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सुरों की धुन पर संवरता बचपन, संगीत के साथ शिक्षा का अनूठा संगम बना शिकारीपारा स्कूल

पीएमश्री शासकीय प्राथमिक शाला शिकारीपारा ने नवाचार से बनाई अलग पहचान, म्यूजिक बैंड ग्रुप के जरिए बच्चों की प्रतिभा को मिल रहा मंच

बालोद, 20 जुलाई 2026। जहां शिक्षा और संगीत का संगम होता है, वहां बच्चों के सर्वांगीण विकास की राह और भी मजबूत हो जाती है। बालोद जिले के संकुल केंद्र पाररास अंतर्गत संचालित पीएमश्री शासकीय प्राथमिक शाला शिकारीपारा ने शिक्षा के साथ संगीत को जोड़कर एक अनूठी मिसाल पेश की है। नवाचार और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से यह विद्यालय आज जिले में अपनी अलग पहचान बना चुका है।

सत्र 2022-23 विद्यालय के इतिहास में महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ, जब शाला को केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएमश्री योजना के अंतर्गत चिन्हित किया गया। इस योजना का उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ विद्यालयों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करना है। शाला प्रबंधन और शिक्षकों ने इस उद्देश्य को केवल कागजों तक सीमित न रखकर इसे धरातल पर साकार करने का प्रयास किया है।

म्यूजिक बैंड बना बच्चों की प्रतिभा निखारने का माध्यम

विद्यालय में बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को सामने लाने और उन्हें स्कूल से जोड़ने के उद्देश्य से म्यूजिक बैंड ग्रुप का गठन किया गया। इस बैंड ग्रुप की सबसे खास बात इसकी समावेशी भागीदारी है। इसमें किसी एक कक्षा के बच्चे ही नहीं, बल्कि विद्यालय की विभिन्न कक्षाओं के नन्हे विद्यार्थी शामिल हैं।

बच्चे विभिन्न प्रकार के वाद्य यंत्रों का कुशलतापूर्वक उपयोग करते हैं। दैनिक प्रार्थना सभा से लेकर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक बच्चों के गायन और वादन की मधुर धुनें विद्यालय परिसर में गूंजती हैं, जिससे विद्यार्थियों में उत्साह और आत्मविश्वास का संचार होता है।

बैंड ग्रुप में शामिल बच्चों के लिए प्रधान पाठिका श्रीमती वर्षा यादव द्वारा विशेष गणवेश तैयार कराया गया है। यह गणवेश बच्चों में अनुशासन, एकरूपता और अपने विद्यालय के प्रति गर्व की भावना को और मजबूत करता है।

बच्चों ने निभाई सामाजिक जिम्मेदारी

विद्यालय की उपलब्धियां केवल स्कूल परिसर तक सीमित नहीं हैं। शाला के नन्हे बच्चों ने भी सामाजिक जिम्मेदारी की भावना के साथ शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने में अपनी भूमिका निभाई। बच्चों ने पालकों से संपर्क कर उनसे अपने बच्चों को प्रतिदिन साफ-सुथरे गणवेश में और निर्धारित समय पर विद्यालय भेजने की अपील की।

बच्चों की इस पहल की पालकों ने भी सराहना की और इसका सकारात्मक असर विद्यालय में देखने को मिल रहा है। अब विद्यालय और समुदाय के बीच नियमित संवाद स्थापित हो चुका है तथा शाला की विभिन्न गतिविधियों में पालकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिलती है। यह सहयोगात्मक वातावरण पूरे समुदाय के लिए प्रेरणादायक और गर्व का विषय बन गया है।

शिक्षकों की टीम भावना और मेहनत से बदली तस्वीर

विद्यालय में इस सकारात्मक एवं रचनात्मक वातावरण के निर्माण में प्रधान पाठिका श्रीमती वर्षा यादव, संगीत प्रशिक्षक रानू निषाद तथा शाला के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं की टीम भावना और मेहनत का महत्वपूर्ण योगदान है।

पीएमश्री शासकीय प्राथमिक शाला शिकारीपारा ने यह साबित किया है कि यदि शिक्षा में सही दिशा, नवाचार, उद्देश्य और लगन का समावेश हो, तो सरकारी विद्यालय भी उत्कृष्टता और रचनात्मकता का मॉडल बन सकता है। आज यह विद्यालय जिले के अन्य स्कूलों के लिए प्रेरणा का जीवंत केंद्र बनकर उभर रहा है।

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