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गांव-गांव में संस्कारों की पाठशाला, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रख रही बाल संस्कार शाला

गायत्री परिवार की अनूठी पहल: हर रविवार दो घंटे निःशुल्क कक्षाएं, 10 से 13 वर्ष के बच्चे सीख रहे जीवन के मूल्य

बालोद। बच्चों में संस्कार, अनुशासन, नैतिकता और सकारात्मक सोच विकसित कर उन्हें जिम्मेदार एवं श्रेष्ठ नागरिक बनाने की दिशा में अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा बालोद ब्लॉक के विभिन्न गांवों में बाल संस्कार शालाओं का संचालन किया जा रहा है। निःशुल्क संचालित इन कक्षाओं के माध्यम से बच्चों के भीतर भारतीय संस्कृति, सदाचार, सेवा भावना और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

गायत्री परिवार की यह पहल “मानव में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग का अवतरण” के संकल्प तथा पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों से प्रेरित है। बाल संस्कार शालाओं में बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखते हुए जीवन जीने की कला और अच्छे व्यक्तित्व निर्माण से जुड़े विभिन्न विषयों की जानकारी दी जा रही है।

प्रार्थना से लेकर योग और प्रेरक प्रसंग तक

इन कक्षाओं में बच्चों को अनुशासन, सदाचार, माता-पिता एवं गुरुजनों का सम्मान, समय का सदुपयोग, सेवा भावना और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया जाता है। इसके साथ ही गायत्री मंत्र, प्रार्थना, योग, ध्यान, प्रेरक प्रसंग, महापुरुषों की जीवनगाथाएं और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में भारतीय संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों के प्रति रुचि विकसित की जा रही है।

हर रविवार दो घंटे की निःशुल्क कक्षा

बालोद ब्लॉक में गायत्री शक्ति पीठ बालोद, कुदरूपारा, आमापारा, पाण्डेयपारा, सांकरा-ज, नेवारीकला, टेकापार, बोरी, भेंगारी, चरवाही, निपानी एवं बरही सहित विभिन्न स्थानों पर प्रत्येक रविवार सुबह 9 से 11 बजे तक बाल संस्कार शालाएं संचालित की जा रही हैं।

इन कक्षाओं में 10 से 13 वर्ष की आयु के बालक-बालिकाएं शामिल हो सकते हैं। प्रशिक्षित एवं समर्पित समयदानी कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों को निःशुल्क मार्गदर्शन दिया जा रहा है। बच्चों और अभिभावकों के लिए यह पूरी पहल पूरी तरह निःशुल्क है।

“बचपन के संस्कार ही भविष्य का आधार”

गायत्री परिवार का मानना है कि बच्चे राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं। जिस प्रकार पौधे को शुरुआती अवस्था में उचित खाद, पानी और दिशा की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार बच्चे के व्यक्तित्व निर्माण में बचपन में मिले संस्कारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

बाल संस्कार शालाओं के माध्यम से बच्चों में चरित्र निर्माण, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

हर गांव में संस्कार की पाठशाला, हर बच्चे में श्रेष्ठ व्यक्तित्व

गायत्री परिवार ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से बाल संस्कार शालाओं में भेजें और उन्हें अच्छे संस्कार एवं श्रेष्ठ जीवन मूल्यों से जोड़ें।

संस्था का उद्देश्य केवल बच्चों को संस्कार सिखाना नहीं, बल्कि ऐसी पीढ़ी तैयार करना है जो नशामुक्त, संस्कारवान, जिम्मेदार, संवेदनशील और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक बने। यह पहल गांव-गांव में बच्चों के भविष्य को सकारात्मक दिशा देने के साथ समाज में संस्कारों की मजबूत नींव तैयार कर रही है।

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