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“ढैंचा और मूंग बनेंगे खेतों के डॉक्टर” : हरी खाद से बढ़ेगी पैदावार, घटेगी खेती की लागत

कृषि विभाग की किसानों को सलाह — रसायनों से थकी मिट्टी को दें प्राकृतिक ताकत

बालोद, 29 मई 2026। खरीफ सीजन के आगमन के साथ ही कृषि विभाग बालोद द्वारा किसानों को खाद, बीज और टिकाऊ खेती को लेकर लगातार सामयिक सलाह दी जा रही है। इसी क्रम में कृषि विभाग के उप संचालक श्री आशीष चंद्राकर ने किसानों को हरी खाद के महत्व और इसके लाभों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में रसायनों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता लगातार कम हो रही है। ऐसे समय में हरी खाद मिट्टी को प्राकृतिक रूप से पुनर्जीवित करने का सबसे बेहतर और सस्ता विकल्प बनकर सामने आई है।


क्या है हरी खाद और कैसे करती है खेतों का उपचार?

उप संचालक श्री चंद्राकर ने बताया कि हरी खाद ऐसी सहायक फसल होती है जिसे मुख्य फसल बोने से पहले खेत में उगाकर फूल आने की अवस्था में मिट्टी में मिला दिया जाता है। ढैंचा, सनई, लोबिया, मूंग और उड़द जैसी फसलें हरी खाद के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं।

उन्होंने बताया कि झाड़ियों और पेड़ों की पत्तियों एवं टहनियों का उपयोग भी हरी खाद के रूप में किया जा सकता है, लेकिन विशेष रूप से ढैंचा फसल का प्रयोग अधिक प्रभावी माना जाता है।


हरी खाद से मिट्टी बनेगी उपजाऊ, बढ़ेगी पैदावार

कृषि विभाग के अनुसार हरी खाद मिट्टी में नाइट्रोजन और कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ाती है। इससे मिट्टी भुरभुरी बनती है, पानी सोखने की क्षमता बढ़ती है और पौधों की जड़ें गहराई तक फैल पाती हैं।

उन्होंने कहा कि स्वस्थ मिट्टी बेहतर उत्पादन की गारंटी होती है। हरी खाद के प्रयोग से फसलों की पैदावार में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि देखी जा सकती है। साथ ही यूरिया और अन्य रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होने से खेती की लागत भी घटती है।


मित्र कीट और केंचुओं की संख्या भी बढ़ाती है हरी खाद

हरी खाद जमीन में लाभकारी सूक्ष्मजीवों और केंचुओं की संख्या बढ़ाने में मदद करती है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है। यह प्राकृतिक रूप से खेतों को उपजाऊ बनाकर टिकाऊ खेती को बढ़ावा देती है।


50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा बीज

कृषि विभाग ने बताया कि खरीफ सीजन से पहले छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड के माध्यम से जिले में हरी खाद के लिए ढैंचा 116 क्विंटल एवं मूंग 58 क्विंटल, कुल 174 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया है।

जिले के प्रत्येक विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालयों में ढैंचा 23.20 क्विंटल एवं मूंग 11.60 क्विंटल बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर भंडारित किए गए हैं। इच्छुक किसान क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों या सीधे वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर बीज प्राप्त कर सकते हैं।


“मिट्टी बचेगी तो किसान बचेगा”

श्री चंद्राकर ने कहा कि हरी खाद केवल उर्वरक नहीं, बल्कि मिट्टी का प्राकृतिक उपचार है। यदि किसान हर दूसरे या तीसरे साल अपने खेतों में हरी खाद का उपयोग करें, तो उनकी आय बढ़ने के साथ-साथ समाज को रसायन मुक्त और पौष्टिक अनाज भी उपलब्ध कराया जा सकेगा।

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