15 से 25 वर्ष की युवतियां ले सकेंगी हिस्सा, 12 अगस्त तक भेजना होगा पतंग का डिजाइन; लाखों रुपये के पुरस्कार का मौका
बालोद। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय महिला कांग्रेस द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती अलका लांबा के नेतृत्व में देशभर की युवा बेटियों के लिए “माँ तुझे सलाम – मेरी पतंग, मेरी अभिव्यक्ति” राष्ट्रीय पतंग डिजाइन प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। प्रतियोगिता का उद्देश्य युवतियों को अपनी रचनात्मकता, सपनों, आत्मविश्वास और देश के प्रति अपनी कल्पनाओं को कला के माध्यम से व्यक्त करने का मंच प्रदान करना है।
प्रदेश महिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष एवं बालोद विधायक संगीता सिन्हा ने युवतियों से इस अनूठी प्रतियोगिता में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की है।
पतंग बताएगी—बेटियां देश को कैसा देखना चाहती हैं
प्रतियोगिता के तहत प्रतिभागी अपनी कल्पना और विचारों को पतंग के डिजाइन में उतारेंगी। उनकी बनाई हुई पतंग के माध्यम से देश के भविष्य, नए भारत की परिकल्पना, बेटियों के सपनों और स्वतंत्रता की भावना को अभिव्यक्ति मिलेगी।
संगीता सिन्हा ने बताया कि “माँ तुझे सलाम – मेरी पतंग, मेरी अभिव्यक्ति, मेरी पहचान” केवल पतंग डिजाइन प्रतियोगिता नहीं, बल्कि देश की युवा बेटियों को अपनी सोच और सपनों को सामने रखने का अवसर देने वाला राष्ट्रीय अभियान है।
15 से 25 वर्ष की युवतियां कर सकती हैं भागीदारी
प्रतियोगिता में 15 से 25 वर्ष की युवतियां एवं बेटियां भाग ले सकती हैं। प्रतिभागियों को अपनी बनाई हुई पतंग के डिजाइन को निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से भेजना होगा।
आयोजकों के अनुसार 12 अगस्त तक दिए गए QR कोड को स्कैन कर डिजाइन भेजा जा सकता है। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट डिजाइन तैयार करने वाली प्रतिभागियों को लाखों रुपये के पुरस्कार जीतने का अवसर भी मिलेगा।
‘अपनी सोच को दें आसमान’
प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष संगीता सिन्हा ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल देश की आजादी का उत्सव नहीं, बल्कि हर बेटी को अपने सपने देखने और उन्हें पूरा करने की स्वतंत्रता का भी प्रतीक है। उन्होंने बालोद जिले सहित प्रदेश की सभी पात्र युवतियों से अपील की कि वे अपनी रचनात्मकता को रंगों में उतारें और अपनी पतंग के जरिए देश के सामने बताएं कि वे भारत को किस रूप में देखना चाहती हैं।
उन्होंने कहा कि एक छोटी-सी पतंग में बेटी के बड़े सपने, उसकी सोच और देश के भविष्य की कल्पना आसमान तक पहुंच सकती है। इसलिए अधिक से अधिक बेटियां इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शामिल होकर अपनी अभिव्यक्ति को नई उड़ान दें।










