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3 साल बाद फिर गरमाया तूएगोंदी मामला: केस वापसी के विरोध में आदिवासी समाज का कलेक्टोरेट में धरना, बोले—हमें चाहिए न्याय

बालोद। बालोद जिले के डौंडी लोहारा ब्लॉक के ग्राम तूएगोंदी में वर्ष 2022 में हुई हिंसक घटना का मामला एक बार फिर तूल पकड़ने लगा है। छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग द्वारा इस प्रकरण को राजनीतिक आंदोलन से जुड़ा बताते हुए केस वापसी के लिए कलेक्टर को पत्र भेजे जाने के बाद आदिवासी समाज में नाराजगी बढ़ गई है। गुरुवार को पीड़ित आदिवासी ग्रामीण न्याय की मांग को लेकर बालोद कलेक्टोरेट पहुंचे और धरना देते हुए केस वापस नहीं लेने की मांग की।

बताया जा रहा है कि ग्रामीण सुबह 4 बजे अपने गांव से निकले और लगभग 55 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर दोपहर तक बालोद कलेक्टोरेट पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि वे बिना भोजन किए परिवार सहित यहां पहुंचे हैं और न्याय की गुहार लगा रहे हैं। करीब 80 ग्रामीणों का दल कलेक्टर से मिलने पहुंचा, लेकिन कलेक्टर के दौरे पर होने के कारण उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। अन्य अधिकारियों ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन शाम 5 बजे तक कलेक्टर से मुलाकात नहीं होने पर भी ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे।

ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी भी हालत में केस वापस नहीं लेंगे और उन्हें न्याय चाहिए। उनका आरोप है कि प्रशासन द्वारा मामले को राजनीतिक बताकर केस खारिज करने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला

दरअसल वर्ष 2022 में पाटेश्वर धाम स्थित एक मूल धार्मिक स्थल में आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक तरीके से पूजा-पाठ कर रहे थे। इसी दौरान कथित पशु बलि को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ और बड़ी संख्या में बाहरी लोग रॉड व डंडे लेकर पहुंचे तथा हमला कर दिया। घटना में लगभग 10 लोग घायल हुए थे और मौके पर हिंसक झड़प व पथराव की स्थिति बनी थी।

घटना के बाद मंगचुआ थाने में 18 आरोपियों के खिलाफ प्राणघातक हमला, आर्म्स एक्ट तथा एससी-एसटी एक्ट सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया। अलग-अलग चरणों में सभी आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तार किया गया था। आरोपियों में कुछ भाजयुमो से जुड़े नेता और युवा भी शामिल थे। जून 2022 में मुख्य आरोपी तत्कालीन दल्ली नगर भाजयुमो अध्यक्ष संजीव सिंह ने सरेंडर किया था, जिसके बाद उन्हें जेल भेजा गया था। मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है और अब तक कुछ गवाहों के बयान हुए हैं, जबकि 52 लोगों के बयान होना शेष है।

पीड़ित पक्ष का कहना है कि घटना के समय राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, जबकि वर्तमान में भाजपा की सरकार है और अब इस मामले को राजनीतिक बताकर केस वापस लेने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्य प्रार्थी श्याम सिंह नेताम ने कहा कि “हमारे समाज पर हमला हुआ है, हम केस वापस नहीं लेंगे। हम अपनी पारंपरिक पूजा कर रहे थे, तभी अचानक हमला किया गया और कई लोग घायल हुए। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, हमारी लड़ाई जारी रहेगी।”

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि न्यायालय में जब केस खारिज करने को लेकर उनकी राय पूछी गई तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। इसके बावजूद शासन के पत्र के आधार पर कलेक्टर द्वारा मामले को राजनीतिक बताते हुए प्रकरण वापसी के लिए न्यायालय को पत्र भेजा गया है, जिस पर उन्होंने आपत्ति जताई है।

आदिवासी समाज का कहना है कि वे न्याय के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और किसी भी परिस्थिति में मामले को वापस नहीं लेने देंगे।

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