गरियाबंद जिले के संकुल समन्वयक के प्रयास से गांव में स्मार्ट क्लास से सुधरा बच्चों का भविष्य, राज्य स्तरीय ब्लॉग लेखक विवेक धुर्वे ने लिखी इनकी सक्सेस स्टोरी, पढ़िए क्या है खास



गरियाबंद। संकुल समन्वयक ने कोरोना काल में ऑनलाइन क्लास,मोहल्ला क्लास, स्मार्ट क्लास से बदल दी अपने संकुल की तस्वीर।

विवेक धुर्वे

जी मैं विवेक धुर्वे राज्य स्तरीय ब्लॉग लेखक आज आपको गरियाबंद जिले के चरोदा के संकुल समन्वयक पंकज कुमार साहू के कार्यों से परिचय करवा रहा हूँ | जिनके अथक् प्रयास से अपने शिक्षकों के सहयोग से अपने संकुल की तस्वीर ही बदल डाली | श्री पंकज कुमार साहू(संकुल समन्वयक चरोदा) स्कूल प्राथमिक शाला बागबाहरा में पदस्थ है व चरोदा के संकुल समन्वयक का कार्य भी कर रहे है | वहाँ के सभी शिक्षक स्मार्ट टीवी व मोहल्ला कक्षा,स्मार्ट कक्षा से न केवल छात्राओं को पढ़ाते हैं, बल्कि विज्ञान के अत्याधुनिक तकनीक के बारे में सामान्य ज्ञान की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है |

पंकज कुमार साहू

यहां के छात्रों में शिक्षा के प्रति ललक झलकती है | अमूमन लोगों के मन में यह धारणा रहती है, कि शासकीय स्कूलों में पढ़ाई नाम की चीज नहीं होती, लेकिन चरोदा जिला गरियाबंद के शिक्षकों ने इस धारणा को बदल दिया है | यहां के शिक्षकों ने क्लास में न केवल हाईटेक तरीके से पढ़ाई करा रहे हैं | बल्कि जनरल नॉलेज का ज्ञान भी बच्चों के बीच साझा कर रहे हैं | कोरोना संक्रमण से बचने के लिए चरोदा संकुल के शिक्षकों ने बच्चों की जिज्ञासाओं और पालकों की चिंताओं के समाधान के लिए नया तरीका निकाला है | लॉकडाउन में पढ़ाई प्रभावित न हो इसलिए मोहल्ला क्लास की शुरुआत की है | पहले ऑनलाइन कक्षा के माध्यम से ही बच्चों को पढ़ाई करवाई जा रही थी, पर शासन के आदेश के तहत विगत 03 माह से संकुल के 24 विद्यालयों में मोहल्ला कक्षा का आयोजन भी किया जाने लगा है | कुछ विद्यालयों में स्मार्ट रूम बनाया गया है, प्रिंटरिच वातावरण वहाँ पेंटिंग की गई है, व कुछ विद्यालयों में कमरों में पुट्टी लगा कर वॉल पेंटिंग की गई है | जिससे बच्चों में पढ़ाई का अच्छा माहौल बन गया है व पूरे विद्यालय साफ सुथरे व आकर्षक दिख रहे है |

कोरोना के चलते सभी विद्यार्थियों को शिफ्ट में बुला कर कक्षा आयोजित की जा रही है | जिससे सभी विद्यार्थियों को पढाई का लाभ मिल सके | स्मार्ट कक्षा जिसमें टीवी के माध्यम से बच्चों को पढ़ाई करवाई जा रही है | जो कि सभी विद्यार्थियों के लिए एक अभूतपूर्व रोमांचित पढाई का तरीका है,जिससे सभी बच्चों में पढाई के लिए रुचि जागृत हुई | श्री साहू जी के साथ कुल 65 शिक्षकों के द्वारा कार्य किया जा रहा है, व कुल 1024 विद्यार्थी पूरे संकुल में शिक्षा ले रहे है | कोरोना संक्रमण ने गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से चौपट कर दिया | सरकार ने भले ही स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करा दी हों, लेकिन 80 से 90 प्रतिशत बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है | क्योंकि अधिकतर बच्चों के पास संसाधनों का अभाव है| न तो बच्चों के पास एंड्रायड मोबाइल की व्यवस्था है और न ही इंटरनेट | ऐसे में संकुल समन्वयक के प्रयास से कुछ शिक्षकों ने मोहल्ला क्लास चलाने की पहल की है | इसमें गांव के शिक्षित लोग शिक्षकों की मदद से बच्चों को पढ़ा रहे हैं | श्री साहू जी का कहना है कि शिक्षा सभी के जीवन मे जरूरी है,जैसे कि कोई नवजात शिशु असहाय तथा असामाजिक होता है | वह न बोलना जनता है न चलना-फिरना|

उसका न कोई मित्र होता है और न शत्रु | यही नहीं, उसे समाज के रीती-रिवाजों तथा परम्पराओं का ज्ञान भी नहीं होता है, और न ही उसमें किसी आदर्श तथा मूल्य को प्राप्त करने की जिज्ञासा पाई जाती है | परन्तु जैसे जैसे वह बड़ा होता जाता है वैसे-वैसे उस पर शिक्षा के औपचारिक तथा अनौपचारिक साधनों का प्रभाव पड़ता जाता है | इस प्रभाव के कारण उसका जहाँ एक ओर शारीरिक, मानसिक तथा संवेगात्मक विकास होता जाता है, वहाँ दूसरी ओर उसमें सामाजिक भावना भी विकसित होती जाती है | इस प्रकार हम देखते हैं,कि बालक के व्यवहार में वांछनीय परिवर्तन करने के लिए व्यवस्थित शिक्षा की परम आवश्यकता है | सच तो यह है कि शिक्षा से इतने लाभ हैं, कि उनका वर्णन करना कठिन है | इस संदर्भ में यहाँ केवल इतना कह देना ही पर्याप्त होगा की शिक्षा माता के सामान पालन-पोषण करती है, पिता के समान उचित मार्ग-दर्शन द्वारा अपने कार्यों में लगाती है | शिक्षा के ही द्वारा हमारी कीर्ति का प्रकाश चारों ओर फैलता है तथा शिक्षा ही हमारी समस्याओं को सुलझाती है, एवं हमारे जीवन को सुसंस्कृत करती है | हम देश में रहें अथवा विदेश में शिक्षा हमारे लिए क्या-क्या नहीं करती | कहने का तात्पर्य यह है कि जिस प्रकार सूर्य का प्रकाश पाकर कमल का फूल खिल उठता है, तथा सूर्य अस्त होने पर मुरझा जाता है, ठीक उसी प्रकार शिक्षा के प्रकाश को पाकर प्रत्येक व्यक्ति कमल के फूल की भांति खिल उठता है, तथा अशिक्षित रहने पर दरिद्रता, शोक एवं कष्ट के अंधकार में डूबा रहता है | संक्षेप में, शिक्षा वह प्रकाश है, जिसके द्वारा छात्र/छात्राओं की समस्त शारीरिक, मानसिक, सामाजिक तथा अध्यात्मिक शक्तियों का विकास होता है | “पढई तुंहर दुआर” पोर्टल से सभी विद्यार्थी इसमें शामिल सामग्री से भी लाभ ले रहे है |

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