मारपीट व धमकी के आरोप में घिरे युवा कांग्रेस विधानसभा उपाध्यक्ष देवेंद्र साहू ने कहा मुझे फंसाने की है साजिश, मैं तो घायल की मदद करने गया था पढ़िए उनका क्या है आरोपों पर कहना?



बालोद। विगत दिनों ग्राम जगन्नाथपुर से सुंदरा मार्ग पर शिवरात्रि की रात को एक मारपीट की घटना सामने आई थी। जिसमें लाटाबोड़ की रहने वाली दमयंती गंगराले ने मनौद के देवेंद्र साहू के खिलाफ मारपीट सहित विभिन्न धाराओं के तहत शिकायत दर्ज करवाई है। देवेंद्र साहू वर्तमान में युवा कांग्रेस विधानसभा उपाध्यक्ष पद पर है। महिला दमयंती का आरोप है कि देवेंद्र द्वारा उन्हें खुद को कांग्रेस नेता व उनके क्षेत्र होने की धमकी देकर मारपीट की गई है। तो वही देवेंद्र साहू ने भी अपना पक्ष मीडिया के जरिए रखने की कोशिश की है। उन्होंने इन आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि वह तो घटनास्थल पर एक घायल की मदद करने के लिए पहुंचे थे। मैंने उनसे मारपीट नहीं की है ना उन्हें किसी तरह से धमकाया है। बल्कि स्थानीय लोगों ने उनकी पिटाई की है। क्योंकि महिला द्वारा मुझे पहचानने के कारण थाने में मेरे नाम से शिकायत कर दी गई है। उनके साथ मारपीट तो स्थानीय ग्रामीणों ने की। जिन्हें मैं भी ठीक से नहीं जानता सब कुछ अंधेरे में हुआ। देवेंद्र साहू ने कहा कि भोथली के रहने वाले किशोर विश्वकर्मा व उनका एक साथी सुंदरा मार्ग में बाइक से गिर गए थे। जिसकी जानकारी मिलने के बाद में उनकी मदद के लिए पहुंचे थे। उनकी बाइक फस गई थी। जिसे उठा रहे थे। इसी दौरान स्कॉर्पियो में लाटाबोड़ के गंगराले परिवार के लोग आए और रास्ते से हटने के लिए गाली गलौज कर रहे थे। मैं तो घायल को मदद कर रहा था और घायल को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सांकरा में पहुंचाया। तभी गंगराले परिवार के लोगों द्वारा गाली-गलौज किए जाने पर आक्रोशित स्थानीय ग्रामीणों ने उनकी पिटाई कर दी थी। मैं वहां से चला गया था। बाद में मालूम हुआ कि उन लोगों ने मेरे खिलाफ शिकायत की है। जिस महिला ने रिपोर्ट लिखाई है उनसे तो किसी तरह से कोई मारपीट नहीं की है। वहीं इस घटना के दौरान घायल किशोर विश्वकर्मा ने बताया कि देवेंद्र साहू घटनास्थल पर उनकी मदद के लिए आए थे। वह और उनका दोस्त बाइक से गिर गए थे। दोनों को देवेंद्र ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सांकरा ले जाकर भर्ती करवाया।

महिला किसी पर भी लगा रही मारपीट का आरोप

देवेंद्र साहू ने बताया कि मुझे थाने बुलाया गया था। जहां उनका एक दोस्त भी साथ में गया था। महिला ने उसे भी देखा तो उस पर भी आरोप लगा दिया गया कि उस दिन मारपीट में यह भी था। जबकि वह मेरा दोस्त खैरागढ़ गया था, उसी रात को वह वापस आया था। उसका इस घटना से कहीं कोई लेना-देना भी नहीं था। बाद में पुलिस को हमने समझाया तब जाकर मेरे दोस्त के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया गया। इस बात से समझ सकते हैं कि महिला किसी पर भी बेबुनियाद आरोप लगा सकती है। मुझे आशंका है कि कुछ लोग मेरे बढ़ते राजनीतिक वर्चस्व को दबाने व छवि खराब करने के लिए मुझे इस तरह बदनाम कर फंसाने की साजिश रच रहे हैं। मैं तो घायल दोस्तों की मदद करने के लिए पहुंचा था। इसके लिए सरकार व पुलिस खुद प्रोत्साहित करती है कि सड़क पर पड़े घायलों की मदद करें। उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचाए। मुझे क्या मालूम था कि वहां यह सब होगा।

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