“सुरों की महफिल से गूंजा बालोद: स्वरांजलि सिंगिंग इवेंट में कलाकारों ने बांधा समां”



📍 बालोद। नगर में संगीत प्रेमियों के लिए एक यादगार और सुरमई संध्या का आयोजन किया गया। स्वरांजलि म्यूजिकल ग्रुप बालोद द्वारा तांदुला नदी तट स्थित बालाजी रिसोर्ट में कराओके सिंगिंग कार्यक्रम का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न जिलों से आए प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से माहौल को संगीतमय बना दिया।


🎶 मां शारदे की वंदना से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत मां शारदे के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। सरस्वती वंदना एवं राजकीय गीत की प्रस्तुति रानू निषाद और तबस्सुम ने दी, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।


🎤 सुरों से सजी शाम, गजलों ने लूटी वाहवाही

कार्यक्रम का आगाज मशहूर गजल “दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है” की शानदार प्रस्तुति से हुआ। इसके बाद छत्तीसगढ़ी, पुराने सदाबहार फिल्मी गीतों और नई धुनों पर कलाकारों ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा।
श्रोतागण पूरे कार्यक्रम के दौरान मंत्रमुग्ध होकर गीतों का आनंद लेते रहे और तालियों की गूंज से कलाकारों का उत्साह बढ़ाते रहे।


🌟 विभिन्न जिलों के कलाकारों ने बिखेरा जलवा

कार्यक्रम में रायपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, दुर्ग-भिलाई, बलोदा बाजार, कांकेर सहित कई जिलों से आए कलाकारों ने भाग लिया।
प्रमुख कलाकारों में अजय साहू, अजय कुलकर्णी, रत्ना नायक, डॉ. भव्या शर्मा, सुषमा सारथी, पूर्णिमा झा, हिमांशु श्रीवास्तव, विवेक हंस, माधुरी पांडे, सुनीता आर्य, कांति मौर्य, उमेश चंद्र यादव, संतोष शर्मा, देवेंद्र शर्मा, सीमा शर्मा, स्वाति दुबे, गुलराज शर्मा, गायत्री शर्मा, प्रमोद साहू, उत्तम सूरज, सुलोचना सूरज सहित स्थानीय कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी।


🎙️ आयोजन समिति ने बताया उद्देश्य

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्याम यदु (रायपुर) तथा आयोजन समिति के संरक्षक अरुण कुमार साहू, अध्यक्ष मनीष साहू और सचिव लोकेश साहू ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य संगीत के माध्यम से समाज में शांति, आनंद और प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना है।


🎉 प्रतिभागियों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम का कुशल संचालन अजय कुलकर्णी ने किया। अंत में मनीष साहू, अंजू लता साहू और लोकेश साहू द्वारा जीतेश्वरी साहू की 25वीं वैवाहिक वर्षगांठ के अवसर पर सभी प्रतिभागियों को गिफ्ट देकर सम्मानित किया गया।


👉 इस शानदार आयोजन ने बालोद की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करते हुए स्थानीय प्रतिभाओं को नई पहचान दिलाने का कार्य किया।

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