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टिकरी में अनोखे अंदाज में मनाया गया विश्व पर्यावरण दिवस: पीपल के पेड़ को साड़ी पहनाकर मां के रूप में किया श्रृंगार, दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश

बेटियों की अनूठी पहल बनी आकर्षण का केंद्र, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने लिया पर्यावरण बचाने का संकल्प

बालोद। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जहां देश-दुनिया में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया, वहीं बालोद जिले के ग्राम पंचायत टिकरी में एक अनूठी पहल ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। ग्राम पंचायत टिकरी की सरपंच ललिता रितेश देवांगन के नेतृत्व में गांव की बेटियों ने पीपल के एक विशाल वृक्ष को साड़ी पहनाकर मां के स्वरूप में सजाया और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संदेश दिया।

पंचायत भवन के सामने स्थित पीपल के पेड़ को रंग-बिरंगी साड़ियों, सजावटी सामग्री और आकर्षक लाइटों से सजाया गया था। सजे हुए वृक्ष को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो किसी विवाह समारोह में दुल्हन का श्रृंगार किया गया हो। यह अनूठी प्रस्तुति ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बनी रही और लोगों ने इसकी खूब सराहना की।

गांव की बेटियों ने दिया प्रकृति को मां मानने का संदेश

कार्यक्रम में गांव की बेटियों ने प्रकृति और वृक्षों को मां के समान बताते हुए संदेश दिया कि जिस प्रकार मां अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है, उसी प्रकार वृक्ष भी मानव जीवन को निस्वार्थ भाव से ऑक्सीजन, फल, फूल और छाया प्रदान करते हैं। इसलिए प्रकृति की रक्षा करना हम सभी का नैतिक कर्तव्य है।

रैली, स्लोगन और कविताओं से गूंजा पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम का शुभारंभ शाम 7 बजे गायत्री परिवार के सदस्यों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं पूजा-अर्चना के साथ हुआ। इसके बाद गांव की माताओं, बहनों, बच्चों और ग्रामीणों ने पर्यावरण जागरूकता रैली निकाली। प्रतिभागियों ने हाथों में स्लोगन, तख्तियां और पेंटिंग लेकर गांव की गलियों का भ्रमण किया तथा लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया।

रैली के पश्चात बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण पर आधारित कविताओं का पाठ किया, वहीं वरिष्ठजनों ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।

प्रकृति हमारी मां है: सरपंच ललिता देवांगन

सरपंच ललिता रितेश देवांगन ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस को विशेष बनाने के लिए गांव की बेटियों ने यह अनूठी पहल की। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोगों तक यह संदेश पहुंचाना था कि प्रकृति हमारी मां के समान है। जिस तरह एक मां अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है, उसी तरह वृक्ष भी हमें जीवनदायिनी वायु, फल-फूल और अनेक संसाधन प्रदान करते हैं। इसलिए हमें भी प्रकृति को कुछ लौटाने और उसकी रक्षा करने का संकल्प लेना चाहिए।

बढ़ती गर्मी और वृक्षों की कटाई चिंता का विषय

रितेश देवांगन ने कहा कि लगातार हो रही अंधाधुंध वृक्षों की कटाई और बढ़ते तापमान ने पर्यावरण को गंभीर संकट की ओर धकेल दिया है। ऐसे समय में प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक होकर अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह के नवाचारपूर्ण आयोजनों से समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों की भागीदारी बढ़ेगी।

बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे उपस्थित

कार्यक्रम में ढालू विश्वकर्मा, शिव कुर्रे, श्रवण सोनी, निर्मल सिन्हा, डिगेंद्र साहू, प्रभा साहू, वंदना मेश्राम, अशोक मानिकपुरी, निधि साहू, छाया साहू, आस्था देवांगन, भोजलता देशमुख, राजेंद्र साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, युवा एवं बच्चे उपस्थित रहे।

विश्व पर्यावरण दिवस पर टिकरी में आयोजित यह अनूठा आयोजन न केवल आकर्षण का केंद्र बना, बल्कि लोगों के मन में प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण का भाव भी जागृत कर गया।

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