10 करोड़ नशामुक्ति प्रतिज्ञा महाअभियान के तहत बालोद जेल में जागरूकता कार्यक्रम, नशे के दुष्प्रभाव और छोड़ने के उपायों की दी जानकारी
बालोद। 10 करोड़ नशामुक्ति प्रतिज्ञा महाअभियान के तहत ब्रह्माकुमारीज आत्मज्ञान भवन आमापारा, बालोद के तत्वावधान में कोतवाली थाना बालोद के अधिकारियों एवं जिला जेल के बंदियों के लिए नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में नशे के विभिन्न प्रकार, उसके दुष्प्रभाव, नशे की शुरुआत के कारण तथा इससे बाहर निकलने के व्यावहारिक एवं आध्यात्मिक उपायों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।
“हर नशे की शुरुआत एक बार से, लेकिन बदलाव एक संकल्प से”
कार्यक्रम में बी.के. सरिता दीदी ने कहा कि हर नशे की शुरुआत एक बार से होती है, लेकिन हर सकारात्मक बदलाव एक संकल्प से शुरू होता है। उन्होंने कहा कि भारत को फिर से स्वर्णिम भारत बनाने के लिए सबसे पहले व्यक्ति को अपने मन, बुद्धि और कर्मेंद्रियों पर नियंत्रण स्थापित करना होगा।
उन्होंने कहा कि देशभर में नशामुक्ति अभियान चलाया जा रहा है और प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं को नशे से मुक्त करने का संकल्प लेना चाहिए। आत्मसंयम और सकारात्मक सोच को नशामुक्त जीवन की मजबूत नींव बताते हुए उन्होंने उपस्थित लोगों को संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया।
बुरी आदत छोड़ने के लिए अच्छी आदतों को अपनाना जरूरी
बी.के. नेहा दीदी ने नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए कहा कि नशा केवल नशीले पदार्थों का ही नहीं, बल्कि बुरी और अच्छी आदतों का भी हो सकता है। इसलिए नशीले पदार्थों की आदत छोड़ने के लिए अच्छी आदतों और सकारात्मक गतिविधियों को जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सत्संग, ध्यान और सकारात्मक वातावरण से व्यक्ति में अच्छी आदतें विकसित होती हैं। ब्रह्माकुमारीज सेवा केंद्रों में प्रतिदिन राजयोग ध्यान एवं ज्ञान मुरली के माध्यम से निःशुल्क सत्संग कराया जाता है, जो मन को मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है।
तनाव का समाधान नशा नहीं, मन को समझना है
बी.के. मनीष भाई ने कहा कि लोग अक्सर तनाव को नशे का कारण मानते हैं, लेकिन नशा तनाव का समाधान नहीं है। तनाव मन में उत्पन्न होता है, जबकि नशे का सेवन शरीर पर विपरीत प्रभाव डालता है। इससे मानसिक समस्या दूर होने के बजाय शरीर में अनेक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं।
उन्होंने बताया कि तनाव से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए मन को समझना और उसे सकारात्मक दिशा देना जरूरी है। राजयोग की शिक्षा के माध्यम से आत्मचिंतन, एकाग्रता और सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रयास किया जाता है।
उन्होंने कहा कि राजयोग व्यक्ति को आत्मिक शक्ति का अनुभव कराने तथा परमात्मा से जुड़कर सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने की दिशा में प्रेरित करता है। मन को मजबूत बनाकर व्यक्ति नशे जैसी बुरी आदतों पर नियंत्रण पाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
कैदियों ने किया राजयोग ध्यान का अभ्यास
कार्यक्रम के अंत में बी.के. नेहा दीदी ने उपस्थित बंदियों को राजयोग ध्यान का अभ्यास कराया। इस दौरान उन्हें मन को शांत रखने, सकारात्मक विचारों को अपनाने और जीवन में अच्छे बदलाव के लिए आत्मबल बढ़ाने की दिशा में प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में श्रवण साहू, कुलपत साहू, चिमन साहू, चेतन सोनवानी, श्रद्धा सोनवानी, चंद्रिका साहू, तरुण साहू एवं कमलेश साहू सहित अन्य लोगों ने सक्रिय रूप से अपनी सेवाएं दीं।
कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा कि नशामुक्ति केवल नशे से दूरी बनाने का नाम नहीं, बल्कि व्यक्ति के विचारों, आदतों और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प भी है।











