बिना प्रशासनिक स्वीकृति वर्षों से चल रही डिजिटल प्रणाली पर विवाद
बालोद। नगर पालिका परिषद बालोद में संचालित कंप्यूटराइजेशन एवं डिजिटल लेखा-जोखा प्रणाली को लेकर अब विवाद गहराता जा रहा है। जनसेवक उमेश कुमार सेन ने इस मामले में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक शिकायत दर्ज कराई है। वहीं अब इस पूरे मामले को लेकर लोकायुक्त में भी शिकायत किए जाने की तैयारी की जा रही है।
RTI में हुआ बड़ा खुलासा
जानकारी के अनुसार, उमेश कुमार सेन ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत 2 अप्रैल 2026 को आवेदन प्रस्तुत कर नगर पालिका में डिजिटल लेखा प्रणाली संचालन हेतु प्रशासनिक स्वीकृति एवं आदेश की जानकारी मांगी थी।
इस पर जन सूचना अधिकारी द्वारा 30 अप्रैल 2026 को दिए गए जवाब में बताया गया कि कंप्यूटर सुविधा एवं डिजिटल लेखा-जोखा प्रणाली प्रारंभ करने संबंधी कोई प्रशासनिक आदेश या प्रस्ताव उपलब्ध नहीं है।
इस खुलासे के बाद नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं, क्योंकि वर्षों से कंप्यूटर आधारित कार्य एवं डिजिटल लेखा प्रणाली व्यवहार में संचालित होने की बात सामने आ रही है।
जिला कलेक्टर से लेकर राज्य आयुक्त तक पहुंची शिकायत
मामले को गंभीर बताते हुए उमेश कुमार सेन ने जिला कलेक्टर बालोद, आयुक्त नगर पालिका प्रशासन छत्तीसगढ़ एवं संभागीय आयुक्त दुर्ग को स्पीड पोस्ट के माध्यम से विस्तृत शिकायत भेजी है।
शिकायत में उठाई गई प्रमुख मांगें
- पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए
- डिजिटल प्रणाली संचालन का वैधानिक आधार स्पष्ट किया जाए
- बिना स्वीकृति संचालन पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो
- वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए
- शिकायत पर हुई कार्रवाई से शिकायतकर्ता को अवगत कराया जाए
अब लोकायुक्त में होगी शिकायत
उमेश कुमार सेन ने बताया कि नगर पालिका में कथित अनियमितताओं एवं वार्डवार विकास कार्यों में पारदर्शिता की कमी को लेकर अब लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई जाएगी। शिकायत में प्रत्येक वार्ड से संबंधित आय-व्यय, निर्माण कार्य एवं योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी संलग्न की जाएगी।
लोकायुक्त क्यों महत्वपूर्ण?
शिकायतकर्ताओं के अनुसार लोकायुक्त एक स्वतंत्र जांच संस्था है, जहां भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग, वित्तीय गड़बड़ी एवं प्रशासनिक लापरवाही जैसे मामलों की निष्पक्ष जांच होती है। स्थानीय स्तर पर समाधान नहीं मिलने की स्थिति में लोकायुक्त का सहारा लिया जा रहा है।
जनहित में उठे इस मामले ने बालोद नगर पालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब लोगों की निगाहें प्रशासनिक जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
