बालोद/डौंडीलोहारा से धर्मेंद्र निषाद की विशेष रिपोर्ट। क्षेत्र के वनांचल ग्राम रायगढ़, करिया गोंदी और मड़ियाकट्टा के जंगलों में हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा तेजी से चर्चा में है और पर्यावरण प्रेमियों के साथ-साथ ग्रामीणों में भी गहरी चिंता देखी जा रही है।
🌳 जंगलों की कटाई से बढ़ी चिंता
प्रकृति प्रेमी धर्मेंद्र निषाद का कहना है कि विकास और शहरीकरण की अंधी दौड़ में जंगलों का लगातार नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि वन क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में हरे वृक्षों को काटा जा रहा है, जो न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि वन्य जीवों के अस्तित्व के लिए भी खतरा बन चुका है।
उनका कहना है कि पेड़ों की कटाई सिर्फ लकड़ी का नुकसान नहीं, बल्कि पक्षियों के आशियाने और प्रकृति के संतुलन को भी प्रभावित करती है।
🐾 वन्य जीवों पर भी खतरा
धर्मेंद्र निषाद ने बताया कि हाल ही में जब वे रायगढ़ क्षेत्र के जंगलों में पहुंचे, तो वहां हिरणों का झुंड दिखाई दिया। उन्होंने चिंता जताई कि लगातार कटते जंगलों के कारण वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास खत्म हो रहा है, जिससे उनका जीवन संकट में पड़ता जा रहा है।
⚠️ वन विभाग और कर्मचारियों पर सवाल
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ स्थानीय बिचौलियों और वन विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से अवैध कटाई की जा रही है। सवाल उठाया गया कि जब इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं, तो क्या इसके लिए वैध अनुमति दी गई है या नहीं?
साथ ही, यह भी कहा गया कि वन चौकियों और जांच नाकों पर निगरानी के बावजूद लकड़ी का परिवहन कैसे हो रहा है, यह जांच का विषय है।
🚧 जांच नाका पर भी उठे सवाल
डौंडीलोहारा जांच नाका को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दावा किया गया है कि कुछ कर्मचारी कथित रूप से राशि लेकर मालवाहक वाहनों को छोड़ देते हैं, जिससे अवैध परिवहन को बढ़ावा मिल रहा है।
📉 हर साल सैकड़ों एकड़ वन क्षेत्र हो रहा प्रभावित
धर्मेंद्र निषाद के अनुसार, बालोद जिले में हर वर्ष लगभग 100 एकड़ से अधिक क्षेत्र से हरे वृक्ष गायब हो रहे हैं, जो आने वाले समय में पर्यावरणीय संकट को और गहरा सकता है।
🏛️ प्रशासन से जांच की मांग
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जंगलों में हो रही अवैध कटाई की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, वन विभाग को अपनी जिम्मेदारी का गंभीरता से पालन करने की अपील भी की गई है।
📢 “प्रकृति है तो कल है” का संदेश
अंत में उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षण केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
👉 यह मामला अब स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है, जिस पर ठोस कार्रवाई की जरूरत महसूस की जा रही है।
