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बाल संरक्षण की अलख जगा रहीं शिक्षिका मोना रावत, बच्चों और पालकों को अधिकारों व सुरक्षा कानूनों की दे रहीं जानकारी

पॉक्सो, बाल विवाह निषेध, किशोर न्याय अधिनियम और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर किया जागरूक, बच्चों को दिलाई सुरक्षा की सीख

डौण्डी। राज्य बाल संरक्षण समिति के निर्देशन, जिला कलेक्टर के आदेश तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी अमित सिन्हा एवं जिला बाल संरक्षण अधिकारी गजानंद साहू के मार्गदर्शन में विकासखंड डौण्डी की शिक्षिका मोना रावत द्वारा बाल संरक्षण विषय पर लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत विद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों, युवा बालिकाओं, स्कूल प्रबंधन समिति तथा विभिन्न महिला समूहों को बच्चों के अधिकार एवं बाल संरक्षण कानूनों की जानकारी दी जा रही है।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों एवं बालिकाओं को पॉक्सो अधिनियम-2012, किशोर न्याय अधिनियम-2015, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, गुड टच-बैड टच, ऑनलाइन सुरक्षा तथा बाल अधिकारों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई।

बच्चों को सिखाया अपनी सुरक्षा का अधिकार

शिक्षिका मोना रावत ने बच्चों को बताया कि यदि उनके साथ किसी भी प्रकार का शोषण, हिंसा, उत्पीड़न या दुर्व्यवहार होता है तो वे बिना डर के चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 अथवा संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सहायता प्राप्त करें। उन्होंने बच्चों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, अजनबियों से सतर्क रहने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की भी सीख दी।

चार मूलभूत बाल अधिकारों की दी जानकारी

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान शिक्षिका ने बताया कि प्रत्येक बच्चे को चार मूलभूत अधिकार प्राप्त हैं—

  • जीवन का अधिकार
  • विकास का अधिकार
  • संरक्षण का अधिकार
  • सहभागिता का अधिकार

उन्होंने कहा कि इन अधिकारों की जानकारी प्रत्येक बच्चे तक पहुँचना आवश्यक है, ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग और आत्मविश्वासी बन सकें।

पालकों को भी किया जागरूक

कार्यक्रम में माता-पिता एवं अभिभावकों को भी बच्चों की सुरक्षा, बाल अधिकारों, दुर्व्यवहार की पहचान, निगरानी एवं आपातकालीन सेवाओं के संबंध में जानकारी दी गई। साथ ही बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बाल संरक्षण के प्रति सजग रहने की शपथ भी दिलाई गई।

यह जागरूकता अभियान बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने, सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने और समाज में बाल संरक्षण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।

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