह कहता है कि आरोपी नहीं मिले तो तस्करी कैसे माने। लेकिन भला बड़ी संख्या में आधी रात को गांव से 2 किलोमीटर दूर जंगल में 44 मवेशियों को बांधकर कोई क्यों रखेगा। जबकि अभी मवेशी बाजार भी बंद है। मामला करही भदर से 2 किलोमीटर दूर करका भाट जंगल का है। जहां बीती रात को बजरंग दल के लोगों ने मामला पकड़ा। पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। सूचना देने के बावजूद वहां पर कोई पुलिस प्रशासन से नहीं पहुंचा। बजरंग दल ने कोटवार और पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मामला पकड़ा गया।

तस्कर घटनास्थल से फरार हो गए तो वहीं एक बाइक का नंबर प्लेट वहां पड़ा हुआ मिला है। मौके पर 44 गाय बछड़े को बांधकर रखा गया था। जिन्हें सुरक्षित बचा लिया गया और सभी को गुरुर के गौशाला में शरण दिया गया। रात 12 से 3 तक गौ माताओं को बचाने की मशक्कत में बजरंग दल के लोग जुटे रहे। पंच पति सुरेश कुमार गोयल, कोटवार रामनाथ ग्वालवंशी, ग्रामीण सदस्य पंचराम साहू भी मौके पर पहुंचे थे। कोटवार के जरिए मवेशियों को गौशाला के सुपुर्द किया गया। बता दें कि करहीभदर में पहले मवेशी बाजार लगता था। फिलहाल इस पर प्रतिबंध लगाया गया है। लेकिन इसी बाजार की आड़ में तस्करी भी होती रही है। कई बार शिकायत आ चुकी है कि करका भाट जंगल के रास्ते तस्कर मवेशियों को हांकते हुए पैदल चारामा की ओर ले जाते हैं। फिर वहां से महाराष्ट्र बॉर्डर नजदीक होने के कारण आसानी से तस्करी हो जाती है। तस्कर बीती रात को इसी फिराक में थे और गांव से दूर जंगल में मवेशियों को बकायदा रस्सियों से बांधकर रखे थे। लेकिन बजरंग दल की दबिश से उनके मंसूबे नाकाम हो गए और मवेशियों को छोड़कर भाग गए। इसमें शासन प्रशासन की निष्क्रियता पर भी सवाल उठने लगा है। बजरंग दल के लोगों ने आरोप लगाया कि कुछ सामाजिक संगठन का सहयोग भी तस्करों को मिलता है। सूचना देने के बाद भी कार्रवाई के लिए नहीं आते हैं। एक तरफ जहां भूपेश सरकार गौठान और गौ माता के संरक्षण की बात करती है तो दूसरी ओर बालोद जिले में लगातार मवेशी तस्करी की घटना प्रशासन की व्यवस्था पर उंगली भी उठाती है। मवेशियों को छुड़ाने में मुख्य रूप से बजरंग दल के उमेश कुमार सेन बजरंग दल बालोद जिला और सभी बजरंग दल के कार्यकर्ता श्याम नेताम, पितांबर निषाद, सुशील भारती, हर्ष भारती, दुर्गेश नेताम, दुर्जन नेताम, शुभम यादव, सुजल यादव का योगदान रहा।

तस्करों के सहयोगियों का लगा रहे हैं पता, जल्द होगा खुलासा

बजरंग दल के उमेश सेन ने कहा कि इन मवेशी तस्करों के आसपास के ग्रामीणों से भी तार जुड़े हुए हैं। जिसकी वजह से वह इस कृत्य को अंजाम दे रहे हैं खासतौर से करकाभाट, सोरर नयापारा, धनोरा, करहीभदर, बरही के कुछ लोगों का साथ इन तस्करों को मिल रहा है। जिसके कारण उनके हौसले बढ़े हुए। बजरंग दल ऐसे लोगों के नाम लिस्ट तैयार कर रही । जिनका खुलासा जल्द होगा। ऐसे लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई को लेकर बजरंग दल रणनीति बना रही है।

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