विवाह की पंगत बनी जनजागरूकता का मंच: 500 ग्रामीणों को खिलाई गई फाइलेरिया रोधी दवा, करहीभदर बना मिसाल



बालोद। जिले में चल रहे फाइलेरिया मुक्त अभियान के तहत करहीभदर गांव में एक अनूठा और प्रेरणादायक आयोजन देखने को मिला। जहां एक ओर कई स्थानों पर लोग फाइलेरिया की गोली खाने से हिचकिचाते हैं, वहीं करहीभदर में जागरूक ग्रामीणों और स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता ने मिसाल पेश की। गांव में विश्राम साहू के यहां आयोजित विवाह समारोह के दौरान सामूहिक रूप से लगभग 500 ग्रामीणों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई गई और पूरे गांव को फाइलेरिया मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया।
शाम 7 बजे विवाह भोज की पंगत में पहुंचे ग्रामीणों को स्वास्थ्य विभाग की टीम और जनप्रतिनिधियों ने समझाइश देकर फाइलेरिया की दवा खिलाई। आयोजन को लेकर पहले से ही विस्तृत योजना बनाई गई थी, ताकि अधिक से अधिक लोगों को एक ही स्थान पर दवा दी जा सके। विवाह जैसे सामाजिक आयोजन को जनस्वास्थ्य अभियान से जोड़ने का यह प्रयास पूरे क्षेत्र में सराहना का विषय बना हुआ है।
इस विशेष अभियान में उप स्वास्थ्य केंद्र करहीभदर के आरएचओ लाकेश्वर साहू, पूजा लोन्हारे, मितानिनों तथा ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। ग्राम अध्यक्ष लीला राम डड़सेना, उप सरपंच धनंजय साहू और हेमंत अठनागर के नेतृत्व में ग्रामीणों को दवा के महत्व के बारे में बताया गया और सभी को पंगत में ही फाइलेरिया रोधी गोली खिलाई गई।
मितानिन माधुरी साहू, वेद लता साहू, धनेश्वरी साहू, सरस्वती साहू और नैन बाई भंडारी बूथ स्थल पर तैनात रहीं। उन्होंने ग्रामीणों को दवा के लाभ और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुए जागरूक किया। ग्राम अध्यक्ष और उप सरपंच की अगुवाई में लोगों ने उत्साहपूर्वक दवा सेवन किया और गांव को फाइलेरिया मुक्त बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार फाइलेरिया जैसी बीमारी से बचाव के लिए सामूहिक दवा सेवन बेहद आवश्यक है, लेकिन कई क्षेत्रों में लोग दवा लेने से कतराते हैं। ऐसे में करहीभदर गांव का यह प्रयास पूरे जिले के लिए प्रेरणा बना है। यहां ग्रामीणों में न केवल जागरूकता देखने को मिली, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के प्रति भरोसा भी स्पष्ट नजर आया।
गांव के उप सरपंच धनंजय साहू के अथक प्रयास से वृहद स्तर पर दवा वितरण संभव हो पाया। जिन ग्रामीणों तक अभी दवा नहीं पहुंच पाई है, उन्हें करहीभदर में आयोजित होने वाले रामायण सम्मेलन के दौरान फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने की योजना बनाई गई है।
यह आयोजन दर्शाता है कि यदि जनप्रतिनिधि, स्वास्थ्य विभाग और ग्रामीण मिलकर कार्य करें तो किसी भी जनस्वास्थ्य अभियान को सफल बनाया जा सकता है। करहीभदर गांव ने फाइलेरिया मुक्त बालोद जिले की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाया है।
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