हिंदी हमारी है स्वराष्ट्र भाषा,
परिष्कृत भावों का संसार है।
होते विचारों का आदान प्रदान,
विभिन्न बोलियों का आधार है।
ऋषि मुनियों का है ग्रंथ पुराण,
काव्य साहित्य जहाँ अपार है।
राग रागनियां कला रंगमंच पर,
हर्ष विनोदमयता का प्रचार है।
अंग्रेजी तो खड़ी एक टांग पर,
हिंदी शब्दों की पुष्प भण्डार है।
उत्तर दक्षिण और पूरब पश्चिम,
भारतीयता का प्रचार प्रसार है।
इंद्रधनुषी सा इनका रूपांकन,
जैसे जुड़ा धरती व आकाश है।
सहेजती है राष्ट्र विविधताओं को,
जैसे समुद्र में नदियों की धार है।
नित छप रहे हैं बावन वर्णाक्षर,
लिए हाथ पे लोग अखबार है।
है इतिहास भूगोल व धर्म ग्रंथ,
हिंदी ज्ञान-विज्ञान का प्रकाश है।
मदन मंडावी
डोंगरगढ़ , राजनांदगांव cg मो.7693917210
