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जनभागीदारी से जल क्रांति की नई मिसाल: बालोद में 2.84 लाख से अधिक जल संरचनाओं ने बढ़ाई बारिश का पानी रोकने की क्षमता

‘कैच द रेन’ अभियान को मिली नई रफ्तार, तवेरा नाला पुनर्जीवित, भूजल स्तर बढ़ने और सिंचाई को मिलेगा बड़ा लाभ

बालोद। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के कुशल नेतृत्व एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील कुमार चंद्रवंशी के मार्गदर्शन में जल संरक्षण के क्षेत्र में बालोद जिले ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जल संचय, जनभागीदारी अभियान 2.0 के तहत जिला प्रशासन और आम जनता की साझेदारी से जून 2025 से मई 2026 के बीच 2 लाख 84 हजार 917 जल संरक्षण एवं रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया गया, जिससे वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

जिला प्रशासन द्वारा ग्राम पंचायतों, स्थानीय निकायों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से जल संरक्षण के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए गए हैं। इन प्रयासों का सकारात्मक असर मौजूदा मानसून में स्पष्ट दिखाई देने लगा है। जिले में किए गए नवाचारों ने सूखी जमीन को फिर से जल स्रोतों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता दिलाई है।

गुण्डरदेही विकासखंड के ग्राम पंचायत मुंडेरा में बंद पड़े बोरवेलों को रिचार्ज शाफ्ट के माध्यम से पुनर्जीवित किया गया, जिससे भूजल स्तर में सुधार हो रहा है। वहीं ग्राम पंचायत कोंगनी में बनाए गए रिचार्ज पिट बहते वर्षा जल को जमीन के भीतर पहुंचाकर जल पुनर्भरण में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

इसी प्रकार ओडारसकरी और खुटेरी ग्राम पंचायतों में निर्मित चेक डैम वर्षा जल को रोकने के साथ किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध करा रहे हैं। भाठागांव (आर) में बनाए गए कंटूर ट्रेंच (खाइयों) से मिट्टी की नमी संरक्षित हो रही है, जल बहाव कम हुआ है और वृक्षारोपण को भी बढ़ावा मिला है। जिलेभर में बनाए गए सामुदायिक चेक डैमों से खेती और आसपास के गांवों को सीधा लाभ मिल रहा है। जो जल संरचनाएं मानसून से पहले सूखी थीं, वे अब पानी से लबालब भर चुकी हैं।

तवेरा नाला बना जल संरक्षण की मिसाल, 6.5 करोड़ लीटर अतिरिक्त जल होगा संरक्षित

इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गुण्डरदेही विकासखंड के भाठागांव (आर) स्थित 14.3 किलोमीटर लंबे तवेरा नाला का पुनरुद्धार शामिल है। कैच द रेन और जल संचय, जनभागीदारी अभियान के तहत यहां 6,250 से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं जैसे चेक डैम, कंटूर ट्रेंच, मैजिक पिट, सोखता गड्ढे, इंजेक्शन वेल और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार किए गए हैं। इससे 6.5 करोड़ लीटर अतिरिक्त वर्षा जल का संचय होगा तथा भूजल स्तर में 5 से 10 फीट तक वृद्धि होने की संभावना है। इससे सिंचाई व्यवस्था मजबूत होने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि जल संरक्षण के क्षेत्र में बालोद जिला पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। जल संचय, जनभागीदारी अभियान 1.0 के तहत जिले में 1.06 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाई गई थीं। इस उत्कृष्ट कार्य के लिए कैच द रेन अभियान में बालोद को देश में तीसरा और पूर्वी क्षेत्र में पहला स्थान प्राप्त हुआ था। इस उपलब्धि पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने बालोद जिले को सम्मानित भी किया था।

बालोद जिले की यह सफलता साबित करती है कि जनभागीदारी से जल संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “पानी की हर बूंद बचाने” के संदेश को आत्मसात करते हुए बालोद जिले ने जल संरक्षण की दिशा में पूरे देश के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

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