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39 वर्ष 9 माह की शिक्षकीय सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए मरकाम सर, भावभीनी विदाई देकर दी गई उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं

किल्लेकोड़ा के तीनों शासकीय विद्यालयों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ विदाई समारोह, पूरा शाला परिवार पहुंचा गृह ग्राम सूरडोंगर छोड़ने

किल्लेकोड़ा/ बालोद। वनांचल क्षेत्र में स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय किल्लेकोड़ा के सभागार में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, शासकीय माध्यमिक शाला एवं शासकीय प्राथमिक शाला किल्लेकोड़ा के संयुक्त तत्वावधान में सेवानिवृत्त व्याख्याता मरकाम सर के सम्मान में भावभीना विदाई समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उन्हें सम्मानित करते हुए उनके दीर्घ एवं सफल सेवाकाल के लिए शुभकामनाएं दी गईं तथा स्वस्थ, सुखी एवं दीर्घायु जीवन की कामना की गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वाय.एस. मरकाम रहे, जबकि अध्यक्षता अजय मुखर्जी, प्राचार्य ने की। विशेष अतिथि के रूप में श्रीमती दमयंती मरकाम (शिक्षिका), एन.आर. शिवना (प्रधान पाठक, माध्यमिक शाला), श्रीमती अनीता मेश्राम (प्रधान पाठक, प्राथमिक शाला), श्रीमती हेमलता विश्वकर्मा (सरपंच), चंद्रशेखर (उपसरपंच), होरीलाल सिन्हा, श्रीमती दीपक पंच, संजय सिंह (कर्मचारी प्रकोष्ठ अध्यक्ष), पुष्पांजलि मरकाम सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदे की पूजन-अर्चना के साथ हुआ।

39 वर्ष 9 माह 11 दिन की रही सेवायात्रा

कार्यक्रम का सफल संचालन एवं संपादन राज्यपाल पुरस्कृत डॉ. बी.एल. साहसी, व्याख्याता ने किया। उन्होंने मरकाम सर के सेवाकाल की जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने 39 वर्ष 9 माह 11 दिन तक शासकीय संस्था में अपनी सेवाएं दीं, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। उनकी प्रथम नियुक्ति 12 जुलाई 1986 को सहायक शिक्षक के रूप में साजा विकासखंड में हुई थी। विभिन्न पदों पर सेवाएं देने के बाद उनका पदोन्नयन 6 अक्टूबर 2009 को उच्चतर माध्यमिक विद्यालय किल्लेकोड़ा में व्याख्याता के रूप में हुआ। इसके बाद वे 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त हुए।

डॉ. साहसी ने कहा कि मरकाम सर ने अपने लंबे सेवाकाल के दौरान विद्यार्थियों के साथ-साथ विद्यालय के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने उनके स्वस्थ, सुखी एवं दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद का जीवन भी सुखमय एवं आनंदमय रहे।

शिक्षकों ने साझा किए अनुभव

इस अवसर पर घनश्याम पटेल ने मरकाम सर के जीवन एवं सेवाकाल का सारगर्भित परिचय प्रस्तुत करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वहीं श्रीमती अनीता मेश्राम ने कहा कि जब से उन्होंने किल्लेकोड़ा में कार्यभार संभाला है, तब से मरकाम सर प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्तर के छात्र-छात्राओं की निरंतर मदद करते आए हैं। उन्होंने मरकाम सर को दिल से शुभकामनाएं दीं।

एन.आर. शिवना ने कहा कि 65 वर्ष की आयु तक शिक्षकीय कार्य करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। सेवाकाल के दौरान अनेक प्रकार की चुनौतियां आई होंगी, जिनका उन्होंने सफलतापूर्वक सामना किया। उन्होंने मरकाम सर के स्वस्थ एवं सुखद भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अजय मुखर्जी ने कहा कि मरकाम सर के पास शिक्षकीय कार्य का व्यापक अनुभव रहा है और आवश्यकता पड़ने पर वे स्वयं भी उनसे सहयोग लेते रहे हैं। उन्होंने मरकाम सर को अनुशासनप्रिय शिक्षक बताते हुए कहा कि उनकी सेवाएं हमेशा याद की जाएंगी। उन्होंने संस्था की ओर से उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

विदाई गीत ने किया भावुक

विदाई समारोह के दौरान कुमारी मोनिका, कुमारी स्वाति, कुमारी प्रवीण, कुमारी रंजीता एवं उनकी सहेलियों द्वारा भावपूर्ण विदाई गीत प्रस्तुत किया गया। गीत की प्रस्तुति ने समारोह को भावुक बना दिया और उपस्थित शिक्षक, विद्यार्थी एवं अतिथियों की आंखें नम हो गईं।

समारोह में विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं एवं पंचायत विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा शाला परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। इनमें जे.पी. बांधव, हेमेंद्र साहू, घनश्याम पटेल, श्रीमती त्रिजला ठाकुर, श्रीमती एम. गुप्ता, ललित देवहारी, खगेश ठाकुर, खिलावन उर्वशा, प्रवीण मानिकपुरी, चुरामन लाल ठाकुर, डोमार सिंह कलिहारी, गोकुल शोरी, कुशल देवदास सहित अन्य शिक्षक एवं कर्मचारी शामिल रहे।

कार्यक्रम के अंत में सी.जी. पटेल, व्याख्याता ने आभार प्रदर्शन किया। समारोह के पश्चात पूरा शाला परिवार मरकाम सर को उनके गृह ग्राम सूरडोंगर तक छोड़ने पहुंचा। इस दौरान सभी ने उन्हें भावभीनी विदाई देते हुए उनके आगामी जीवन के लिए सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की शुभकामनाएं दीं।

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