माधुरी दीपक यादव/सूर्यकांत साहू (बालोद/गुरूर)। बालोद, धमतरी और कांकेर जिले की सीमा पर बसे ग्राम ओनाकोना में स्थापित श्री त्र्यंबकेश्वर धाम मंदिर आज क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर पांच दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव एवं रुद्र महायज्ञ के साथ मंदिर में विधिवत प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई, जिसके बाद अब श्रद्धालु यहां नियमित रूप से दर्शन कर सकेंगे।

मंदिर संस्थापक तीरथ फूटान ने बताया कि वर्ष 2004 में जब उनकी उम्र मात्र 25 वर्ष थी, तभी उन्होंने इस भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था। माता-पिता के आशीर्वाद उन्हीं के द्वारा नींव पूजन के साथ छोटे भाई के सहयोग से उन्होंने बिना किसी से आर्थिक मदद लिए स्वयं के खर्च पर मंदिर निर्माण कार्य शुरू किया। धीरे-धीरे वर्षों तक संघर्ष और समर्पण के साथ मंदिर निर्माण आगे बढ़ता रहा, लेकिन आर्थिक परेशानी के कारण कुछ समय कार्य बाधित भी हुआ।
तीरथ फूटान ने बताया कि पिछले 22 वर्षों में मंदिर निर्माण पर तीन करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। मंदिर निर्माण के लिए उन्होंने अपनी कई निजी जमीनें भी बेचीं। कुछ महीने पहले ही मंदिर का अधूरा कार्य पूरा करने के लिए उन्होंने 13.50 एकड़ जमीन बेचकर प्राप्त राशि मंदिर निर्माण में लगाई। वर्तमान में मंदिर का शिखर, रंग-रोगन एवं कुछ अन्य कार्य अभी भी शेष हैं, जिन्हें जल्द पूरा करने का प्रयास जारी है।
उन्होंने बताया कि वे जमीन खरीदी-बिक्री (प्रॉपर्टी डीलिंग) का कार्य करते हैं और उसी आय से मंदिर निर्माण का सपना साकार किया है। भविष्य में ओनाकोंना गांव में वृद्धाश्रम, अनाथालय, ध्यान केंद्र और आयुर्वेदिक चिकित्सालय स्थापित करने का उनका लक्ष्य है। इन जनसेवा कार्यों के लिए भी वे धीरे-धीरे संसाधन जुटा रहे हैं।
गुमनाम गांव को मिली नई पहचान
ओनाकोंना गांव पहले मुख्य मार्ग से 5 से 7 किलोमीटर अंदर जंगल के बीच बसा एक गुमनाम और विकास से कटा हुआ क्षेत्र था। यहां के लोगों की जीविका का मुख्य साधन मत्स्य आखेट और वनोपज संग्रहण हुआ करता था। लेकिन त्र्यंबकेश्वर धाम के निर्माण और प्रसिद्धि के बाद आज यह गांव पूरे छत्तीसगढ़ में पहचाना जाने लगा है।
मंदिर की ख्याति फैलने के साथ ही यहां दूर-दूर से श्रद्धालु और पर्यटक आने लगे हैं, जिससे ग्रामीणों को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव आया है। इस परिवर्तन का श्रेय फूटान परिवार द्वारा निर्मित त्र्यंबकेश्वर धाम और क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को दिया जा रहा है।
गंगरेल डैम के डुबान क्षेत्र में बसे इस गांव की मनमोहक वादियां और धार्मिक आस्था का संगम इसे विशेष बनाते हैं। मंदिर से कुछ दूरी पर सूफी संत शेख शरीफ का दरबार भी फूटान परिवार द्वारा निर्मित कराया गया है। सबसे पहले दरबार का निर्माण हुआ, जिसके बाद त्र्यंबकेश्वर धाम निर्माण का कार्य प्रारंभ किया गया।

महाशिवरात्रि पर मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा के साथ यह बहुप्रतीक्षित धाम अब सभी श्रद्धालुओं के लिए खुल चुका है और तेजी से धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। आने वाले समय में यह स्थान आस्था के साथ-साथ सेवा और आध्यात्मिक चेतना का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
5 दिनों तक चला आयोजन, महाशिवरात्रि पर हजारों श्रद्धालु पहुंचे
ग्राम ओनाकोंना में श्री त्र्यंबकेश्वर धाम मंदिर में पांच दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव एवं रुद्र महायज्ञ का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर वैदिक ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार, यज्ञ एवं विशेष पूजा-अर्चना के पश्चात मंदिर में विधिवत प्राण प्रतिष्ठा की गई। अब श्रद्धालु इस भव्य धाम में दर्शन लाभ ले सकेंगे। यह भव्य मंदिर महाराष्ट्र के नासिक स्थित त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की तर्ज पर निर्मित किया गया है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश एक साथ पिंडी स्वरूप में विराजमान हैं, जो इसे विशेष आध्यात्मिक महत्व प्रदान करते हैं। इसके साथ ही मंदिर में भगवान गणेश, कार्तिकेय, माता लक्ष्मी, माता पार्वती, ब्राह्मणी, कच्छप अवतार, कुबेर, धन्वंतरि, काल भैरव, पंचमुखी हनुमान, नंदी एवं लक्ष्मी यंत्र भी स्थापित किए गए हैं।
मंदिर संस्थापक तीर्थराज फूटान ने बताया कि मंदिर निर्माण की नींव वर्ष 2004 में उनके एवं सूरज फूटान द्वारा रखी गई थी। वर्षों की सतत मेहनत और समर्पण के बाद वर्ष 2026 में मंदिर का पूर्ण निर्माण कर भव्य प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई। मंदिर परिसर में नवग्रह भी शिवलिंग स्वरूप में स्थापित हैं, जहां श्रद्धालु कालसर्प दोष और मांगलिक दोष से संबंधित अनुष्ठान करवा सकते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा ग्राम ओनाकोंना एक पहाड़ी के नीचे स्थित है और गंगरेल बांध के डुबान क्षेत्र के कारण यहां का वातावरण अत्यंत मनमोहक प्रतीत होता है। मंदिर तक पहुंचने के लिए कच्चे मार्ग से होकर गुजरना पड़ता है, लेकिन श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। स्थानीय मछुआरों द्वारा यहां आने वाले पर्यटकों के लिए बोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे यह स्थल धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनता जा रहा है।
अब नासिक जाए बिना होगा त्र्यंबकेश्वर के दर्शन

मंदिर संस्थापक तीर्थराज फूटान ने बताया कि मंदिर निर्माण का मुख्य उद्देश्य यह था कि आर्थिक रूप से कमजोर श्रद्धालु जो महाराष्ट्र के नासिक स्थित त्र्यंबकेश्वर धाम नहीं जा पाते, वे ओनाकोंना में ही उसी स्वरूप के दर्शन कर सकें। मंदिर का स्वरूप और स्थापत्य नासिक धाम से प्रेरित है, जिससे श्रद्धालुओं को वही दिव्य अनुभूति प्राप्त हो रही है।
फूटान परिवार के बेटों द्वारा स्वयं के खर्चे पर निर्मित यह भव्य मंदिर अपनी सुंदरता और धार्मिक महत्ता के कारण पूरे छत्तीसगढ़ में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और क्षेत्र में भक्ति एवं आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। यह बहुप्रतीक्षित त्र्यंबकेश्वर धाम अब श्रद्धालुओं के लिए खुल चुका है और आने वाले समय में यह स्थान धार्मिक एवं पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।
माता-पिता के सपने को किया सरकार, जब जीवित थे तो उन्हीं के हाथों रखवाए थे मंदिर की नींव

तीरथ फूटान ने बताया कि 2004 में उन्होंने अपने पिता स्व. घुरवा राम और माता स्व. प्रेमवती के हाथों ही मंदिर का नींव रखवाया था। अपने माता-पिता के जरिए ही पूजन करवा कर उन्होंने अपने संकल्प को पूरा करने का निर्णय लिया था। आज वे स्वर्गवासी हो गए हैं पर अपने माता-पिता के सपने को अंतत पूरा करके उन्हें काफी खुशी महसूस हो रही है। माता-पिता का ही आशीर्वाद रहा है कि काफी संघर्ष के बाद यह मंदिर पूर्ण हुआ और बालोद जिले को एक नया तीर्थ स्थल मिल गया।
सूफी संत का दरबार भी है विशेष
मंदिर निर्माण से पहले कुछ दूरी पर सूफी संत का दरबार बनाने का उद्देश्य उनका मानव सेवा को लिए प्रेरित करना भी है। उनका कहना है कि सूफी संत मजहबी नहीं होते।वे इंसानों के बीच की खाई को पाटने का काम करते हैं। संसार के लिए अमन चैन की दुआ मांगते हैं। लोगों को एक दूसरे की मदद की प्रेरणा देते हैं। ऐसे ही कुछ उद्देश्यों के साथ उन्होंने त्रंबकेश्वर धाम बनाने की सोची और गांव वासियों का जीवन बदलने का निर्णय लिया। आने वाले दिनों में यहां पर वृद्धाश्रम और अनाथालय खोलकर इस मानव सेवा के कार्य को आगे बढ़ना चाहते हैं।
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