EXCLUSIVE- तांदुला डैम में कूदने वाली युवती की हुई पहचान, तो इधर इस युवक ने बचाई जान, मिल सकता है वीरता पुरस्कार, पढ़िए पूरी कहानी, सिर्फ DailyBalodNews पर



बालोद। गुरुवार को सुबह 10 बजे से 10:30 बजे के बीच तांदुला में आदमाबाद देउरतराई इलाके में एक अनजान युवती कूदकर आत्महत्या की कोशिश कर रही थी। जो पानी में डूबने के दौरान बचाओ की आवाज लगाने लगी फिर वह पानी में डूब गई। आवाज सुनकर वहां पर घूमने के लिए आए हुए देउरतराई के ही सतीश निषाद नेे अपनी जान की परवाह किए बगैर डैम में छलांग लगाई और जैसे तैसे लड़की के हाथ को पकड़ कर उसे बाहर निकाला गया।

फिर अन्य दोस्तों में शामिल सतीश ठाकुर ,लोकेंद्र, नरेंद्र ठाकुर, देव यादव ने मिलकर लड़की को उठाकर डैम के ऊपर लाया और ग्रामीणों को सूचना दी तभी वहां कलेक्ट्रेट की ओर से लौट रहे पुलिस की गाड़ी को देखकर उन्हें रुकवाया गया और थाने तक खबर पहुंचाई गई। आनन-फानन में लड़की को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उसकी जान बच गई है। पर वह अभी बेहोशी की हालत में है। पुलिस प्रशासन द्वारा लड़की के पहचान के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया गया। DailyBalodNews ने भी इस पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित कर लड़की की पहचान की कोशिश की। जिसमें सफलता मिली। लड़की कहीं और नहीं बल्कि बालोद शहर के नयापारा की रहने वाली काजल गुप्ता पिता मनोहर गुप्ता है। लड़की की पहचान होने के बाद उनके परिजनों को थाने बुलाया गया है। पूछताछ चल रही है। बताया जाता है कि लड़की पूर्व में भी घर से गायब हो गई थी जो बाद में मिल गई। इस बार वह ट्यूशन जाने घर से निकली थी। पर आत्महत्या का प्रयास क्यों की, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।लड़की की उम्र 18 साल है।

पढ़िए जान बचाने वाले युवक की कहानी, मिल सकता है वीरता पुरस्कार

सतीश निषाद

लड़की की जान बच गई है हालत खतरे से बाहर है पर वह तो जान देने चली थी। उसकी जान तो देउर तराई के इस युवक सतीश निषाद ने बचाई। जोकि कक्षा 12वीं का छात्र है। अभी 17 साल 11 माह हो रहे हैं। 24 अप्रैल को उसकी उम्र 18 साल हो जाएगी। इस वीरता के लिए 18 साल से उम्र कम होने के कारण सरकार से सतीश को वीरता पुरस्कार भी मिल सकता है। जब हमने लड़की की जान बचाने वाले इस साहसी छात्र से बात की तो उन्होंने बताया कि वे अपने गांव के चार पांच दोस्तों के साथ डैम साइड में घूमने के लिए गए थे। जहां मोबाइल चालू करके तेज आवाज में गाना सुन रहे थे और वही मस्ती कर रहे थे। तभी सतीश निषाद को कहीं दूर बचाओ बचाओ की आवाज सुनाई दी।उसने अपने दोस्तों से कहा कि कोई चिल्ला रहा है। दोस्तों ने इग्नोर किया और कहने लगे कि नहीं कोई कुछ नहीं चिल्ला रहा है, चुपचाप नाचो। लेकिन सतीश का ध्यान उस आवाज की ओर था।वह डैम की ओर देखने लगा तो दूर एक जगह लड़की डूबने जैसे दिखी। फिर देखते देखते लड़की नीचे डूब गई। फिर वह दोस्तों को छोड़कर लड़की को बचाने दौड़ा और पानी में छलांग लगा दी। सामने वाली लड़की थी इसलिए उसे बचाने में भी इज्जत का ख्याल रखते हुए सतीश ने सिर्फ उसका हाथ पकड़ा और उसे खींचने का प्रयास किया। लेकिन लड़की भारी हो गई थी। उसे बचाते बचाते सतीश भी डूबने लगा। जैसे तैसे उसने हाथ को खींचते खींचते तैरने का प्रयास करते हुए उसे बाहर निकाला। फिर उसके बाकी दोस्त भी वहीं पर आए और सभी उसे उठाकर डैम के ऊपर ले आए। जहां फिर उसके पीठ पर बल देकर पानी निकालने का प्रयास किया गया।

नब्ज चेक किया गया तो धीमी हो गई थी। सांसे चल रही थी लेकिन थम रही थी। अगर जरा सी भी देरी होती तो उसकी जान जानी तय थी। समय रहते पुलिस की मदद से युवकों ने लड़की को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने भी इस बहादुरी पर छात्र की सराहना की। छात्र का पिता श्यामू राम निषाद किसानी व ईट भट्ठा में मजदूरी करता है। अब इस घटना के बाद बालोद सहित पूरे जिले भर में सतीश के साहस की चर्चा हो रही है।

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