नवचेतना समाजसेवी संगठन द्वारा गुरु घासीदास जयंती सेवा, श्रद्धा और समरसता के साथ मनाई गई



बालोद ‌। महान संत, समाज-सुधारक एवं मानवता के प्रकाश-पुंज सदगुरु घासीदास बाबा की जयंती नवचेतना समाजसेवी संगठन द्वारा अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ मनाई गई। इस पावन अवसर पर आमापारा बालोद में स्थित गुरु घासीदास बाबा की जैतखाम की विधिवत पूजा-अर्चना कर सामाजिक समरसता, समानता और मानवीय मूल्यों का संदेश प्रसारित किया गया। नवचेतना समाजसेवी संगठन अपने आदर्श वाक्य “सेवा ही सर्वोत्तम धर्म है” को जीवन दर्शन मानते हुए निरंतर सेवा के पथ पर अग्रसर है। संगठन प्रकृति प्रेम एवं संरक्षण, जीव-दया, सामाजिक सेवा, धर्म और संस्कृति संरक्षण जैसे पुनीत कार्यों के माध्यम से समाज में करुणा, चेतना और उत्तरदायित्व की भावना को सशक्त कर रहा है। गुरु घासीदास जयंती के शुभ अवसर पर संगठन द्वारा कपिलेश्वर मंदिर में दर्शन हेतु आए श्रद्धालुओं के बीच पेड़ा, बूंदी, इलायची दाना, फल्ली दाना, चना, किशमिश आदि का प्रसाद वितरण किया गया। यह प्रसाद केवल खाद्य सामग्री नहीं, बल्कि सेवा, सद्भाव और आपसी भाईचारे का प्रतीक था। इस सेवा एवं श्रद्धा से ओतप्रोत आयोजन में संगठन की पद्मिनी साहू (संयोजिका), रेणुका निषाद (सह-संयोजिका), दुर्गा जोशी (कोषाध्यक्ष), रुक्मणी कोसरे (सह-कोषाध्यक्ष), डिलेश्वरी साहू (सचिव), रीटा पाठक (सह-सचिव), ज्योति कौशल, सरिता साहू, डॉक्टर रुक्मणी साहू, सुशीला गरिया सहित अनेक समर्पित सदस्य उपस्थित रहे। इस अवसर पर संगठन की संयोजिका पद्मिनी देवेंद्र साहू ने गुरु घासीदास बाबा के जीवन-दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाबा ने इस संसार को सत्य, अहिंसा, शांति, दया, समानता, साहस और परोपकार की अनुपम शिक्षा दी। उन्होंने समाज को मांसाहार, चोरी, जुआ और मद्यपान जैसे व्यसनों से मुक्त करने का संदेश दिया तथा “मनखे-मनखे एक समान” का अमर उद्घोष कर मानव मात्र की एकता को स्वर दिया।

उन्होंने कहा कि बाबा अपनी आय का लगभग पचहत्तर प्रतिशत भाग निर्धनों और वंचितों में अर्पित कर देते थे। उनका जीवन त्याग, करुणा और सेवा की जीवंत साधना था। गुरु घासीदास बाबा का जन्मदिवस हमें यह स्मरण कराता है कि धर्म का वास्तविक सौंदर्य कर्म, करुणा और न्याय में निहित होता है, न कि बाह्य आडंबरों में। बिना किसी वैभव, सत्ता या बल के, केवल सत्य और चेतना के प्रकाश से बाबा ने जनमानस को जागृत किया। यदि आज का समाज उनके विचारों और मूल्यों का अंशमात्र भी आत्मसात कर ले, तो मानवता पुनः अपने श्रेष्ठ स्वरूप को प्राप्त कर सकती है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी सदस्यों ने गुरु घासीदास बाबा के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने तथा समाज सेवा के कार्यों को और अधिक निष्ठा और व्यापकता के साथ आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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