बालोद| नावल टीचर्स क्रिएटिव फाउंडेशन द्वारा विश्व पुस्तक दिवस पर ऑनलाइन वेबीनार आयोजित की गई। इसकी थीम शिक्षा की बदलती दुनिया में शैक्षिक पुस्तकों का योगदान था। विश्व पुस्तक सप्ताह के अंतर्गत पठित शैक्षिक पुस्तकों के समीक्षात्मक अंश प्रस्तुत किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि राष्ट्रपति अवॉर्डी बेनीराम वर्मा प्रभारी प्राचार्य शा हाई स्कूल पाहरा विकास खण्ड धमधा जिला दुर्ग थे। अध्यक्षता अरुण कुमार साहू अध्यक्ष एनटीसीएफ ने की। कार्यक्रम प्रभारी श्रीमती कैशरीन बेग थी। संचालन, सुरेंद्र कुमार मानिकपुरी,महासमुंद ने किया।सरस्वती वंदना: कु हिमकल्याणी सिन्हा बेमेतरा,राजगीत,श्रीमती हर्षा देवांगन बालोद ने पेश किया।

आमंत्रित प्रक्तागण के रूप में
कु मनिषा सोनवानी-कोरिया, रूपेंद्र सिन्हा बालोद,बिंदिया रानी वर्मा,स्वाति पांडे -मुंगेली, वीरेंद्र _ दुर्ग,,अब्दुल कादिर बलौदा बाजार थे। एनटीसीएफ के अध्यक्ष अरुण साहू ने कहा शिक्षा के ढांचे को लेकर किताब हमें नई रास्ता ,नई सोच देता है,बुराई से लड़ने की ताकत, शब्दों की शिक्षा देती है। शिक्षा वही है जो आधुनिक समय में आदर्श शिक्षक बनने में सहायता देती है, हम आधुनिक समय के अनुसार रहे, शैक्षिक परंपराओं परिवर्तन लाना, नई चीजों को पढ़ना, अच्छी चीजों को समझ कर उसे धारण करना आत्मसात करना और बाहर परिवर्तन लाना किताब की देन है, किताब पढ़ कर शिक्षा परिवर्तन, शिक्षा जगत में उसका उपयोग करना, जीवन में परिवर्तन लाना है l पढ़ने की कला लेखकी कार्य में लगने में सहायक बनती है, अतिरिक्त समय का उपयोग करके तथा पुस्तक में जो सारी बाते लिखी होती है बस उसे अपने अंदर ग्रहण करने की आवश्यकता है, भाषा, गणित, विज्ञान ,कला को विस्तार करती है। उनके द्वारा पुस्तक पर गजल गाया गया। ये जो जिंदगी की जो किताब है,,,,मंत्रमुग्ध करने वाली आवाज थी। कु मनीषा सोनवानी ने कहा
मैंने जय शंकर अवस्थी की पुस्तक में साहस के पैर की व्याख्याता किया। उस पुस्तक से बच्चों जीवन में कैसे प्रभाव पड़ेगा बताया। हमें पुस्तकों को पढ़कर उस सार को किस तरह बच्चों को बताना चाहिए, बच्चो को साहस देने की बात कही। वीरेंद्र कुमार ने स्वामी विवेकानंद जी की पुस्तक, भारती व्याख्यान, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की पुस्तक स्वामी जी की सनातन धर्म, भक्ति ,भूमि की महत्वता दान, धर्म-दर्शन ,एकान ,वेदांत ऐसी पुस्तकों को पढ़कर आत्मसात करने की बात कही। राष्ट्रपति अवॉर्डी मुख्य अतिथि बेनी राम वर्मा ने कहा ज्ञान परंपरा की श्रोती है. रामचरितमानस जैसी पुस्तक जीवन में बदलाव को लाने के लिए साधन है ,पुस्तक ना होती तो बदलाव लाने में बहुत कठिनाई होती, पुराने पुस्तक पर शोध एवं कबीर दास जी की पुस्तकों की व्याख्या करते हुए उन्होंने पुस्तक की महत्वता पर प्रकाश डाला। विमला रानी गंगबेर ने कहा कलाम जी की पुस्तक बाल केंद्रित ,कलाम जी की विचार बाल पुस्तकालय , क्रेप बुक, बाल कल्पना शक्ति का एवं मुंशी प्रेमचंद की पुस्तक ,हामिद का चिमटा पर विस्तार पूर्वक बताया और कहा नीति शिक्षा की पुस्तक का होना अति आवश्यक है ताकि बच्चे में नैतिकता के गुण विकसित हो। रुपेश सिन्हा ने कहा पुस्तक हमारे जीवन को सजाती है, सवारती है, हमारी मित्र है हमें कभी अकेला नहीं छोड़ती है। श्रीमती कैशरीन बेग ने सभी का धन्यवाद करते हुए कहा
पुस्तकें हमें महत्वपूर्ण जानकारी देती हैं, और साथ ही हमें और अधिक प्रखर, बुध्दिमान बनाती हैं। पुस्तकों को पढ़ने से हमारे जीवन में तनाव की कोई जगह नही बचती है और हमारी रचनात्मक क्षमता में वृद्धि होती है। इन्ही सब विशेषताओ के कारण पुस्तको का महत्व बहुत अधिक है। संचालन कर रहे मानिकपुरी के लिए कहा वे स्वर के जादूगर हैं ,उनकी सुमधुर आवाज ने पूरे कार्यक्रम
को शमा बांध रखा। पूरे प्रवक्तागण का धन्यवाद किया. साथ ही पटल में फाउंडर मेंबर सुश्री लिली पुष्पा, विवेक धुर्वे,सदस्य
हिमकल्याणी सिन्हा, नोम साहू, पुष्पा चौधरी , रंजना साहू,बोधनी यदू,सुनील चंद्राकर उपस्थित थे।
