देवदत्त पटनायक की कृतियों पर किया विशिष्ट अध्ययन, शक्तिपीठों-ज्योतिर्लिंगों के प्रत्यक्ष अवलोकन से शोध को बनाया व्यापक
दुर्ग। भारतीय पौराणिक साहित्य, मंदिर परंपराओं और सांस्कृतिक प्रतीकों को अंग्रेजी साहित्य के अकादमिक अध्ययन से जोड़ते हुए संयुक्ता पाढ़ी को हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग द्वारा अंग्रेजी विषय में पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई है। उन्होंने “Narratives and Symbols in the Selected Works of Devdutt Pattanaik” विषय पर अपना शोध कार्य पूर्ण किया है।
संयुक्ता पाढ़ी का शोध भारतीय पौराणिक आख्यानों, प्रतीकों और उनके सांस्कृतिक अर्थों की गहन पड़ताल पर केंद्रित रहा। शोध में यह समझने का प्रयास किया गया कि भारतीय पौराणिक कथाएं और उनसे जुड़े प्रतीक किस प्रकार भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और सामाजिक चेतना को अभिव्यक्त करते हैं।
पुस्तकों से आगे मंदिरों तक पहुंचा शोध

इस शोध की सबसे खास बात यह रही कि इसे केवल पुस्तकीय अध्ययन तक सीमित नहीं रखा गया। विषय को व्यापक और प्रामाणिक स्वरूप देने के लिए संयुक्ता पाढ़ी ने अनेक शक्तिपीठों, ज्योतिर्लिंगों और स्थानीय मंदिरों का भ्रमण कर वहां की परंपराओं, प्रतीकों तथा पौराणिक मान्यताओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।
उन्होंने विभिन्न पौराणिक एवं विद्वतापूर्ण शोध-साहित्य के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित पुस्तकों का भी गहन अध्ययन किया। मंदिरों में प्रचलित परंपराओं और पौराणिक प्रतीकों को शोध के संदर्भ में समझने का प्रयास उनके अध्ययन को विशिष्ट बनाता है।
देवदत्त पटनायक से भी किया संवाद
शोध को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए संयुक्ता पाढ़ी ने प्रसिद्ध पौराणिक लेखक देवदत्त पटनायक से व्यक्तिगत मुलाकात कर अपने शोध विषय पर विचार-विमर्श किया। इसके अलावा उन्होंने अपने शोध से जुड़े निष्कर्षों को देश के विभिन्न प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों में शोध-पत्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया।
विशेषज्ञ ने भी की शोध की सराहना
संयुक्ता पाढ़ी ने अपना शोध कार्य शोध निर्देशक डॉ. शीला विजय, प्राध्यापक, डॉ. खूबचंद बघेल शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भिलाई-3 तथा सह-शोध निर्देशक डॉ. तरलोचन कौर संधू के मार्गदर्शन में पूर्ण किया। उनका शोध केंद्र शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग रहा।
उनकी अंतिम मौखिकी के बाह्य परीक्षक प्रो. नागेंद्र सिंह, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की रहे। उन्होंने शोध की सराहना करते हुए विशेष रूप से इस बात को महत्वपूर्ण माना कि अंग्रेजी विषय के शोध के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रभावी ढंग से अकादमिक विमर्श में प्रस्तुत किया गया।
सफल मौखिकी एवं शोध प्रतिरक्षण के उपरांत संयुक्ता पाढ़ी को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। उनका यह शोध भारतीय पौराणिक साहित्य, मंदिर संस्कृति और ज्ञान परंपरा को आधुनिक अकादमिक दृष्टि से समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।










