मध्यम वर्षा और घने बादलों की संभावना को देखते हुए फसल प्रबंधन, जल निकासी और पशुपालन में सावधानी बरतने की अपील
बालोद, 22 जुलाई 2026। कृषि विज्ञान केंद्र बालोद ने जिले के किसानों के लिए मौसम पूर्वानुमान के आधार पर खरीफ फसलों, उद्यानिकी एवं पशुपालन को लेकर विस्तृत सामयिक कृषि सलाह जारी की है। आगामी दिनों में मध्यम वर्षा एवं घने बादल छाए रहने की संभावना को देखते हुए किसानों को फसल प्रबंधन, जल निकासी और कृषि कार्यों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि जिन किसानों के खेतों में धान की रोपाई एवं बियासी का कार्य शेष है, वे इसे 30 जुलाई तक अनिवार्य रूप से पूरा करें। धान की सीधी बुवाई वाले खेतों में खरपतवार नियंत्रण के लिए अनुशंसित निंदानाशकों का प्रयोग मौसम साफ होने पर ही करें। लगातार वर्षा की स्थिति में लेही विधि अथवा ड्रम सीडर से बुवाई को प्राथमिकता देने तथा खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था रखने की सलाह दी गई है। धान की रोपाई 20 से 21 दिन की स्वस्थ पौध से 20 से 10 सेंटीमीटर की दूरी पर करने तथा रोपाई के 8 से 10 दिन बाद अनुशंसित मात्रा में नत्रजन (यूरिया) देने की सलाह भी दी गई है।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से खरीफ फसलों में केवल अनुशंसित एवं प्रमाणित किस्मों के बीजों का उपयोग करने का आग्रह किया है। धान के लिए इंद्रावती, एम.टी.यू. 1153, विक्रम टी.सी.आर. एवं छत्तीसगढ़ धान 1919, सोयाबीन के लिए आर.एस.सी. 10-46, आर.एस.सी. 11-15 एवं आर.एस.सी. 11-07, अरहर के लिए छत्तीसगढ़ अरहर-1, छत्तीसगढ़ अरहर-2 एवं राजीवलोचन तथा मक्का के लिए पूसा हाईब्रिड-1 एवं विवेक मक्का संकर-51 जैसी उन्नत किस्मों को अपनाने की सलाह दी गई है। मूंग के लिए पी.के.वी.ए.के.एम.-4, शिखा एवं मालवीय ज्योति तथा मूंग एवं उड़द के लिए शिखा, पूसा-105, पी.के.वी.ए.के.एम.-4, इंदिरा उड़द-1, आजाद उड़द-3, बरखा एवं बसंत बहार किस्मों की अनुशंसा की गई है।
वर्तमान मौसम को देखते हुए अरहर, मूंगफली एवं मक्का की फसलों में खरपतवारनाशी का छिड़काव फिलहाल स्थगित रखने की सलाह दी गई है। किसानों से कहा गया है कि वर्षा समाप्त होने एवं मौसम साफ होने के बाद ही खरपतवार नियंत्रण एवं पौध संरक्षण रसायनों का प्रयोग करें। साथ ही सभी खरीफ फसलों को जलभराव से बचाने के लिए खेतों में प्रभावी जल निकास की व्यवस्था सुनिश्चित करें। अरहर, मूंग एवं उड़द की बुवाई से पहले बीजों का राइजोबियम एवं पी.एस.बी. कल्चर तथा अनुशंसित फफूंदनाशी से बीजोपचार करने, निर्धारित कतार एवं पौध दूरी बनाए रखने और संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने की सलाह दी गई है। गन्ना उत्पादक किसानों को सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए अनुशंसित कीटनाशकों का उपयोग केवल मौसम अनुकूल होने पर करने का सुझाव दिया गया है।
उद्यानिकी फसलों के संबंध में किसानों को वर्षाकालीन सब्जियों भिंडी, बैंगन, मिर्च, खीरा, लौकी, कद्दू, मूली एवं फूलगोभी की खेती की तैयारी करने की सलाह दी गई है। करेला एवं बरबट्टी की मेड़-नाली पद्धति से बुवाई करने तथा लौकी एवं कुम्हड़ा की पौध पॉलीबैग में तैयार करने का सुझाव दिया गया है। आम, अमरूद, केला एवं पपीता के पौधरोपण के समय गोबर खाद एवं अनुशंसित उर्वरकों का उपयोग करने तथा अदरक एवं हल्दी की फसल में मल्चिंग एवं उचित जल निकास बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके साथ ही गेंदा सहित वर्षाकालीन पुष्पों की तैयार पौध की मुख्य खेत में रोपाई करने की सलाह दी गई है।
पशुपालन के क्षेत्र में किसानों को गलघोटू एवं लंगड़ा बुखार से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण कराने, पशुओं को जलभराव वाले स्थानों पर नहीं चराने, कृमिनाशक दवाओं का उपयोग करने तथा पशुशाला में स्वच्छता एवं उचित वेंटिलेशन बनाए रखने की सलाह दी गई है। दुग्ध पशुओं को प्रतिदिन 25 से 30 किलोग्राम हरा चारा, संतुलित सूखा चारा एवं 25 से 30 ग्राम मिनरल मिश्रण खिलाने की अनुशंसा की गई है। मुर्गीपालकों को रानीखेत रोग से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण कराने तथा नवजात बछड़ों को जन्म के दो घंटे के भीतर खीस (प्रथम दुग्ध) अवश्य पिलाने की सलाह दी गई है।
कृषि विज्ञान केंद्र बालोद ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम पूर्वानुमान के अनुसार ही कृषि कार्य करें और अनावश्यक रूप से खरपतवारनाशी एवं कीटनाशकों का छिड़काव न करें। किसी भी तकनीकी जानकारी अथवा कृषि संबंधी समस्या के समाधान के लिए किसान कृषि विज्ञान केंद्र बालोद के कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क कर सकते हैं। विशेषज्ञों की सलाह प्राप्त करने के लिए टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-180-1551 पर संपर्क करने के साथ ही आवश्यक कृषि जानकारी एवं परामर्श के लिए किसान सारथी पोर्टल का भी उपयोग किया जा सकता है।









