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वृक्ष विहीन होते जंगल चिंता का विषय, पूर्व मंडल अध्यक्ष ने उठाए सवाल

“जंगल कटते रहे तो मानव जाति का विनाश तय” — पर्यावरण प्रेमी रुपेश सिन्हा ने जताई चिंता

डौण्डीलोहारा। लगातार कट रहे जंगलों, बढ़ती गर्मी और पर्यावरण असंतुलन को लेकर क्षेत्र में चिंता बढ़ती जा रही है। डौण्डीलोहारा के पूर्व मंडल अध्यक्ष एवं किसान रुपेश सिन्हा ने जंगलों की अंधाधुंध कटाई पर गहरी चिंता जताते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए जनजागरण की अपील की है।

उन्होंने कहा कि वर्ष दर वर्ष बढ़ती गर्मी और सूर्य की तीव्र उष्णता इस बात का संकेत है कि प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण तेजी से वृक्ष विहीन होते जंगल हैं। यदि समय रहते समाज और प्रशासन नहीं जागा, तो आने वाले वर्षों में मानव जीवन के लिए गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।

“पर्यावरण बचाने की आवाज उठाने वाले पागल नहीं”

रुपेश सिन्हा ने कहा कि सोशल मीडिया और समाज में पर्यावरण संरक्षण को लेकर लगातार जागरूकता फैलाने वाले लोग किसी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि आने वाले भविष्य की भयावह स्थिति को समझते हुए लोगों को चेताने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को समाज का सच्चा प्रहरी बताते हुए कहा कि जो लोग प्रकृति बचाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर रहे हैं, वे वास्तव में सम्मान के पात्र हैं।

बिना अनुमति जंगल कटाई पर उठाए सवाल

उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर मशीनों और मजदूरों के माध्यम से बड़े पैमाने पर लकड़ी कटाई की जा रही है, जबकि अधिकांश मामलों में वैध अनुमति तक नहीं ली जाती। भोले-भाले किसानों को लालच देकर हरे-भरे वृक्ष कटवाए जा रहे हैं और लकड़ी को औने-पौने दामों में दलालों को बेचा जा रहा है।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हरे वृक्षों की कटाई के लिए राजस्व विभाग से विधिवत अनुमति ली जा रही है? यदि नहीं, तो इस अवैध कटाई पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

जांच नाकों से गुजर रहे बिना नंबर के वाहन

रुपेश सिन्हा ने यह भी आरोप लगाया कि रेंगाडबरी, माटरी और लोहारा जांच नाकों से बिना नंबर वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में कच्ची लकड़ी खुलेआम परिवहन की जा रही है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं न कहीं विभागीय लापरवाही या सांठगांठ के कारण यह अवैध कार्य जारी है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

“उजड़े जंगलों की भरपाई संभव नहीं”

उन्होंने कहा कि सरकार हर वर्ष जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन यदि जंगल लगातार कटते रहे तो इसका दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा। एक बार उजड़ा हुआ जंगल दोबारा उसी स्वरूप में तैयार नहीं किया जा सकता, क्योंकि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं बल्कि जैव विविधता का आधार होता है।

आमजन से की पर्यावरण बचाने की अपील

अंत में रुपेश सिन्हा ने आम लोगों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए आगे आने की अपील करते हुए कहा कि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तभी मानव जीवन सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि वे स्वयं एक किसान और वन्यजीव प्रेमी हैं तथा जब बड़े पैमाने पर जंगल कटने की खबरें सुनते हैं तो मन व्यथित हो उठता है।

नेमन साहू रेंगाडबरी की रिपोर्ट

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