IISER पुणे में चमका बालोद का शिक्षा परचम, 4 शिक्षकों ने राष्ट्रीय मंच पर बढ़ाया जिले का मान



राष्ट्रीय मंच पर बालोद की दमदार मौजूदगी, विज्ञान-गणित शिक्षण में जिले को मिली नई दिशा

IISER पुणे में बालोद के शिक्षकों का कमाल, नवाचार से शिक्षा को मिलेगी नई उड़ान

बालोद। राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के अंतर्गत स्कूल मेंटरिंग बाय हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट योजना के तहत गणित एवं विज्ञान विषय के सेकेंडरी स्तर की राष्ट्रीय कार्यशाला भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) पुणे में आयोजित की गई। इस प्रतिष्ठित प्रशिक्षण में छत्तीसगढ़ के तीन संभागों के 20 जिलों से चयनित शिक्षकों ने भाग लिया, जिसमें प्रत्येक जिले से विज्ञान संकाय के केवल 5 शिक्षकों का चयन किया गया।

राष्ट्रीय आविष्कार अभियान (RAA) भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य 6 से 18 वर्ष के बच्चों में विज्ञान, गणित और प्रौद्योगिकी के प्रति जिज्ञासा, रचनात्मकता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना है। इसी उद्देश्य से गणित एवं विज्ञान शिक्षण को प्रभावी, रोचक और सुदृढ़ बनाने के लिए IISER पुणे में तीन दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस ज्ञानवर्धक प्रशिक्षण में बालोद जिले से बड़गांव हायर सेकेंडरी स्कूल की व्याख्याता कादम्बिनी यादव, भेनुमती चतुर्वेदी, संजरी से अर्पणा वर्मा तथा चिखली से जगदीश राम साहू ने सहभागिता कर न केवल अपने विद्यालय बल्कि पूरे जिले का गौरव बढ़ाया। इन शिक्षकों का चयन जिले के लिए गर्व का पल माना जा रहा है।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ के मार्गदर्शन एवं सहयोग से सम्पन्न हुआ। प्रशिक्षण के दौरान राज्य, जिला एवं विकासखंड स्तर के अधिकारियों का सतत मार्गदर्शन शिक्षकों को प्राप्त हुआ। राज्य स्तर से आयुक्त श्रीमती किरण कौशल (आईएएस), उपसंचालक ए.के. सारस्वत एवं सहायक संचालक श्रीमती मंजूलता साहू सहित अन्य अधिकारियों ने शिक्षकों को नवाचारी शिक्षण पद्धतियां अपनाने तथा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने पर विशेष जोर दिया। राज्य समन्वयक श्री राजेश सोनकर भी प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित रहे।

तीन दिवसीय इस प्रशिक्षण में देश के विभिन्न राज्यों से आए चयनित शिक्षकों को गणित एवं विज्ञान विषयों के जटिल सिद्धांतों को सरल, व्यवहारिक एवं छात्र-केंद्रित तरीके से पढ़ाने की नई तकनीकों से परिचित कराया गया। विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा गतिविधि आधारित शिक्षण, प्रयोगात्मक पद्धति तथा जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से विषयों को समझाने की नवीन विधियां सिखाई गईं।

प्रशिक्षण में विशेष रूप से बताया गया कि गणित और विज्ञान को केवल सूत्रों तक सीमित न रखकर व्यवहारिक जीवन से जोड़कर पढ़ाया जाए, ताकि विद्यार्थियों में विषय के प्रति रुचि और समझ दोनों विकसित हो सकें। जटिल विषयों को प्रयोग एवं गतिविधि आधारित तरीकों से पढ़ाने और विज्ञान को पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखते हुए प्रयोगात्मक एवं अनुभवात्मक शिक्षण पर जोर देने की आवश्यकता बताई गई।

कार्यशाला के दौरान शिक्षकों को डिजिटल टूल्स, शैक्षणिक ऐप्स, हैंड्स-ऑन किट एवं आधुनिक तकनीकों के उपयोग की भी जानकारी दी गई। कम लागत में उपलब्ध सामग्री से शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM) तैयार करने के व्यावहारिक तरीके सिखाए गए, ताकि संसाधन सीमित होने पर भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

प्रतिभागी शिक्षकों को IISER पुणे की साइंस गैलरी एवं आधुनिक प्रयोगशालाओं का भ्रमण भी कराया गया, जिससे उन्हें प्रयोगात्मक अधिगम की व्यवहारिक समझ प्राप्त हुई। इस अनुभव ने शिक्षकों को विद्यालय स्तर पर नवाचार करने के लिए प्रेरित किया।

प्रशिक्षण उपरांत व्याख्याता कादम्बिनी यादव ने बताया कि इस प्रशिक्षण से उन्हें कक्षा शिक्षण को अधिक रोचक, व्यवहारिक एवं छात्र-केंद्रित बनाने की नई दृष्टि मिली है। प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान एवं अनुभव का उपयोग विद्यालय में नवाचारी शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों में गणित एवं विज्ञान के प्रति रुचि एवं समझ दोनों विकसित होंगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों को अन्य शिक्षकों के साथ साझा कर सामूहिक रूप से नवाचार किए जाएंगे।

प्रशिक्षण में शामिल शिक्षकों ने राज्य एवं जिले के अधिकारियों, जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती मधुलिका तिवारी, डीएमसी एवं सहायक जिला परियोजना अधिकारी श्री अवन कुमार जांगड़े, एपीसी श्री जी.एल. खुरश्याम, विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री हिमांशु मिश्रा, सहायक विकासखंड अधिकारी श्री एस.के. साहू सहित समस्त अधिकारियों एवं विद्यालय प्राचार्य के प्रति आभार व्यक्त किया।

जिले के शिक्षकों एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह अनुभव जिले के अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणादायक साबित होगा। यह प्रशिक्षण न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि जिले के शिक्षा स्तर को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम भी है।

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