“वाहवाही लूटने के लिए सिर्फ दो दिन बढ़ाई धान खरीदी” — ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष नरेंद्र सिन्हा का भाजपा सरकार पर तीखा हमला



बालोद।धान खरीदी को लेकर एक बार फिर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। बालोद ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष नरेंद्र सिन्हा ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज कर सरकार केवल वाहवाही लूटने के लिए धान खरीदी की अवधि दो दिन बढ़ाकर औपचारिकता निभा रही है।

नरेंद्र सिन्हा ने कहा कि बालोद जिले में सैकड़ों किसानों का लाखों क्विंटल धान अब भी नहीं बिक पाया है। ऐसे में सरकार द्वारा मात्र दो दिन की खरीदी अवधि बढ़ाना किसानों के साथ मजाक है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में किसानों के हित में काम करना चाहती तो कम से कम 15 दिनों का अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए था, ताकि सभी किसानों का धान खरीदा जा सके।

उन्होंने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस वर्ष बालोद जिले में पिछले वर्ष की तुलना में धान खरीदी में भारी गिरावट आई है। उनके अनुसार जिले में इस बार पिछले सीजन की तुलना में 5 लाख 64 हजार 703 क्विंटल 20 किलो धान कम खरीदा गया है। यह स्थिति दर्शाती है कि खरीदी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और हजारों किसान परेशान हैं।

ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि 5 और 6 फरवरी को जिले में केवल 980 पंजीकृत किसानों से करीब 20 हजार क्विंटल धान ही खरीदा जा रहा है, जो जिले के कुल किसानों और धान की मात्रा के हिसाब से बेहद कम है।

नरेंद्र सिन्हा ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं है। धान खरीदी की व्यवस्था समय पर सुचारु रूप से नहीं की गई, टोकन व्यवस्था में अव्यवस्था रही और कई केंद्रों में बार-बार तकनीकी व प्रशासनिक दिक्कतें सामने आईं। इसके कारण किसानों को लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ी और अंततः उनका धान खरीदा ही नहीं जा सका।

उन्होंने कहा कि सरकार केवल घोषणा और प्रचार में व्यस्त है, जबकि जमीनी स्तर पर किसान परेशान हैं। दो दिन की अतिरिक्त खरीदी अवधि बढ़ाकर सरकार केवल अपनी छवि सुधारने का प्रयास कर रही है। वास्तविकता यह है कि किसानों का धान अभी भी कोठार और घरों में पड़ा है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बालोद ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष नरेंद्र सिन्हा ने भाजपा सरकार पर किसानों को ठगने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस वर्ष धान खरीदी पूरी तरह सुनियोजित षड्यंत्र के तहत की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब किसान धान की फसल लगा रहे थे, उसी समय सोसाइटियों में खाद की किल्लत पैदा कर दी गई और कम मात्रा में खाद उपलब्ध कराया गया, ताकि किसान कम उत्पादन करें। इसके बावजूद किसानों ने अपने दम पर अच्छी फसल तैयार की तो शासन द्वारा रकबे की जांच सहित विभिन्न प्रकार के दबाव बनाए जाने लगे। धान खरीदी शुरू होने के बाद भी अनेक नियम-कायदों और प्रक्रियाओं का हवाला देकर किसानों को बेवजह परेशान किया गया। यहां तक कि घर-घर जाकर रकबा समर्पण के नाम पर किसानों को डराने-धमकाने की बात भी सामने आई। उन्होंने कहा कि खरीदी कम हो, इसके लिए ऑनलाइन टोकन व्यवस्था में भी जानबूझकर तकनीकी दिक्कतें पैदा की गईं, जिसके चलते पिछले कई वर्षों की तुलना में इस बार धान खरीदी काफी कम हुई है और किसान आर्थिक रूप से प्रभावित हुए हैं।

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