बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित जगन्नाथपुर शिव मंदिर 11वीं–12वीं शताब्दी का एक प्राचीन, पुरातात्विक और ऐतिहासिक धरोहर स्थल है, जो आज भी श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। तालाब के किनारे ऊँचे स्थान पर स्थित यह प्राचीन मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला, पत्थरों की बारीक नक्काशी और शांतिपूर्ण वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर इस ऐतिहासिक मंदिर में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही दूर-दराज के गांवों और शहरों से श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर परिसर में उमड़ पड़ी। भक्तों ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना कर परिवार और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” के जयकारों से गूंजता रहा और पूरा वातावरण शिवमय नजर आया।
बालोद-अर्जुन्दा मार्ग पर जिला मुख्यालय बालोद से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। जनश्रुति के अनुसार इस मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी के आसपास हुआ था और इसे एक ऐतिहासिक स्मारक के रूप में छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा संरक्षित माना जाता है।
मंदिर की स्थापना को लेकर एक किंवदंती भी प्रचलित है। कहा जाता है कि जगदलपुर के राजा-रानी ओडिशा के जगन्नाथ मंदिर की यात्रा से लौटते समय तत्कालीन ‘ग्राम डुआ’ (वर्तमान जगन्नाथपुर) में रुके थे। यहां के शांत और आध्यात्मिक वातावरण से प्रभावित होकर उन्होंने इस शिव मंदिर के निर्माण का निर्णय लिया और मंदिर का निर्माण कराया गया।
जगन्नाथपुर शिव मंदिर अपनी प्राचीन स्थापत्य शैली के लिए भी प्रसिद्ध है। मंदिर के पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी और मंडप शैली के स्तंभ इसकी सुंदरता को और बढ़ाते हैं। मंदिर में स्थापित प्राचीन शिवलिंग के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा भी विराजमान है, जिनकी श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
तालाब किनारे स्थित यह मंदिर धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां पूरे वर्ष श्रद्धालु दर्शन और आत्मिक शांति की खोज में पहुंचते हैं, वहीं महाशिवरात्रि जैसे पर्व पर यहां विशेष आयोजन और पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर समिति और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था, प्रसाद वितरण और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया।
इस प्रकार जगन्नाथपुर शिव मंदिर कला, इतिहास और आस्था का एक अद्भुत संगम बनकर आज भी क्षेत्र की पहचान बना हुआ है और महाशिवरात्रि जैसे पर्व पर इसकी भव्यता और भी बढ़ जाती है। पूर्व सरपंच और भाजपा मंडल अध्यक्ष अरुण साहू के प्रयास से इस स्थल को एक नई पहचान मिल रही।
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