बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयास अब असर दिखाने लगे हैं। बीते 4 मई 2026 को कोरिया देश से आए दो विदेशी पर्यटकों ने जिले के 5000 साल पुराने महापाषाण कालीन स्मारक करकाभाट का भ्रमण किया। इसे बालोद इको टूरिज्म की पिछले 5 वर्षों की निरंतर मेहनत का परिणाम माना जा रहा है।
🌍 सोशल मीडिया से जुड़कर सीधे बालोद पहुंचे विदेशी मेहमान

जानकारी के अनुसार, कोरिया के पर्यटक ली संगमैन सोशल मीडिया के माध्यम से बालोद इको टूरिज्म से जुड़े और रायपुर एयरपोर्ट से सीधे बालोद पहुंचे। यहां उन्होंने बरही रिसॉर्ट में रात्रि विश्राम किया।
इसके बाद उन्होंने सिया देवी के प्राकृतिक जंगलों का भ्रमण किया और फिर ऐतिहासिक स्थल करकाभाट पहुंचकर उसकी प्राचीनता को करीब से महसूस किया।
🪨 5000 साल पुरानी सभ्यता देख भावुक हुए पर्यटक

करकाभाट स्थल करीब 10 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ प्राचीन कब्रगाह माना जाता है, जहां आदिमानवों द्वारा निर्मित विशाल पत्थर संरचनाएं आज भी मौजूद हैं।
इन संरचनाओं को देखकर कोरियाई पर्यटक भावुक हो उठे। उन्होंने कहा—
“आज के समय में लोग अपने जीवित माता-पिता का सम्मान नहीं करते, लेकिन 5000 साल पहले के लोग अपने पूर्वजों के प्रति कितने संवेदनशील थे, यह यहां देखकर समझ आता है।”
🧭 गाइड्स ने कराया ऐतिहासिक भ्रमण

बालोद इको टूरिज्म के अध्यक्ष सूरज करियारे ने बताया कि दोनों पर्यटक प्राचीन स्थलों पर शोध कार्य कर रहे हैं।
उन्हें जिले की संस्कृति और इतिहास से परिचित कराने का कार्य गाइड यशकांत गढ़े और टोमेश ठाकुर ने किया।
पर्यटकों ने पूरे दिन विभिन्न स्थलों का भ्रमण किया और अपने अनुभव को यादगार बताया। साथ ही भविष्य में दोबारा बालोद आने की इच्छा भी जताई।
⚠️ धरोहर पर खतरा, संरक्षण की मांग
जहां एक ओर यह उपलब्धि जिले के लिए गर्व का विषय है, वहीं दूसरी ओर इस ऐतिहासिक स्थल की सुरक्षा को लेकर चिंता भी सामने आई है।
बताया गया कि कुछ लोग अज्ञानतावश करकाभाट के पत्थरों का उपयोग घर बनाने में कर रहे हैं, जिससे यह धरोहर धीरे-धीरे नष्ट हो रही है।
बालोद इको टूरिज्म ने प्रशासन से मांग की है कि:
- स्थल का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए
- प्रचार-प्रसार बढ़ाया जाए
- पत्थरों की अवैध निकासी पर सख्त रोक लगे
💼 पर्यटन से रोजगार की नई उम्मीद
सूरज करियारे ने बताया कि संस्था का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ना और जिले की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक पहचान को विश्व स्तर पर स्थापित करना है।
👉 विदेशी पर्यटकों का बालोद आगमन इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में जिला अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
