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जब गांव ने उठाया शिक्षा का जिम्मा: चिलमगोटा में सरपंच और पालकों की पहल बनी बच्चों के भविष्य की नई उम्मीद

शिक्षा की कमी को दूर करने ग्राम पंचायत और अभिभावक आए साथ, 48 बच्चों की पढ़ाई बेहतर बनाने का लिया संकल्प

डौण्डी लोहारा। शिक्षा के क्षेत्र में सामुदायिक भागीदारी का प्रेरणादायी उदाहरण डौण्डी लोहारा विकासखंड के ग्राम चिलमगोटा में देखने को मिला है। यहां प्राथमिक शाला में अध्ययनरत बच्चों की बेहतर शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरपंच नरेन्द्र मंडावी और गांव के पालकों ने मिलकर जिम्मेदारी संभालने का निर्णय लिया है।

प्राथमिक शाला चिलमगोटा में कक्षा पहली से पांचवीं तक कुल 48 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने तथा बच्चों को नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत और पालकों ने संयुक्त पहल शुरू की है।

सरपंच नरेन्द्र मंडावी ने कहा कि गांव का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। पालकों के सहयोग से बच्चों की नियमित पढ़ाई, विद्यालय में उपस्थिति और बेहतर शैक्षणिक वातावरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

ग्रामीणों ने सरपंच और पालकों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि समाज और पंचायत की सहभागिता से बच्चों को बेहतर शिक्षा का वातावरण मिलेगा और उनका भविष्य अधिक उज्ज्वल बनेगा। ग्रामीणों ने इसे शिक्षा के क्षेत्र में एक अनुकरणीय पहल बताते हुए अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणास्रोत बताया।

— नेमन साहू, रेंगाडबरी

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