जनजातीय समाज का गौरवशाली इतिहास


भारत का जनजातीय समाज अपनी पारम्परिक विशेषता के लिए पहचाना जाता है । इस समाज में मौखिक शिक्षा की परम्परा रही है। अपनी सभ्यता संस्कृति और सहजता की विशिष्टता लिए…

ईसर-गवरा परब


कोई भी लोकपर्व हमारे जनजीवन को सुसंगठित और सुरभित करने की कार्य करती है ।ऐसा ही भारतीय ,प्राचीन देशज सभ्यता और संस्कृति का सुमेल करने वाली महान धार्मिक पर्व है…

राम राज्य से पहले हो प्रेम राज्य


लेख: बिजेंद्र सिन्हा दुर्ग राम राज्य की चर्चा इन दिनों जोरों पर है परन्तु राम राज्य से पहले प्रेम राज्य होना चाहिए। विद्वानों का मत है कि राम राज्य की…

स्वस्थ भारत का लक्ष्य पूरा हो


लेख बिजेंद्र सिन्हा दुर्ग समर्थ स्वास्थ्य के आधार पर ही परिवार व समस्त राष्ट्र समर्थ बनता है। हमारी संस्कृति में आरोग्य या उत्तम स्वास्थ्य को धर्म अर्थ काम और मोक्ष…

।। बरा सोंहारी रांध के पितर मनावत हस।।


छानी के ओरवाती ल लिप बहार के।पिड़वा के आसन म,लोटा मुखारी डार के।।अब का सुग्घर तोरई फूल चघावत हस।बरा सोंहारी रांध के,पितर मनावत हस।। बासी संग म कभू आमा चानी…

विचार मंथन-7वीं कड़ी


📚अगर तुम शिक्षित हो तो📚 अगर तुम शिक्षित हो तो ,,भूलकर भाषा की मर्यादाक्यों बड़ों को आंख दिखाते हो।।सीना चौड़ा कर गुस्से में,बिन सोचे,अपनों को ही जाने क्या-क्या कह जाते…

आज के कहानी ” माटी के गणेश “


ए कहानी पांच झन संगवारी के हरे . जे नान नान लइका रीहिस. उकरो इच्छा होय के हमु मन गणेश भगवान मढ़ातेन, फेर गणेश मढ़ाय म बड़ खर्चा आथे. सबों…

“हां मैंने सूरज को डूबते देखा है” रचना:कुमारी मौली साहू क्लास दसवी नर्मदा धाम सुरसुली


हां मैंने सूरज को डुबते देखा हैंतलाब मे खिले उन कमलों को सिकुड़ते देखा है ,चड़िया को अपने घोंसला कि ओर मुड़ते देखा हैहां मैंने सूरज को डुबते देखा है…

14 सितम्बर 1949″हमारा हिंदी दिवस


हिंदी हमारी है स्वराष्ट्र भाषा,परिष्कृत भावों का संसार है।होते विचारों का आदान प्रदान,विभिन्न बोलियों का आधार है।ऋषि मुनियों का है ग्रंथ पुराण,काव्य साहित्य जहाँ अपार है।राग रागनियां कला रंगमंच पर,हर्ष…

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