डेढ़ साल से जिले में आवाजाही कर रहे हैं हाथी, वन विभाग के नाक में भी दम

बालोद। लगभग डेढ़ साल से बालोद जिले में हाथियों के दल का आना जाना लगा हुआ है। इस दौरान तीन से चार जाने हाथियों के आतंक से भी जा चुकी है । तो कई किसानों की फसलें भी तबाह हुई है। इस क्रम में हाथियों का दल 23 से 24 की संख्या में बरही कांडे व आसपास के गांव में घूम रहा है। बीती रात को करीब 2:30 बजे बरही के अंगद विला फार्म हाउस में हाथियों के इस दो दर्जन के दल ने जमकर उत्पात मचाया है। जहां कॉटेज में भी तोड़फोड़ की गई है वहीं एक वेन के दरवाजे को भी पूरी तरह से ठोक दिया गया है। जिससे उसका खुलना मुश्किल हो गया है। कुर्सियों के अलावा फॉर्म हाउस के आसपास रखे सामानों को तोड़फोड़ किया गया। तो फसलों को भी जमकर तबाह किया गया है। इस अंगद विला की दुर्दशा बिगाड़ दी गई है।

रात में अचानक जब हाथी आए तो यहां के कर्मचारी क्वार्टर को छोड़कर छत पर गए और सुबह तक वहां से उतर नहीं पाए। क्योंकि नीचे हाथी उत्पात मचा रहे थे। वह कुछ कर भी नहीं पा रहे थे। वन विभाग की टीम भी आसपास से नजारा देख रही थी और हाथियों को बाहर करने की कोशिश में लगी हुई थी। लेकिन हाथी इतने आक्रामक हो गए थे कि उन्हें भगाना भी मुश्किल था। जैसे-तैसे रात बीती लेकिन सुबह तक भी हाथी इसी आसपास इलाके में घूम रहे हैं। और फसलों को रौंद रहे हैं।

हाथियों का दल भी बिखरा हुआ है। टुकड़ों टुकड़ों में यानी 8 से 10 तो कहीं 4 से 5 हाथियों का दल अलग-अलग गांव की ओर दाखिल हो रहा है। जंगल से लगे गांवों में खतरा ज्यादा है। एक तरफ जहां खेती किसानी का मौसम आ गया है। किसानों को खेतों में धान बोने की चिंता सता रही है तो दूसरी ओर खेतों में हाथियों के आने से उन्हें जान का खतरा भी बना हुआ है। घरों के अलावा फसलों को बुरी तरह से रौंदा जा रहा है। विगत दिनों मर्राम खेड़ा में भी तुला राम के घर पर हाथियों ने हमला किया था तो वहीं अब अंगद विला में भी जमकर तहस-नहस किया गया है गुरुर क्षेत्र के गांव में भी हाथियों ने पक्के मकान की दीवारों तक को भी तोड़ डाला था। जिनका निरीक्षण करने के लिए स्वयं पूर्व विधायक भैया राम सिन्हा भी पहुंचे थे।
जिले में हाथियों के अनुकूल है माहौल
वही हाथियों के लिए भी यह क्षेत्र एक अनुकूल माहौल पैदा कर रहा है। और यही वजह है कि जहां के जंगल, पहाड़, नदी नाले सहित सभी स्रोत हाथियों को भाने लगे हैं। और वे बालोद, कांकेर और धमतरी जिले को छोड़कर जाने का नाम नहीं ले रहे हैं। अगर कभी घूमते टहलते दूसरे जिले तक पहुंच जाते हैं तो भी वहां से वापस हो जाते हैं। इतना ही नहीं पिछले कुछ माह पहले हाथियों का यह दल राजनांदगांव जिला होकर महाराष्ट्र में प्रवेश कर चुका था। महाराष्ट्र के वन अमले द्वारा इन हाथियों को उनके इलाके में रोककर वहां कॉरिडोर बनाने की प्लानिंग थी लेकिन उनका यह प्रयास असफल रहा। क्योंकि हाथियों का दल वहां ठहरा नही और वापस राजनांदगांव, कांकेर होते हुए हाथियों के दल ने धमतरी और अब बालोद में एंट्री कर ली है। इन पर 24 घंटे विभाग की नजर बनी हुई।
किसानों को ये नसीहत
किसानों को हमेशा की तरह विभाग ने सचेत किया है खेतों की ओर फिलहाल ना जाए और हाथियों को परेशान ना करें। उन्हें भगाने के लिए बाजा पटाखा ना बजाए। इससे हाथियों में भगदड़ मच जाती है और फिर वे हिंसक हो जाते हैं। हाथियों की लगातार बालोद जिले में आवाजाही को लेकर हमने डीएफओ आयुष जैन से बातचीत की और यह जानने की कोशिश की गई कि आखिर क्या वजह है कि हाथी क्षेत्र में बार-बार आ रहे हैं। उन्होंने कहा इस इलाके में हाथियों के अनुकूल माहौल मिल रहे और यह हाथियों की प्रवृत्ति भी होती है कि जहां से एक बार विचरण कर चुके हैं अगर वहां स्थिति ठीक हो उनके खाने-पीने के स्रोत पर्याप्त हो तो वे उस इलाके में दोबारा लौट कर जरूर आते हैं। क्योंकि उनकी मेमोरी लॉन्ग टर्म होती है। वे एक जगह लंबे समय तक ठहर कर पूरे स्रोत को खत्म भी नहीं करते। कुछ दिन ठहरते हैं फिर दूसरी जगह चले आते हैं। फिर कुछ समय अंतराल पर वापस उन्हीं इलाकों में आ जाते हैं जहां उन्हें बेहतर लगा था।
बिन कॉलर आईडी हो रही निगरानी
चंदा हाथी में कॉलर आईडी लगाया गया था जो कि बंद हो चुकी है। उसके बाद अन्य हाथी में आईडी नहीं लग पाई है। यह वाइल्ड लाइफ की टीम का काम है। डीएफओ कहते हैं हमने इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी है। अभी उनके ऊपर निगरानी के लिए परंपरागत तरीको से निर्भर है। दूर से हाथियों के दल की निगरानी की जा रही है। उनके नजदीक जाने व उनसे छेड़खानी करने से आसपास के गांव के लोगों को मना भी कर रहें हैं और उन्हें वहां से दूर रखा जा रहा है।
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