“संजय बैस के सहयोग से महिला की लौटी आंखों की रोशनी, कॉर्निया प्रत्यारोपण से मिला नया जीवन”



कुसुमकसा/बालोद। सेवा और संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए पूर्व जनपद सदस्य संजय बैस एवं उनके परिवार के सहयोग से एक जरूरतमंद महिला की आंखों की रोशनी वापस लौट आई। रायपुर स्थित गणेश विनायक अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण (Cornea Transplant) कर यह संभव हो सका।


👁️ नेत्र शिविर से शुरू हुई उम्मीद की किरण

जानकारी के अनुसार, स्वर्गीय जयपाल सिंह बैस की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर 16 से 24 दिसंबर तक श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन किया गया था। इसके समापन पर 24 दिसंबर को विशाल निःशुल्क नेत्र शिविर आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 700 लोगों का परीक्षण किया गया और 300 से अधिक हितग्राहियों को चश्मे वितरित किए गए

इसके अलावा 168 लोगों के मोतियाबिंद ऑपरेशन हेतु रायपुर आने-जाने, भोजन और इलाज की पूरी व्यवस्था भी निःशुल्क की गई।


⚠️ महिला की आंख की कॉर्निया थी पूरी तरह खराब

शिविर के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि वार्ड क्रमांक 12 कुसुमकसा निवासी 60 वर्षीय निर्मला बाई यादव की एक आंख की कॉर्निया पूरी तरह खराब हो चुकी है, जिससे उनकी दृष्टि समाप्त हो गई थी।

डॉक्टरों ने बताया कि उनकी आंखों की रोशनी वापस लाने का एकमात्र उपाय कॉर्निया प्रत्यारोपण है, जो काफी जटिल और महंगा प्रक्रिया है, साथ ही इसके लिए उपयुक्त डोनर मिलना भी कठिन होता है।


🤝 संजय बैस ने नहीं छोड़ी उम्मीद

इस जानकारी के बाद संजय बैस ने महिला की मदद का संकल्प लिया और लगातार अस्पताल प्रबंधन से संपर्क बनाए रखा। उनकी पहल पर गणेश विनायक आई हॉस्पिटल के संयोजक डॉ. विकास मिश्रा और उनकी टीम ने प्रयास कर उपयुक्त कॉर्निया की व्यवस्था की।

इसके बाद डॉक्टरों ने निःशुल्क ऑपरेशन कर सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण किया, जिससे महिला की आंखों की रोशनी वापस लौटने लगी।


😊 निर्मला बाई ने जताया आभार

निर्मला बाई यादव ने बताया कि करीब 5 वर्ष पहले गिरने के कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। कई जगह इलाज कराने के बावजूद उन्हें लाभ नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि,
“आज संजय बैस के सहयोग से मेरी आंखों की रोशनी वापस आ रही है, इसके लिए मैं उनका और अस्पताल प्रबंधन का दिल से धन्यवाद करती हूं।”


🌟 “यज्ञ की पूर्णाहुति जैसा लगा यह कार्य” – संजय बैस

संजय बैस ने भावुक होकर कहा कि यह कार्य उनके लिए किसी “राजसूय यज्ञ की पूर्णाहुति” जैसा है। उन्होंने बताया कि सभी ऑपरेशन सफल रहे, लेकिन इस एक केस को लेकर उन्हें चिंता थी।

उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के सहयोग से जब यह ऑपरेशन सफल हुआ, तो उन्हें लगा कि उनका संकल्प पूर्ण हुआ।


🙏 अस्पताल टीम का रहा विशेष योगदान

इस पूरे अभियान को सफल बनाने में डॉ. विकास मिश्रा और उनकी टीम का विशेष योगदान रहा। उनके कुशल मार्गदर्शन में सैकड़ों मरीजों का सफल इलाज किया गया।


👉 यह पहल न केवल एक महिला के जीवन में रोशनी लेकर आई, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और मानवता का एक प्रेरणादायक संदेश भी दे गई।

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