DAILY BALOD NEWS

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अब देवारभाट में भी हाथियों ने की तोड़फोड़, फार्महाउस में मचाया उत्पात, केला बाड़ी रौंद अब मुल्ले पहुंचे, रानीमाई मार्ग पर जाने वाले रहे सावधान

बालोद। चंदा हाथियों के दल ने तालगांव के साथ अब देवारभाट की ओर भी रुख किया है। यहां के दो बाड़ी सहित एक फार्म हाउस के दीवारों व सुरक्षा घेरे को तोड़कर उत्पात मचाया है। बाड़ियों में लगे केले के पेड़ों को रौंदा गया है। रात में हाथी तालगांव में बस्ती से बाहर लगे कुछ मकानों तक भी पहुंचे हुए थे। कुछ मकानों को नुकसान पहुंचा है। तो वही बाड़ियों को ज्यादा तहस-नहस किया गया है। अभी भी यह तालगांव और देवारभाट के बीच विचरण कर रहे हैं। वन विभाग ने दयाराम चुरेंद्र व टी. आर. साहू ग्राम देवारभाट के घर से लगे बाड़ी से एक दंतैल हाथी को सुरक्षित बाहर निकाला।

अभी यहां है हाथियों की मौजूदगी

15 जुलाई को हाथी की संख्या – 24 – 25 (लगभग) है। मकान व
फसल हानि हुई है। सुबह 7 बजे से परिसर – ग्राम मुल्ले, तालगांव, सहायक परिक्षेत्र – बरही ,परिक्षेत्र – बालोद
वनमण्डल – बालोद में हाथी घूम रहे।

ये हैं अलर्ट ग्राम

मुल्ले, तालगांव, आदमाबाद विश्राम गृह, संयुक्त जिला कार्यालय, रक्षित आरक्षी केंद्र , झलमला, सिवनी, देऊरतराई, सेमरकोना, अंधियाटोला, देवारभाट, गस्तीटोला, नर्रा, धरमपुरा, मुल्लेगुडा

ताल गांव व आसपास में ही जमे हैं चंदा हाथियों का दल, एक मचा रहा नर्सरी में घुसकर उत्पात,राहगीरों को रहना होगा सावधान

चार-पांच दिन से चंदा हाथियों का दल तालगांव के जंगल में ही जमा हुआ है। वह इलाकों को छोड़कर आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं क्योंकि यहां आस-पास भोजन और पानी का पर्याप्त स्रोत दिख रहा है। ऐसे में हाथी जंगलों में अपना भोजन ग्रहण कर रहे तो इनमें से अलग-थलग घूम रहा एक दंतैल हाथी तालगांव के सरकारी रोपणी नर्सरी में भी उत्पात मचा रहा है। वह रोज सुबह-शाम घूमते हुए इस नर्सरी में घुस जाता है। जहां फिर पेड़ पौधों को तोड़ता रौंदता है। ऐसे में यहां के कर्मचारी अपनी जान बचाने काम छोड़ कर चले जाते हैं ।तो वहीं उक्त नर्सरी घोटिया मार्ग पर ही स्थित है जिससे इस रूट पर जाने वाले राहगीरों को भी खतरा बना रहता है। वन विभाग द्वारा सचेत किया गया कि जब तक हाथी तालगांव या आसपास घूम रहे हैं इस मार्ग से जाने वालों को ज्यादा सावधानी बरतनी होगी। लोगों को आगाह किया गया है कि हाथियों से किसी तरह की छेड़खानी ना करें। उन्हें अगर दूर से देख लेते हैं तो चुपचाप गुजर जाए, या फिर हाथियों के रास्ते से गुजरने के बाद ही उस रास्ते से जाएं। किसी तरह का शोर मचा कर हाथियों को परेशान ना करें। अन्यथा वे आक्रामक हो सकते हैं।

ग्रामीणों में दहशत बरकरार

इधर तालगांव व देवारभाट के ग्रामीणों में दहशत बरकरार है। भले ही हाथियों का दल बस्ती को छोड़कर जंगल की ओर चले गए हैं। लेकिन कभी भी बस्ती में वापस घुस सकते हैं। इसका डर बना हुआ है। ज्ञात हो कि विगत दिनों तालगांव के ग्रामीण राधेलाल के कच्चे मकान को हाथियों ने बुरी तरीके से ढहा दिया था। तो वही स्कूल के आसपास भी तोड़फोड़ की गई थी। तो जगह-जगह सरकारी बोर्ड और मूर्तियों को भी धराशाई किया गया था। अभी भी हाथियों का दल तालगांव के जंगल में घूम रहा है। ऐसे में दहशत बनी हुई है।

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