
बालोद/गुण्डरदेही | जब लक्ष्य राष्ट्र का भविष्य तय करना हो, तो जिम्मेदारी केवल कागजों तक सीमित नहीं रहती। इसी जज्बे के साथ बालोद जिला प्रशासन आज वातानुकूलित कमरों को छोड़कर तपती धूप और धूल भरी गलियों के बीच ‘जनगणना 2026’ के महायज्ञ को सफल बनाने उतरा। यह केवल एक निरीक्षण नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण था कि बालोद का प्रशासनिक अमला देश के सबसे महत्वपूर्ण डेटा को लेकर कितना सजग और समर्पित है।
कोहंगाटोला से कचान्दूर तक: जब ‘बॉस’ खुद बने मार्गदर्शक
आज का दिन मैदानी स्तर पर काम कर रहे प्रगणकों के लिए ऊर्जा और सीखने के उत्साह से भरा रहा। जनगणना नोडल अधिकारी यशवर्धन सिंह (बालोद) और तहसीलदार व चार्ज अधिकारी कोमल सिंह ध्रुव (गुण्डरदेही) ने जब फील्ड ट्रेनर्स की विशेषज्ञ टीम के साथ मोर्चा संभाला, तो प्रशासनिक सक्रियता की एक नई तस्वीर नजर आई।
अधिकारी द्वय ने फील्ड ट्रेनर्स—विवेक धुर्वे, आशिफ रिज़वी, उमेश साहू और अरविंद यदु के साथ मिलकर पाररास, खुटेरी रंग और कचान्दूर जैसे गांवों की तंग गलियों में पहुंचकर प्रगणकों के कार्य का ‘ग्राउंड जीरो’ पर अवलोकन किया।

ठीक इसी तरह बालोद ब्लॉक के घुमका, रेवती नवागांव और कोहंगाटोला में भी नोडल अधिकारी यशवर्धन सिंह और उनकी टीम ने सघन दौरा किया।

अधिकारियों को खुद घर-घर जाकर बारीकियां समझाते देख ग्रामीणों के बीच भी प्रशासन के प्रति अटूट विश्वास और सम्मान बढ़ा।

डिजिटल जनगणना: तकनीकी बारीकी ही असली ताकत
इस बार की जनगणना पूरी तरह ‘स्मार्ट’ और पेपरलेस है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने प्रगणकों को स्पष्ट संदेश दिया— “एक गलत क्लिक, भविष्य की गलत तस्वीर।” *

रियल-टाइम ट्रेनिंग: फील्ड ट्रेनर्स ने मौके पर ही HLO (House Listing Operations) ऐप में डेटा सिंक करने और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों की ऑफलाइन मैपिंग की तकनीक को ‘लाइव डेमो’ के जरिए सुलझाया।
पारदर्शिता का पहरा

प्रगणकों को हिदायत दी गई कि हर घर की जानकारी पूरी ईमानदारी से भरी जाए, क्योंकि यही डेटा भविष्य में शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का आधार बनेगा।
प्रशासन के इस कदम की क्यों हो रही है चर्चा?
जिले के प्रबुद्ध जनों और आम जनता के बीच इस निरीक्षण की जमकर तारीफ हो रही है, जिसके मुख्य कारण हैं:
जवाबदेही और निष्ठा: उच्च अधिकारियों ने खुद फील्ड पर उतरकर यह सिद्ध कर दिया कि काम की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं होगा।
टीम वर्क की मिसाल: विवेक धुर्वे, आशिफ रिज़वी, उमेश साहू और अरविंद यदु जैसे ट्रेनर्स ने प्रगणकों की तकनीकी समस्याओं को सहयोगात्मक तरीके से दूर कर ‘ओपन संवाद’ की परंपरा स्थापित की।
समयबद्धता: डेडलाइन का पालन सुनिश्चित करने के कड़े निर्देशों ने बालोद जिले को प्रदेश में जनगणना कार्य में अग्रणी बनाए रखने का हौसला दिया है।
”हमारा प्रयास है कि बालोद जिले का एक भी घर न छूटे और एक भी जानकारी गलत न हो। जनगणना का यह डिजिटल डेटा हमारे जिले के विकास का नया रोडमैप तैयार करेगा।” — यशवर्धन सिंह, जनगणना नोडल अधिकारी
निष्कर्ष: विकसित भारत की नींव में बालोद का योगदान
आज की प्रशासनिक सक्रियता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बालोद जिला प्रशासन केवल आदेश जारी करने में नहीं, बल्कि फील्ड पर साथ मिलकर लक्ष्य हासिल करने में विश्वास रखता है। प्रगणकों के हाथों में मौजूद मोबाइल और उनमें फीड हो रहा एक-एक डिजिटल आंकड़ा भविष्य के सुनहरे और विकसित बालोद की नई इबारत लिखेगा।
