मिलिए इस शख्स से, एक हाथ नहीं पर 2-2 मंजीरा बजा लेते हैं, ऐसे ही बने शिक्षक और सुआ नृत्य की बागडोर भी संभाल रहे,राज्यपाल के सम्मान में दी प्रस्तुति



बालोद/ बेमेतरा। आज हम आपको एक ऐसे शख्स से परिचय करवा रहे हैं जिनके हौसले व काबिलियत की तारीफ जितनी की जाए वह कम है। ये शख्स है देवकर, बेमेतरा जिले के सहसपुर के रहने वाले प्रेमलाल साहू जो पेशे से शिक्षक हैं, पर सांस्कृतिक क्षेत्र में भी उनकी अच्छी पकड़ है। इसका प्रमाण हमें डौंडीलोहारा पाटेश्वर धाम में आयोजित मांघी पुन्नी महोत्सव के दौरान देखने को मिला। जब प्रेम साहू अपने गांव के महिला और पुरुषों की मंडली के साथ सुआ नृत्य की प्रस्तुति देने पहुंचे थे। प्रेम साहू का एक हाथ नहीं है।

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बताया जाता है कि बचपन में पेड़ से गिर गए थे। जिसके कारण उनका एक हाथ टूट गया। जिसका उपचार नहीं हो पाया और बचपन से ही हर काम एक हांथ से करते रहे। पढ़ लिखकर शिक्षक बने और एक ही हांथ से मंडली में दो दो मंजीरा भी थाम लेते हैं। यहां तक की बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम से भी जुड़ कर वहां प्रस्तुति देते हैं।

जब उनकी मंडली की प्रस्तुति पाटेश्वर धाम में राज्यपाल के आगमन के दौरान होती रही। तो हर किसी की नजर इस शख्स पर जा रही थी। हर कोई उनके बारे में जानने को इच्छुक था कि आखिर यह कौन है। जब हमने उन्हीं से बातचीत की तो यह राज सामने आया। जो सभी के लिए प्रेरणास्पद है। प्रेम साहू की ये काबिलियत व हिम्मत हमें सिखाती है कि हमें हालातों से हार नहीं मानना चाहिए। उनका है एक हाथ नहीं होना उनका हौसला ही है।

उन्होंने कभी खुद को कमजोर नहीं समझा और पढ़ाई लिखाई में भी ध्यान देते रहे तो सांस्कृतिक क्षेत्र में भी। आज उनकी उपलब्धि दोनो क्षेत्र में है और उनकी यही दिव्यांगता उन्हें दूसरों से अलग करती है।उनकी इसी से अलग पहचान खास कलाकार के रूप में होती है।

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