करहीभदर में दूषित पानी से बिगड़ी ग्रामीणों की तबीयत? उल्टी-दस्त के बढ़ते मामलों पर पंचायत और जनप्रतिनिधि आमने-सामने



जनपद सदस्य का आरोप – “मशीन खराब होने पर टंकी साफ करने के बजाय सिर्फ पानी बहाया गया”, सरपंच बोले – “सब ठीक है, टंकी की हमने कराई है सफाई”

बालोद। जिले के ग्राम पंचायत करहीभदर में पेयजल व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गांव में उल्टी-दस्त के बढ़ते मामलों के बीच ग्रामीणों ने दूषित पानी सप्लाई होने का आरोप लगाया है। वहीं इस मामले में पंचायत प्रशासन, जनपद सदस्य और स्वास्थ्य विभाग के अलग-अलग बयान सामने आने से स्थिति और चर्चा में आ गई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पानी टंकी की समय पर साफ-सफाई नहीं होने और पाइपलाइन में गंदा पानी आने के कारण गांव में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग बीमार पड़ रहे हैं। कई लोगों की हालत बिगड़ने पर उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र करहीभदर से जिला अस्पताल रेफर किया गया।


“पानी पिया और लोग बीमार पड़ गए” – ग्रामीणों का आरोप

करहीभदर निवासी परमानंद साहू ने बताया कि गांव में सप्लाई हो रहा पानी बेहद गंदा था। उनका कहना है कि डेढ़ वर्षीय बेटे ईशान को दूषित पानी पीने के बाद उल्टी-दस्त शुरू हो गया।

उन्होंने आरोप लगाया—

“अस्पताल ले जाने पर ठीक से जांच नहीं हुई और सीधे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। पंचायत वालों को कई बार बताया लेकिन ध्यान नहीं दिया गया।”

ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से पानी टंकी की नियमित सफाई नहीं कराई गई, जिससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित हुई।


जनपद सदस्य का आरोप – “सिर्फ पानी बहाया गया, सफाई नहीं हुई”

जनपद पंचायत सदस्य लोकेश डड़सेना ने पंचायत प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मशीन खराब होने के बाद टंकी की वैज्ञानिक तरीके से सफाई कराने के बजाय केवल पानी बहा दिया गया।

उन्होंने कहा—

“टंकी की वास्तविक सफाई नहीं कराई गई। मशीन खराब होने पर पानी को गली में बहा दिया गया और उसी को सफाई बता दिया गया। इसी लापरवाही के कारण लोग बीमार पड़ रहे हैं।”

लोकेश डड़सेना ने कहा कि पंचायत की जिम्मेदारी है कि ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने पानी का क्लोरीन टेस्ट कराने और नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।

उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति अभी भी सामान्य नहीं है और उनके घर में भी एक बच्ची उल्टी-दस्त से पीड़ित है।


सरपंच का पक्ष – “ब्लीचिंग पाउडर से कराई गई सफाई”

गांव के सरपंच बसंत तारम ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उल्टी दस्त की शिकायत के बाद एहतियातन टंकी का पानी खाली कराया गया था और स्वास्थ्य विभाग की मदद से ब्लीचिंग पाउडर डालकर सफाई भी कराई गई।

उन्होंने कहा—

“एक सप्ताह पहले मुझे भी पेचिश हुई थी। इसी वजह से पानी गंदा होने की आशंका पर सफाई करवाई गई। अभी तक किसी ग्रामीण ने औपचारिक शिकायत नहीं की है।”

हालांकि जनपद सदस्य और ग्रामीणों का कहना है कि केवल पानी बहा देना सफाई नहीं माना जा सकता।


स्वास्थ्य विभाग ने गर्मी को बताया वजह

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र करहीभदर के आरएचओ डॉ. लाकेश्वर साहू ने कहा कि उल्टी-दस्त के मरीज जरूर आ रहे हैं, लेकिन इसका कारण केवल पानी नहीं बल्कि बढ़ती गर्मी भी हो सकती है।

उन्होंने बताया कि कुछ मरीजों को बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है। साथ ही पंचायत को दवाइयां और ब्लीचिंग पाउडर उपलब्ध कराया गया है।


ग्रामीणों की मांग – पानी जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई

गांव के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि—

  • पानी टंकी की नियमित और वैज्ञानिक तरीके से सफाई कराई जाए
  • पानी की गुणवत्ता की जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
  • ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए
  • लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए

गांव में बढ़ते उल्टी-दस्त के मामलों और दूषित पानी के आरोपों के बीच अब लोगों की नजर पंचायत प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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