डौण्डी लोहारा, नेमन साहू, रेंगाडबरी। बारिश की कामना और लोक आस्था की अनोखी परंपरा के तहत वनांचल ग्राम रेंगाडबरी के सेठ पारा में बीते बुधवार एवं गुरुवार को पुतला-पुतली विवाह धूमधाम से संपन्न हुआ। यहां पुतला का नाम विष्णु और पुतली का नाम लक्ष्मी रखकर पूरे रीति-रिवाज के साथ विवाह रचाया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण उमड़ पड़े।
बारिश की उम्मीद में जीवित रही सदियों पुरानी परंपरा
ग्रामीणों की मान्यता है कि जब लंबे समय तक वर्षा नहीं होती, तो पुतला-पुतली विवाह कराने से इंद्र देवता प्रसन्न होते हैं और अच्छी बारिश होती है। इसी विश्वास के साथ ग्रामीणों ने चंदा एकत्र कर यह आयोजन किया।
ढोल-नगाड़ों और मयार नाचा से गूंजा गांव
विवाह बारात में ढोल-नगाड़ों की थाप पर मयार नाचा की प्रस्तुति ने पूरे माहौल को उत्सव में बदल दिया। बारात सेठ पारा से बाजार चौक तक नाचते-गाते, पटाखे फोड़ते हुए निकाली गई, जिसमें महिलाओं ने पारंपरिक विवाह गीतों से रंग जमाया।
ढेड़हा-ढेड़हीन ने निभाई परंपरा की जिम्मेदारी

इस अनोखे विवाह में पारंपरिक रस्मों का निर्वहन ढेड़हा मनोज कुमार मंडावी एवं ढेड़हीन कोमिन बाई मंडावी ने किया। हल्दी, मंडप, भांवर से लेकर विदाई तक सभी रस्में पूरी श्रद्धा और रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुईं।
पुतली लक्ष्मी को दुल्हन की तरह सजाया गया, वहीं पुतला विष्णु को दूल्हे का रूप दिया गया।
रात्रि में टिकावन कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें ग्रामीणों के लिए लड्डू, पूड़ी, खीर एवं सामूहिक भोजन की व्यवस्था की गई।
गांव की एकजुटता से बना भव्य आयोजन

इस आयोजन में आसपास के मोहल्लों एवं ग्रामीणों की व्यापक भागीदारी देखने को मिली। आयोजन को सफल बनाने में धनेश देशमुख, चन्द्रलेखा देशमुख, भुनेश्वर, चेतना बाई, बंसीधर आर्य, चित्ररेखा आर्य, धिराज, मथुरा बाई नायक, नरेश, रेश्मि बाई नायक, रूखमणी नायक, प्रकाश, बिमला बाई सिन्हा, चंद्रहास, नमिता नायक, सुनिता बाई नायक, रोहणी बेल, चंदन, त्रिवेणी बाई देशमुख, रुद्र नारायण देशमुख, रंजीत मंडावी सहित समस्त ग्रामीणों का विशेष सहयोग रहा।
लोक आस्था का रंगीन संगम, बारिश की उम्मीद का उत्सव

यह विवाह केवल एक परंपरा नहीं बल्कि ग्रामीण संस्कृति, आस्था और सामूहिक विश्वास का प्रतीक बन गया। ग्रामीणों का मानना है कि ऐसे आयोजन से गांव में सुख-समृद्धि और झमाझम बारिश का आशीर्वाद मिलता है।
