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धान का समर्थन मूल्य बढ़ा तो सड़कों पर बढ़ा अतिक्रमण: खेत बढ़ाने की होड़ में खतरे में आम राहगीर, शिवसेना जिला अध्यक्ष ने की प्रशासन से समय रहते कार्रवाई की मांग

बालोद। धान के समर्थन मूल्य में वृद्धि के बाद जहां किसानों की आय में वृद्धि की उम्मीद जगी है, वहीं इसका एक चिंताजनक असर अब ग्रामीण सड़कों पर भी दिखाई देने लगा है। जिले के कई गांवों में सड़क किनारे के किसान अपने खेत का रकबा बढ़ाने के लिए पक्की सड़कों से लगे शोल्डर क्षेत्र पर अवैध अतिक्रमण कर रहे हैं। इससे सड़कों के किनारे बने सुरक्षा क्षेत्र तेजी से खत्म होते जा रहे हैं और आम लोगों की सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगा है।

जानकारी के अनुसार पहले सड़कों के दोनों ओर 5 से 10 फीट तक साइड शोल्डर उपलब्ध रहते थे, जिससे वाहन चालकों को आवागमन में सुविधा होती थी और दुर्घटना की स्थिति में वाहन सड़क से नीचे उतरकर भी सुरक्षित रुक सकते थे। लेकिन अब कई स्थानों पर खेतों की जुताई और मेड़ बढ़ाने के चलते यह शोल्डर सिमटकर महज एक से डेढ़ फीट रह गया है। कुछ स्थानों पर तो पूरी तरह खत्म हो चुका है और खेत सीधे पक्की सड़क से जुड़ गए हैं।

स्थानीय ग्रामीणों और वाहन चालकों का कहना है कि यह स्थिति बेहद खतरनाक होती जा रही है। खासकर रात के समय या बारिश के मौसम में सड़क किनारे जगह न होने से दोपहिया और चारपहिया वाहनों के फिसलने या टकराने का खतरा बढ़ गया है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और पैदल चलने वाले लोगों को भी सड़क पर चलना जोखिम भरा हो गया है।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कई स्थानों पर खेतों की मेड़ सीधे सड़क से जोड़ दी गई है, जिससे सड़क की चौड़ाई कम होती प्रतीत हो रही है। भारी वाहनों के आवागमन के दौरान क्रॉसिंग में दिक्कत होती है और जरा सी चूक भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में बड़े सड़क हादसे होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन से इस गंभीर विषय पर त्वरित संज्ञान लेने की मांग की है। उनका कहना है कि तहसील प्रशासन, राजस्व विभाग और लोक निर्माण विभाग को संयुक्त रूप से अभियान चलाकर सड़कों के किनारे हो रहे अतिक्रमण की जांच करनी चाहिए और जहां भी अवैध रूप से खेतों का विस्तार किया गया है, वहां तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।

ग्रामीणों ने सुझाव दिया है कि प्रशासन गांव-गांव मुनादी कराकर लोगों को समझाइश दे कि सड़कों के किनारे अतिक्रमण न करें और सार्वजनिक मार्ग को सुरक्षित रखें। इसके साथ ही जिन लोगों ने पहले से अतिक्रमण कर रखा है, उन पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी सार्वजनिक मार्ग पर कब्जा करने का प्रयास न करे।

विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क किनारे पर्याप्त शोल्डर होना आपातकालीन सेवाओं के लिए भी जरूरी है। एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस वाहन को कई बार सड़क किनारे रुककर काम करना पड़ता है। यदि सड़क किनारे पर्याप्त जगह नहीं होगी, तो आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित होंगी और जान-माल की हानि की आशंका बढ़ जाएगी।

ऐसे में आवश्यक है कि प्रशासन समय रहते इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान दे और सड़कों को सुरक्षित बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए। आम नागरिकों की सुरक्षा और सुगम यातायात व्यवस्था के लिए सड़कों के किनारे हो रहे अतिक्रमण पर रोक लगाना अब बेहद जरूरी हो गया है।

शिवसेना के जिला अध्यक्ष विजय पारख ने सड़कों के किनारे बढ़ते अवैध कब्जों को लेकर प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि धान का समर्थन मूल्य बढ़ने के बाद कई किसान खेत का रकबा बढ़ाने के लिए सड़कों के साइड शोल्डर तक अतिक्रमण कर रहे हैं, जिससे आम नागरिकों और वाहन चालकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। विजय पारख ने जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और लोक निर्माण विभाग से संयुक्त अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाने, गांव-गांव मुनादी कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे की नौबत न आए।

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