बालोद । डौंडीलोहारा क्षेत्र के ग्राम पिनकापार की प्राचार्य को विगत दिनों मुख्यमंत्री भेंट मुलाकात कार्यक्रम के दौरान छात्राओं द्वारा शिकायत के बाद निलंबन कर दिया गया था। इसके बावजूद वह स्कूल आ रही थी। जिससे बच्चों में नाराजगी बढ़ गई और शुक्रवार को बच्चे सड़क पर बढ़ गए। निलंबन के बावजूद प्राचार्य के इस तरह से स्कूल आने का जमकर विरोध किया गया। मामले की जानकारी मिलने के बाद शासन प्रशासन मौके पर पहुंचे और बच्चों को शांत कराया गया। बच्चों को आश्वस्त किया गया कि उनका निलंबन हो चुका है वह यहां नहीं आएगी।डौंडीलोहारा विकासखंड के ग्राम जेवरतला रोड में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भेंट मुलाकात कार्यक्रम में पिनकापार ग्राम के हाई स्कूल की छात्राओं ने स्कूल में पदस्थ प्राचार्य खोब्रागड़े की शिकायत की थी। छात्राओं के पूरी बातों को सुनकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मौके पर ही प्राचार्य को निलंबित करने का आदेश दे दिया था। उन्हें स्कूल से हटाकर अन्य कार्यालय में अटैच करने की बात कही गई थी। प्राचार्य निलंबन के बाद भी लगातार उसी स्कूल में आकर बैठने लगी थी। इस बात से आक्रोशित छात्र छात्राओं ने गांव के मुख्य मार्ग को जाम कर दिया व आवागमन को थोड़ी देर के लिए रोक दिया। आनन-फानन में जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन को इस बात की जानकारी लगी। तब छात्र छात्राओं को मनाने व समझाने का प्रयास किया गया। उनसे कहा गया कि प्राचार्य का निलंबन कर दिया गया है व इस संबंध में शिक्षा विभाग के द्वारा आदेश भी जारी कर दिया गया है। अब निलंबित प्राचार्य इस शाला में नहीं आएगी। उसे दूसरी जगह भेजा जाएगा। नायाब तहसीलदार नवीन ठाकुर,शिक्षा समिति के सदस्य,थाना स्टाफ के द्वारा समझाइश के बाद छात्राओ की नाराजगी कम हुई व सड़क जाम को हटाया गया ।
इस शिकायत पर हुई थी निलंबित
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 18 सितम्बर को बालोद जिले के गुण्डरदेही विधानसभा क्षेत्र ग्राम जेवरतला के भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान पिनकापार स्कूल की छात्रा ने प्राचार्य द्वारा ज्यादा फीस लेने और बच्चों से अच्छा व्यवहार नहीं करने की शिकायत की थी। मुख्यमंत्री ने छात्रा की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला पिनकापार की प्राचार्य को निलंबित करने के निर्देश दिए थे।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया। जारी आदेश के अनुसार सत्र 2020-21 में कोविड-19 के कारण विद्यालय बंद की स्थिति रही। कक्षाएं ऑनलाइन संचालित की जा रही थी, फिर भी स्कूल की प्राचार्य संगीता खोब्रागढ़े द्वारा छात्रा-छात्राओं से वार्षिक स्थानीय निधि शुल्क लिया गया। स्थानीय शाला शुल्क छात्र-छात्राओं से लिए जाने, शाला प्रबंधन विकास समिति के हस्तक्षेप एवं जनप्रतिनिधियों से की गई शिकायत के बाद आंशिक रूप से राशि लौटाई गई। श्रीमती खोब्रागढ़े के द्वारा वित्तीय क्रिया-कलापों में पारदर्शिता का अभाव एवं भण्डार क्रय नियमों का पालन नहीं किया जाना पाया गया। साथ ही क्रय-विक्रय के लिए शाला प्रबंधन विकास समिति से अनुमोदन नहीं लेने प्रारंभिक जांच में पुष्टि हुई है।
स्कूल की प्राचार्य का यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम के विपरीत गंभीर कदाचार है। अतः उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय, कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी बालोद नियत किया गया।
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