महीने भर से घर से दूसरे जिले में आकर भटक रही महिला को बालोद पुलिस ने पहुंचाया घर, पुलिस ने पेश की मानवता की मिसाल



बाजार अतरिया की महिला को रात 11:30 बजे तक घर छोड़ आई बालोद पुलिस, दर-दर भटक, खाना मांग कर भर रही थी पेट, गरीबी ऐसी कि घर वाले भी उसे लेने ना आ सके तो पुलिस ने खुद पहुंचाया घर

बालोद। राजनांदगांव जिले के खैरागढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम बाजार अतरिया की रहने वाली एक महिला उत्तरा बाई मरकाम को बीती रात 11:30 बजे बालोद पुलिस द्वारा घर पहुंचाया गया। जो अपने घर से लगभग 111 किलोमीटर दूर बालोद जिले में करीब महीने भर से भटक रही थी। मानसिक स्थिति ठीक न होने के चलते वह घर से निकली थी पर वापस नहीं जा पा रही थी। इधर उधर रास्ते में भटक रही थी। दर-दर की ठोकरें खा रही थी। कहीं खाना तो कहीं पानी मांग कर गुजारा कर रही थी। महिला की स्थिति को देख लोग उस पर दया दिखा कर उसकी मदद तो करते रहे लेकिन कोई उनके बारे में जानकर उन्हें उनके परिजनों तक पहुंचाने को लेकर आगे नहीं आ रहा था। ऐसी स्थिति में बालोद पुलिस व DailyBalodNews ने मानवता की मिसाल पेश की। दरअसल में बालोद थाना क्षेत्र के ग्राम जगन्नाथपुर में लगभग 1 हफ्ते से उक्त महिला भटक रही थी। इसके पहले वह अर्जुंदा और राजनांदगांव क्षेत्र से भटकते हुए इस इलाके में पहुंची थी जगन्नाथपुर में उक्त महिला पर DailyBalodNews की नजर पड़ी और हमने उनसे पूछताछ की। गनीमत महिला अपना नाम पता बता पाई और उनके बताए पते अनुसार जानकारी लिखकर उनकी फोटो को सोशल मीडिया में वायरल किया गया। ताकि उनके परिजनों तक जानकारी पहुंचे व पुलिस प्रशासन को भी इसकी खबर की गई।, एसपी जीआर ठाकुर, एएसपी प्रज्ञा मेश्राम, बालोद थाना प्रभारी मनीष शर्मा सहित अन्य स्टाफ को इसकी जानकारी पहुंचाई गई। सोशल मीडिया में पोस्ट वायरल करने के बाद राजनांदगांव, खैरागढ़ आसपास क्षेत्र से महिला के बारे में जानकारी लेने के लिए लोगों के फोन आने लग गए। खैरागढ़ थाना प्रभारी के अलावा यातायात थाना बालोद में पदस्थ आरक्षक अरविंद कुमार से मालूम हुआ कि महिला बाजार अतरिया खैरागढ़ में रहती है जो उनका मायका है। उनका ससुराल लालपुर राजनांदगांव है। पर मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण उनका पति भी उन्हें मायके में छोड़ कर चला गया है। तो वहीं इस स्थिति को देख उनके मायके पक्ष के परिजन भी उसकी देखभाल ठीक से नहीं करते और उसे घूमने के लिए छोड़ दिया है। कभी इस गांव तो कभी उस गांव घूमते, भटकते रहती है। मायके पक्ष के परिजनों की आर्थिक स्थिति भी उतनी अच्छी नहीं है कि महिला का बेहतर इलाज करवा सके और उनका खर्चा उठा सके।

बालोद पुलिस ने लिया मामले को गंभीरता से

मामले की जानकारी मिलने के बाद बालोद पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया। थाना प्रभारी मनीष शर्मा, सहायक उपनिरीक्षक धरम लाल भुआर्य, डीआर भांडेकर, प्रधान आरक्षक बी एन कामड़ी ने तत्परता दिखाते हुए महिला के बारे में भी पता किया। कुछ घंटों के भीतर जगन्नाथपुर में बालोद पुलिस की टीम पहुंची और महिला स्टाफ द्वारा उसे गाड़ी में बैठा कर थाने ले गए। जहां पर उनके परिजनों की जानकारी हासिल कर उनसे संपर्क किया गया।

आर्थिक स्थिति कमजोर, गाड़ी की व्यवस्था नहीं कर पाए परिजन

गरीबी व आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते महिला को घर लाने के लिए उनके परिजन गाड़ी की व्यवस्था नहीं कर पा रहे थे। ऐसी स्थिति में बालोद पुलिस ने मानवता दिखाते हुए सरकारी वाहन से महिला को उनके घर छोड़ने का फैसला किया। रात करीब 11:30 बजे बालोद पुलिस महिला को लेकर उनके घर बाजार अतरिया, खैरागढ़ पहुंची और उनके परिजनों को सुपुर्द किया गया। इस नेक काम में पुलिस की टीम में शामिल अशोक साहू, संध्या ठाकुर, भागीरथी उइके, छन्नू बंजारे, ग्राम सरपंच अरुण साहू ने भी भूमिका निभाई। महिला के भाई पप्पू धुर्वे ने बताया कि बहन को लाने के लिए गाड़ी की व्यवस्था नहीं कर पाए। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है तो बहन की मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं है। लालपुर में शादी होकर गई थी। दामाद अरुण कुमार ड्राइवर है।

ये भी पढ़े

You cannot copy content of this page