सरकार की अंतिम चेतावनी-3 साल या इससे अधिक तक बिना सूचना के ड्यूटी पर नहीं आने वाले डॉक्टरों की जाएगी नौकरी



बालोद में वर्षों से गायब 4 डॉक्टर बर्खास्त, जल्द 3 और होंगे

बालोद

छत्तीसगढ़ की केंद्र सरकार द्वारा वर्षों से गायब डॉक्टरों को नौकरी से बर्खास्त करने का सिलसिला शुरू कर दिया गया है। ऐसा पहली बार हो रहा है। पहले भी ऐसे गायब डॉक्टरों को नोटिस तो जारी होता था लेकिन बर्खास्तगी की कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। सिर्फ नोटिस के ऊपर नोटिस भी जारी हो रहा था। ऐसे में सरकारी रिकॉर्ड में डॉक्टरों का पद भरा हुआ दिखाता था। लेकिन वास्तव में अस्पतालों में हुए डॉक्टर काम ही नहीं करते थे। इस चक्कर में नई भर्ती भी लटकी हुई थी। पर शासन ने अब सख्त रवैया अपनाते हुए ऐसे गायब डॉक्टरों को नौकरी से बर्खास्त करने का सिलसिला शुरू कर दिया है। पिछले साल बालोद जिले से 4 डॉक्टर बर्खास्त हुए। जिसमें
पीएचसी से गौरव क्लाडियस विजेता डोंगरे, श्यामली राय, तृप्ति चंद्राकर शामिल रहे।
एक जिला अस्पताल से एक डौंडी व डौंडीलोहारा व जगन्नाथपुर सांकरा पीएचसी से बर्खास्त हुए थे। अभी नई लिस्ट भी जारी की गई है। जिसमें बालोद से दो और गुरुर से 3 डॉक्टर शामिल हैं। बालोद जिला अस्पताल से दो डॉक्टर हैं, हालांकि उनका अभी 3 साल गायब समय पूरा नही हुआ है। वहीं गुरुर की बात करें तो यहां के डॉक्टर रनिता रानी सिंह, डॉक्टर विवेक साहू व डॉक्टर विश्वशील करकड़े इस सूची में शामिल है। जो वर्षों से अपने ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं। इन्हें कई बार नोटिस भी जारी हो चुका है। जानकारी के मुताबिक इस तरह से गायब डॉक्टर या तो खुद का क्लीनिक वगैरह संचालित करते हैं या फिर दूसरे किसी निजी अस्पताल में अच्छी खासी तनख्वाह में जॉब पर लग जाते हैं। और बिना सरकार को सूचना दिए अपनी ड्यूटी से भाग जाते हैं। कुछ लोग इस्तीफा भी देते हैं पर शासन द्वारा इनका इस्तीफा भी नामंजूर रहता है। उन्हें सुनवाई के लिए अवसर दिया जाता है पर वे सुनवाई में भी नहीं आते हैं। ऐसे में डॉक्टरों की नई भर्ती नहीं हो पाती तो वही बिना डॉक्टर ड्यूटी के इलाज भी प्रभावित होता है। इसे देखते हुए कांग्रेस सरकार ने बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू की है। मीडिया में उन डॉक्टरों की सूची जारी करके उन्हें अंतिम अवसर दिया गया है। अगर इसके बाद भी वे ड्यूटी पर नहीं लौटे या अब तक ड्यूटी से गायब होने का ठोस कारण नहीं बताया तो उनकी नौकरी चली जाएगी। फिर वह पद रिक्त होंगे और वहां पर नई भर्ती होगी। जानकारी के अनुसार सरकारी नौकरी से दूर भागने वाले डॉक्टर खासतौर से तनख्वाह कम होने व दूसरी जगह पर उन्हें मोटी तनख्वाह मिलने के कारण ऐसा करते हैं। कई लोग जहां उनकी पोस्टिंग होती है उस इलाके में उच्च शिक्षा की सुविधा ना होने के चलते अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए भी बड़े शहरों की ओर रुख कर लेते हैं और यही वजह है कि डॉक्टर ज्यादा दिनों तक खासतौर से ग्रामीण इलाके में टिक नहीं पाते और या तो वे अपनी पोस्टिंग शहरी क्षेत्र में करवाने के जुगाड़ में लगते हैं और पोस्टिंग नहीं होती है तो फिर वह नौकरी छोड़ कर इस तरह अचानक गायब हो जाते हैं।

पक्ष नहीं रखने वाले डॉक्टरों के विरूद्ध सेवा से पृथक करने की कार्यवाही की जाएगी

राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग ने अनाधिकृत रूप से तीन वर्षों से अनुपस्थित चिकित्सा अधिकारियों की सेवा समाप्ति के पहले व्यक्तिगत सुनवाई के लिए अंतिम अवसर प्रदान करने संबंधी सूचना जारी की है। संचालनालय, स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा छत्तीसगढ़ शासन के वित्त एवं योजना विभाग द्वारा वर्ष 2013 में जारी परिपत्र के अनुसार शासकीय सेवकों को अनुपस्थिति के कारणों को स्पष्ट करने के लिए युक्तियुक्त अवसर दिए जाने संबंधी प्रावधान के तहत यह सूचना जारी की गई है। परिपत्र में उल्लेखित प्रावधान “यदि कोई शासकीय कर्मचारी तीन वर्ष से अधिक अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहता है तो कोई शासकीय सेवक अवकाश सहित या बिना अवकाश के बाह्य सेवा से भिन्न, तीन वर्ष से अधिक निरंतर अवधि के लिये कर्तव्य से अनुपस्थित रहता है तो उसे शासकीय सेवा से त्याग-पत्र दिया हुआ समझा जाएगा जब तक कि राज्यपाल, प्रकरण की आपवदिक परिस्थितियों को देखते हुए अन्यथा निर्धारित न करें, परन्तु इन प्रावधानों को लागू करने के पूर्व शासकीय सेवक को ऐसी अनुपस्थिति के कारणों को स्पष्ट करने हेतु युक्तियुक्त अवसर दिया जाएगा” के तहत विभाग द्वारा चिकित्सा अधिकारियों को सुनवाई के लिए अंतिम अवसर प्रदान करने हेतु यह सूचना जारी की गई है। अनाधिकृत रूप से तीन वर्षों से अनुपस्थित चिकित्सा अधिकारियों को सूचना के प्रकाशन के सात दिनों के भीतर कार्यालयीन समय में संचालनालय, स्वास्थ्य सेवाएं, छत्तीसगढ़, तृतीय तल, इन्द्रावती भवन, अटल नगर, नवा रायपुर में स्वयं उपस्थित होकर या डाक के माध्यम से अपना लिखित पक्ष प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया गया है। निर्धारित समयावधि में दावा-आपत्ति प्रस्तुत नहीं करने पर चिकित्सा अधिकारियों के विरूद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए सेवा से पृथक करने की कार्यवाही की जाएगी जिसके लिए अधिकारी स्वयं जिम्मेदार होंगे। पिछले तीन वर्षों से अधिक अवधि से अपने पदस्थापना स्थान से बिना सूचना के अनाधिकृत तौर पर अनुपस्थित रहने के कारण सेवा समाप्ति के पहले सुनवाई हेतु अंतिम अवसर प्रदान करने के लिए सूचना जारी की गई है।

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