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महाशिवरात्रि विशेष – 11 वीं शताब्दी के “शिव मंदिर जगन्नाथपुर” में 1100 साल बाद आज होगा भव्य पूजा पाठ, तीन शिला चक्र हैं आकर्षण का केंद्र, पढ़िये मंदिर व शिला चक्र से जुड़ी ख़ास बातें

जगन्नाथपुर/बालोद । जगन्नाथपुर के बांध तालाब स्थित 11वीं शताब्दी के पुरातत्व संरक्षित स्मारक “शिव मंदिर” में 1100 साल बाद फिर भव्य पूजा पाठ के साथ ग्रामीण यहां महाशिवरात्रि मनाएंगे। इसकी भव्य तैयारी चल रही है। सरपंच अरुण साहू सहित ग्रामीणों द्वारा पुरातात्विक शिव मंदिर को फूलों से सजाया जा रहा है। मंदिर के सामने में भी आकर्षक सजावट की गई है। इस मंदिर को लगभग 20 साल पहले पुरातत्व विभाग द्वारा अपने संरक्षण में लिया गया है। पर विभाग द्वारा सिर्फ बोर्ड लगाकर औपचारिकता पूरी की गई थी।

मंदिर की देखरेख नहीं हो रही थी। जिसे पंचायत प्रशासन और ग्रामीण खुद से आगे आए और इस शिवरात्रि पर इस मंदिर को संरक्षित कर फिर से यहां इस शिव धाम को एक धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में काम करना शुरू कर दिए हैं। सुबह 7 बजे यहां महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। सरपंच अरुण साहू ने ग्रामीणों को इस पूजन कार्य में सम्मिलित होने की अपील की है। सरपंच ने आगामी योजना के बारे में बताया कि बांध लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। बांध के एक हिस्से को हम पिकनिक स्पॉट के रूप में डेवलप करने की भी तैयारी कर रहें हैं कि दूसरे तट पर लगभग 20 फीट ऊंची शंकर की मूर्ति स्थापित होगी।

शिला चक्र है आकर्षण का केंद्र

इस मंदिर की खासियत यह है कि यह पुरातत्व के अनुसार 11वीं से 13 वी शताब्दी के बीच की हैं। वही इस जगह पर तीन शिला चक्र भी हैं। पत्थर के बने चक्र को लेकर पहले मान्यता है कि  इसमें अगर कोई बैठकर दातुन करता था तो उसे यह पत्थर पानी के ऊपर तैराते हुए गहराई में छोड़ देता था और उस पर बैठने वाले व्यक्ति को डूबा कर वापस आ जाता था। इस दौरान व्यक्ति को पता भी नहीं चलता था कि कैसे वह पानी में डूब गया। हालांकि यह बातें यहां के बुजुर्गों के बीच एक कहानी किस्सा ही था। इसकी पुरातत्व विभाग ने कोई पुष्टि नहीं की। लेकिन जिस तरह से पत्थर की बनावट है वह आकर्षक है।

यहां ऐसे तीन शिला चक्र हैं। जिसमें एक आज भी इस बांध तालाब में डूबा हुआ है। एक  उक्त शिव मंदिर के गुंबद में लगा हुआ है तो एक को  ग्रामीणों द्वारा सहेज कर रखा गया है। जिसे अब इस शिव मंदिर प्रांगण में स्थापित किया गया है। यहीं पर पूजा अर्चना भी होगी।

मंदिर की बनावट भी मोहक

समय के साथ इसका निर्माण बड़ी ही कलात्मकता के साथ किया गया है। यह मंदिर चारों ओर स्तंभों पर खड़ा है। जिसके ऊपर छत भी है जो की मंडप जैसी आकृति में ऊपर की ओर जाता है। पत्थरो पर की गई नक्काशियां भी काफी खूबसूरत नजर आती है।

मंदिर में शिवलिंग के साथ ही गणेश जी की प्रतिमा स्थापित है। तालाब किनारे स्थित इस मंदिर में आप कभी भी चले जाएं श्रद्धा व शांति बनी रहती है। ग्रामीण दानी देशमुख, मनोज सुकतेल, सुदामा यादव ने बताया यहां चूहे व सांप का बसेरा एक साथ रहता है, हमने देखा है सांप, चूहे को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।

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