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हौसले की जीत- 52 घण्टे तक कोटा से छग तक ट्रेन से सफर कर घर पहुंची लीना, झारखंड रूट से बिलासपुर तक आई

उदयपुर व अग्निपथ की घटनाओं के बीच फंसी थी कोचिंग के लिए गई छात्रा, टेस्ट एग्जाम के लिए घर पहुंचना हो रहा था मुश्किल, पर हार नहीं मानी

बालोद। बालोद जिले के ग्राम भीम कन्हार की एक बेटी लीना साहू, राजस्थान के कोटा में नीट की कोचिंग के लिए गई हुई थी। जो वहां उदयपुर में हुई घटना के बाद से फंसी हुई थी। वहां पर शासन द्वारा कर्फ्यू लगाया गया है। इंटरनेट भी चार-पांच दिन से बंद है। तो वही धारा 144 भी लागू है। ऐसे में वहां बंद जैसे हालात देखने को मिल रहे हैं। 17 जुलाई को लीना का भिलाई सेंटर में नीट का टेस्ट एग्जाम है। लेकिन वह लगातार ट्रेन रद्द होने से छत्तीसगढ़ नहीं पहुंच पाई थी। इस संबंध में छात्रा की मुसीबत को लेकर उनसे फोन पर चर्चा करते हुए हमारे द्वारा खबर प्रकाशित की गई थी। लीना रविवार को छत्तीसगढ़ पहुंची। फिलहाल भिलाई में अपने अस्थाई निवास में रुकी हुई है। जहां उनके मम्मी पापा भी हैं। कई मुसीबतों का सामना कर लीना घर तक पहुंच पाई। बंद के हालात को देखते हुए वहां ऑटो तक मिलना मुश्किल था। जिसे देखते हुए लीना हॉस्टल से 12 घंटे पहले ही ट्रेन चढ़ने के लिए स्टेशन आई थी। वह एमपी, झारखंड रूट से होते हुए बिलासपुर पहुंची। पूरी रात कोटा के रेलवे स्टेशन में बिताई। कोटा से उदयपुर होते हुए झारखंड फिर एमपी,छग बिलासपुर पहुंची। जिसे उनके पिता पोषण साहू (सरपंच भीमकन्हार) ने फिर बिलासपुर से अपने हाल निवास भिलाई लाया। जहां छात्रा सही सलामत है और नीट की टेस्ट परीक्षा की तैयारी में जुट गई है। छात्रा के घर पहुंचने पर परिजनों ने राहत की सांस ली। जो कि एक तरफ उदयपुर की घटना दूसरी ओर अग्नीपथ योजना के विरोध में रेलवे स्टेशन में बढ़ती आगजनी की घटनाओं के चलते राजस्थान में भी हालात खराब है। जिसके चलते छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों से जो बच्चे कोटा में कोचिंग के लिए पहुंचे थे वह सब फंसे हुए थे। ट्रेन ना मिलने की वजह से उनका आना मुश्किल हो रहा था। फ्लाइट ही एक रास्ता दिखाई दे रहा था। पर जैसे तैसे लीना आखिरी वक्त तक प्रयास की और झारखंड होते हुए 52 घण्टे का सफर कर छत्तीसगढ़ पहुंची।

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