दुर्गाष्टमी के दिन ही जन्म होने के कारण ही नाम रखा गया था रानी दुर्गावती- मिथलेश निरोटी



कुसुमकसा । भारत की महान वीरांगना रानी दुर्गावती अपनी मातृभूमि और आत्म सम्मान की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दी ,दुर्गाष्टमी के दिन ही जन्म होने के कारण ही दुर्गावती नाम रखा गया था।,रानी दुर्गावती बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मिथलेश निरोटी उपाध्यक्ष जिला पंचायत बालोद ने मुख्य अतिथि के आसंदी से उक्त बातें कही । गोंडवाना समाज रजही के तत्वाधान में आयोजित गोंडवाना की वीरांगना रानी दुर्गावती का शहादत दिवस मिथलेश निरोटी उपाध्यक्ष जिला पंचायत बालोद के मुख्य अतिथि ,बिसनाथ गोटा की अध्यक्षता व खुमानसिंह कुरेटी के विशेष अतिथि में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ बूढ़ादेव की पूजा अर्चना व रानी दुर्गावती को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मिथलेश निरोटी उपाध्यक्ष जिला पंचायत बालोद ने कहा रानी दुर्गावती भारत के उन वीरागंनाओं में से एक है जिन्होंने अपने शौर्य और साहस और वीरता से एक नई इबारत लिखी। रानी दुर्गावती ने किसी के आगे घुटने नहीं टेके और मातृभूमि के लिए अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिये ।उनके साहस और बलिदान हमेशा देशवासियो को प्रेरित करता रहेगा। मिथलेश निरोटी ने कहा आज आदिवासी समाज को शहीद दिवस के अवसर पर संकल्प लेने की जरूरत है कि अपने समाज के विकास और उत्थान के लिये समाज लोग तन मन धन से जुट जाये। वीरागंना रानी दुर्गावती, अमर शहीद वीर नारायण सिंह, बिरसा मुंड़ा, गुण्डाधुर जैसे आजादी के महानायको ने देश को स्वतंत्र कराने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आज के युवाओ को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। समाज के बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने पर जोर देते हुए कहा कि समाज का विकास तभी सम्भव है जब हम शिक्षित होंगे ,समाज के युवा पीढ़ी को व्यवसायिक शिक्षा की ओर भी ध्यान देने की जरूरत है । इस अवसर पर सरिता कुंजाम,खिलावन कैमरों ,अभिषेक,संध्या कैमरों ,देवलसिंह ,प्रवीण कैमरों ,रामहू कुंजाम,मनोहर,राजेन्द्र,शेखर ,विमलाबाई ,बलिन बाई सहित समाज के महिला ,पुरुष व युवा उपस्थित थे।

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