निजीकरण, ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग पर रोक लगाने की मांग; रिक्त पदों पर सीधी भर्ती सहित 9 सूत्रीय मांगें रखीं
बालोद। छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ जिला शाखा बालोद के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों ने स्वास्थ्य कर्मचारियों की शासन स्तर पर लंबित मांगों के निराकरण तथा स्वास्थ्य विभाग में बढ़ते निजीकरण, ठेका प्रथा एवं आउटसोर्सिंग पर रोक लगाने की मांग को लेकर जिला कलेक्टर बालोद को मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन के नाम ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने कहा कि उनकी विभिन्न मांगें लंबे समय से शासन स्तर पर लंबित हैं, लेकिन अब तक इन पर संतोषजनक निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है। संघ का कहना है कि मांगों के निराकरण में देरी का प्रभाव विभागीय कार्यों और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है।
स्वास्थ्य कर्मचारियों ने स्वास्थ्य विभाग में बढ़ते निजीकरण, ठेका प्रथा एवं आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसे तत्काल बंद करने की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि इन व्यवस्थाओं से नियमित रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। संघ ने शासन से कर्मचारियों की लंबित मांगों का शीघ्र निराकरण करते हुए स्वास्थ्य विभाग को निजीकरण, ठेका प्रथा एवं आउटसोर्सिंग से मुक्त रखने की मांग की है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि शासन स्तर पर विभाग द्वारा स्वास्थ्य कर्मचारियों के वेतन के संबंध में भेजे गए प्रस्ताव पर तत्काल सकारात्मक कार्रवाई की जाए, क्योंकि आठवां वेतन आयोग लागू होने पर कर्मचारियों को बड़ा आर्थिक नुकसान होने की संभावना है। इसके साथ ही संघ द्वारा समय-समय पर पत्राचार के माध्यम से शासन को अवगत कराई गई लंबित मांगों पर भी शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की गई।
संघ ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को निजीकरण, ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग से मुक्त रखा जाना चाहिए, क्योंकि इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा प्रदेश में हेल्थ सेक्टर में कार्य करने वाले लोगों के लिए पंजीयन अनिवार्य करने की मांग की गई, ताकि प्रदेश के प्रशिक्षित एवं प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे चिकित्सक, नर्स एवं पैरामेडिकल कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित हो सके तथा फर्जी डिग्री और डिप्लोमा धारकों की पहचान की जा सके।
कर्मचारियों ने विभागीय संस्थाओं में स्वीकृत सेटअप के अनुसार सीधी भर्ती तत्काल प्रारंभ करने की मांग भी रखी। संघ के अनुसार प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में लगभग 35 से 40 प्रतिशत पद रिक्त होने के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके साथ ही विभाग में कार्यरत संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए समान कार्य, समान वेतन की स्पष्ट नीति निर्धारित करने की मांग की गई।
ज्ञापन में प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में जीवनदीप समिति के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों के मानदेय में एकरूपता लाने की मांग भी की गई। संघ का कहना है कि अलग-अलग संस्थानों में कर्मचारियों को अलग-अलग मानदेय दिया जा रहा है, इसलिए पूरे प्रदेश में एक समान नीति निर्धारित कर जीवनदीप समिति के कर्मचारियों के आर्थिक शोषण को रोका जाना चाहिए। इसके अलावा ऐसे संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों, जिनकी सेवाओं की लगातार आवश्यकता है, उनके लिए नियमित सेटअप स्वीकृत करने तथा प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में स्वास्थ्य आयोग का गठन करने की मांग की गई।
स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो कर्मचारी लोकतांत्रिक एवं वैधानिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी।
ज्ञापन रैली में जिला अध्यक्ष आर.के. सोनबोईर, उपाध्यक्ष राजेश कुमार साहू, सुनीता देवदास, प्रांतीय सचिव अनिल कुमार सिन्हा, महामंत्री नीरज गौतम, विकासखंड अध्यक्ष डौण्डीलोहारा मुकेश राणा, भूपेन्द्र डड़सेना, डौण्डी से मीना बाघमारे, संगठन मंत्री एस.एल. गंधर्व, प्रांतीय सचिव सी.एच.ओ. देवानंद रात्रे, एस.एल. देवांगन, संभागीय सचिव सरस्वती साहू, प्रचार सचिव संजय नंदा, जिला चिकित्सालय से एस. नेताम, एस. सोनी, पिंकी साहू, केसरिया, रविकांत सिहारे, फनिश भुआर्य, राहुल, सोमप्रकाश साहू, डौण्डीलोहारा से परमेश्वर साहू, भवेश देवांगन, गुंडरदेही से प्रीतम ठाकुर सहित समस्त सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी एवं जीवनदीप समिति में कार्यरत कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।










