पर्यावरण गतिविधि एवं संरक्षण टीम ने कराया आयोजन, सीडबॉल निर्माण से लेकर वृक्षारोपण और जल संरक्षण के महत्व पर दी जानकारी
अर्जुंदा। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डुंडेरा, अर्जुंदा में पर्यावरण गतिविधि एवं संरक्षण टीम, जिला बालोद के तत्वावधान में पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भारत के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से सीडबॉल निर्माण एवं बीजरोपण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का परिचय दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 10:30 बजे भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। कार्यशाला में मुख्य अतिथि विद्यालय के प्राचार्य श्री शिव साहू, विशेष अतिथि डुंडेरा सरपंच थलेश सिंह, अतिथि चंद्रलेखा साहू, उपसरपंच जगनू ठाकुर, कोटगांव सरपंच प्रतिनिधि देवेंद्र साहू तथा प्रशिक्षक पर्यावरण गतिविधि जिला सह-संयोजक संजय कुमार साहू उपस्थित रहे। कार्यशाला में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं का सहयोग रहा।

प्रकृति का संरक्षण मानवता का संरक्षण : शिव साहू
मुख्य अतिथि प्राचार्य श्री शिव साहू ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज केवल एक विषय या आंदोलन नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की मूल शर्त बन चुका है। जिस प्रकृति ने मानव को जीवन दिया, वही आज मानव की उपेक्षा और अत्यधिक दोहन के कारण संकट में है। वायु, जल, वन, भूमि, पर्वत, नदियां और जीव-जंतु केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन की निरंतरता के आधार हैं। इसलिए पर्यावरण का संरक्षण वास्तव में मानवता का संरक्षण है।
उन्होंने भारतीय संस्कृति में प्रकृति के प्रति सम्मान की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां प्रकृति को भोग की वस्तु नहीं, बल्कि माता माना गया है। पृथ्वी को धरित्री, नदियों को मां, वनों को देववन और पर्वतों को स्थिर साक्षी के रूप में सम्मान दिया गया। उन्होंने वेदों, उपनिषदों, पुराणों और भारतीय जीवन-पद्धति में पर्यावरण संरक्षण की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रहा है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में अंधाधुंध औद्योगीकरण, शहरीकरण, वनों की कटाई, जलस्रोतों के दोहन और प्रदूषण के कारण पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हुआ है। इसके परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन, वैश्विक तापवृद्धि, प्राकृतिक आपदाएं और जैव विविधता में कमी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। उन्होंने सुंदरलाल बहुगुणा के चिपको आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि पेड़ केवल लकड़ी नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं। उन्होंने सतत विकास की अवधारणा को अपनाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने का आह्वान किया।
सीडबॉल निर्माण और बीजरोपण से पर्यावरण संरक्षण का संदेश

विशेष अतिथि सरपंच थलेश सिंह ने पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न उपायों की जानकारी देते हुए कहा कि सीडबॉल निर्माण एवं बीजरोपण, वृक्षारोपण, जलस्रोतों का संरक्षण, वर्षा जल संग्रहण एवं जल का संयमित उपयोग पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इसके साथ ही प्लास्टिक एवं प्रदूषणकारी पदार्थों का न्यूनतम उपयोग तथा शिक्षा और सामाजिक चेतना के माध्यम से पर्यावरणीय संस्कार विकसित करना भी आवश्यक है।
अतिथि चंद्रलेखा साहू एवं देवेंद्र साहू ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए इसे एक सामूहिक जनआंदोलन का रूप देना आवश्यक है। जब सामाजिक कार्यकर्ता, परिवार और समुदाय एकजुट होकर पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में भाग लेते हैं, तो इसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं।
उन्होंने कहा कि सीडबॉल बनाना एक सरल प्रक्रिया है, जिसे परिवार के सभी सदस्य मिलकर भी कर सकते हैं। परिवार के प्रत्येक सदस्य द्वारा सीडबॉल तैयार कर बीजरोपण करने से पर्यावरण संरक्षण के साथ भावनात्मक जुड़ाव भी पैदा होता है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की।
वृक्षारोपण से पर्यावरण और मानव जीवन को मिलते हैं अनेक लाभ
कार्यशाला में बताया गया कि वृक्षारोपण मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। पेड़ ऑक्सीजन प्रदान करने के साथ हवा से हानिकारक गैसों और धूल को सोखकर पर्यावरण को शुद्ध करते हैं। वे मिट्टी के कटाव को रोकने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने तथा जलचक्र को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और मौसम एवं तापमान को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। हरियाली से मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और तनाव कम करने में मदद मिलती है।
राष्ट्रीय विद्यार्थी पर्यावरण प्रतियोगिता-2026 की दी जानकारी
कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षक एवं पर्यावरण गतिविधि जिला सह-संयोजक संजय कुमार साहू ने विद्यार्थियों को ‘नेशनल स्टूडेंट पर्यावरण प्रतियोगिता-2026’ (NSPC) के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण आधारित प्रतियोगिता है, जिसे भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा शिक्षा मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है। प्रतियोगिता 15 जुलाई से शुरू होकर 15 अगस्त 2026 तक चलेगी।
उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतियोगिता में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि पंजीयन के लिए पोस्टर में दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन किया जा सकता है अथवा संबंधित आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
कार्यक्रम में पर्यावरण गतिविधि से जुड़े कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों, विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं, छात्र-छात्राओं एवं स्थानीय नागरिकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम के दौरान सभी ने अधिक से अधिक पौधे लगाने, सीडबॉल एवं बीजरोपण को बढ़ावा देने तथा लगाए गए पौधों की सुरक्षा करने का संकल्प लिया।












