DAILY BALOD NEWS

EDITOR IN CHIEF – DEEPAK YADAV.9755235270

Advertisement

अजब-गजब: बालोद में दिखी दुनिया की सबसे छोटी गाय!

कृत्रिम गर्भाधान से जन्मी पुंगनूर नस्ल बनी आकर्षण का केंद्र, घनश्याम यदु के प्रयासों से जिले में पहली बार मिली सफलता

बालोद/गुंडरदेही। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में पहली बार दुनिया की सबसे छोटी और दुर्लभ मानी जाने वाली पुंगनूर नस्ल की गाय का सफल उत्पादन होने से पशुपालकों और पशु विशेषज्ञों के बीच उत्साह का माहौल है। आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध इस नस्ल को कृत्रिम गर्भाधान तकनीक के माध्यम से जिले में जन्म दिलाया गया है। इसे राज्य में अपनी तरह का पहला मामला बताया जा रहा है।

प्रदर्शनी में बनी आकर्षण का केंद्र

पिछले वर्ष भरदाकला में आयोजित पशु मेले में ग्राम पैरी निवासी गौरव माहेश्वरी ने इस गाय की प्रदर्शनी लगाई थी। अपने छोटे कद, आकर्षक स्वरूप और दुर्लभता के कारण यह गाय मेले में लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। पशुपालकों ने बड़ी संख्या में इस दुर्लभ नस्ल के बारे में जानकारी हासिल की।

अधिकारियों के मार्गदर्शन में घनश्याम यदु के प्रयासों से मिली सफलता

पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक डीके सिहारे के निर्देशन और पशु चिकित्सक डॉ. एसके नायक के मार्गदर्शन में खेरूद निवासी कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता घनश्याम यदु के प्रयासों से बालोद जिले में पहली बार पुंगनूर नस्ल की गाय का जन्म संभव हो सका।

अब तक कृत्रिम गर्भाधान के जरिए इस नस्ल के आठ बछड़ों का जन्म हो चुका है। घनश्याम यदु ने कहा कि इस उपलब्धि से जिले के पशुपालकों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुले हैं।

क्या है पुंगनूर गाय की खासियत?

पुंगनूर गाय का नाम आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के पुंगनूर क्षेत्र के नाम पर रखा गया है। इसे दुनिया की सबसे छोटी देसी गायों में गिना जाता है।

पुंगनूर गाय की प्रमुख विशेषताएं

  • ऊंचाई: लगभग 97 से 107 सेंटीमीटर
  • वजन: 170 से 240 किलोग्राम
  • दूध उत्पादन: 1 से 2 किलोग्राम प्रतिदिन
  • दूध में वसा: 8 प्रतिशत तक फैट
  • विशेषता: शुष्क और कठिन वातावरण में भी आसानी से रह सकती है
  • औसत उम्र: लगभग 15 से 25 वर्ष तक

खत्म होने की कगार से वापसी की कहानी

डॉ. एसके नायक ने बताया कि कुछ वर्षों पहले पुंगनूर नस्ल विलुप्ति के कगार पर पहुंच गई थी। वर्ष 1997 में इसकी केवल 21 गायों की पहचान की गई थी। हालांकि, राज्य और केंद्र सरकार के संरक्षण प्रयासों के चलते वर्ष 2019 की पशुधन गणना में इनकी संख्या बढ़कर 13,275 तक पहुंच गई।

दूध ही नहीं, गोबर और गोमूत्र भी कीमती

पुंगनूर गाय का दूध भले ही कम मात्रा में मिलता है, लेकिन इसमें वसा और पोषक तत्व अधिक होने के कारण इसकी मांग काफी रहती है। डेयरी उत्पादों के लिए इसे अत्यंत उपयोगी माना जाता है।

इसके अलावा, पुंगनूर गाय के गोमूत्र में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाने की बात कही जाती है और आंध्र प्रदेश के किसान इसका उपयोग जैविक खेती में करते हैं। गोबर और गोमूत्र दोनों का बाजार में अच्छा मूल्य मिलने की जानकारी भी दी गई है।

तिरुपति बालाजी से भी जुड़ा है विशेष संबंध

जानकारों के अनुसार, पुंगनूर गाय के दूध से बने मावे का उपयोग वर्षों से तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसिद्ध लड्डू तैयार करने में किया जाता रहा है। यही कारण है कि इस नस्ल का धार्मिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व माना जाता है।

बालोद के पशुपालकों के लिए नई उम्मीद

कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता घनश्याम यदु के प्रयासों से बालोद जिले सहित छत्तीसगढ़ के पशुपालकों को इस दुर्लभ नस्ल से परिचित होने का अवसर मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस नस्ल का संवर्धन सफलतापूर्वक किया गया तो भविष्य में यह पशुपालकों के लिए अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकती है।

बालोद जिले में पुंगनूर गाय का सफल उत्पादन न केवल पशुपालन क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि आधुनिक कृत्रिम गर्भाधान तकनीक की सफलता का भी उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है।

You cannot copy content of this page