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कठपुतली, खिलौनों से रूचिकर शिक्षा प्रदान कर रहे बघमरा के शिक्षक युगल किशोर देवांगन, पढ़िए इनकी कहानी कैसे बने नायक?

बालोद/गुंडरदेही – आज बालोद जिले के शिक्षा जगत के लिए उपलब्धि का दिन है वह इसलिए क्योंकि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित पढ़ई तुंहर दुआर पोर्टल में आज जिले से स्वयं जिला शिक्षा अधिकारी आरएल ठाकुर अधिकारी वर्ग से हमारे नायक के रूप में चयनित हुए हैं तो दूसरी ओर शिक्षक में गुंडरदेही ब्लॉक के बघमरा प्राइमरी स्कूल से युगल किशोर देवांगन का , जो बच्चों को कठपुतली व खिलौने के जरिए रोचक शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। युगल की सफलता की कहानी को ब्लॉग लेखक गौतम कुमार शर्मा, सहायक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक शाला झारपारा (पम्पापुर), विकासखण्ड – रामानुजनगर, जिला – सूरजपुर (छत्तीसगढ़) ने लिखा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम के दौरान दुनियाँ के लिए खिलौने’ बनाने की बात की और भारत को दुनियाँ का ‘खिलौना केंद्र’ यानी ‘टॉय हब’ बनाने की क्षमता पर प्रकाश डाला था । नई शिक्षा नीति 2020 के तहत् खिलौना बनाने वाले उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए खिलौना बनाने का पाठ्यक्रम भी बच्चों के लिए शुरू किया जाएगा । वहीं स्थानीय खिलौने बनाने जैसे लोक-शिल्पों को वोकेशनल कोर्सेस का हिस्सा बनाया जाएगा ।  खिलौना बनाने का यह विषय नियमित रूप से सभी प्रकार के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ाया जाएगा । इसी से प्रेरित खिलौना बनाने वाले शिक्षक थीम पर आज हमारे नायक के रूप में बालोद जिले के शिक्ष युगल किशोर देवांगन का चयन हमारे नायक में किया गया है ।

पढ़िये उनके पढ़ाई के रोचक तरीके  

1. कठपुतलियाँ निर्माण कर रोल प्ले – हम जानते हैं कि कठपुतलियाँ दिखने में बहुत ही आकर्षक होती है । रंग – बिरंगी कपड़े पहना कर उसे सजाया जाता है । इसे हथेली और अंगुली की मदद से चलाया जाता है । श्री युगल किशोर जी ने कठपुतलियों में मनुष्य, जंगली जानवर,पालतू जानवर, पक्षी इत्यादि बनाया है । इनके द्वारा तरह-तरह की कठपुतलियाँ निर्माण कर पाठ के आधार पर पात्र बनाकर रोल प्ले कराया जाता है । बच्चे जिस बात को पढ़ते हुए नहीं समझ पाते उसे इन कठपुतलियों की मदद से आसानी से देखकर समझ पाते हैं । बच्चे कहानी का स्थायी ज्ञान प्राप्त कर मनोरंजन के साथ पढ़ाई करते हैं । इस संबंध में शिक्षा विभाग द्वारा लघु फिल्म (वीडियो निर्माण) भी किया गया है । पिछले दो वर्षो से इनके द्वारा कठपुतली पर प्रदर्शन कार्य किया जा रहा है ।

2. फिंगर टॉय – फिंगर टॉय कागज व कलर पेन के माध्यम से बनाया जाता है । जिसे बच्चे अंगुलियों में पहनकर खेल – खेल में सीखते है । इसके अंतर्गत कार्टून्स,जंगली व पालतू जानवर,पक्षी,फल और सब्जियां,अंग्रेजी के अल्फाबेट्स , गिनती आदि को फिंगर टॉय बनाकर अंगुलियों में पहना जाता है । इससे रोल प्ले भी किया जाता है । श्री युगल किशोर जी ने कई फिंगर टॉय बनाकर बच्चो को अंग्रेजी,हिंदी व गणित विषय पर बेसिक शिक्षा प्रदान करने का प्रयास किया, जिसमें ये काफी सफल हुए ।

3. कागज से खिलौने निर्माण कार्य – युगल किशोर के द्वारा पाठ्यपुस्तक शिक्षण में रोचकता लाने के लिए तथा बच्चों में मोहल्ला क्लास के प्रति ध्यानाकर्षण करने के उद्देश्य से कागज से विभिन्न खिलौने व सजावट के सामान बनाना सिखाया गया । जैसे – हवाई जहाज बनाकर उसे चलाना,पानी जहाज को पानी में चलाना, फिलफिली बनाकर हवा में चलाना, पतंग , लिफाफा , झूमर , तरह – तरह के फूल सजावट के अन्य सामान आदि बनाना इत्यादि । यह कार्य आस – पास के अन्य शाला के बच्चों को भी सिखाया गया ।

4. खेल – खेल में शिक्षा – इनके द्वारा रुचिकर एवं प्रभावी शिक्षा के लिए बच्चों को खेल – खेल में शिक्षा प्रदान करते हुए विभिन्न गतिविधि आयोजित की जाती है । जैसे – लूडो के माध्यम से गिनती – पहाड़ा , संख्या पहचान करना , कंकड़ से जोड़ना – घटाना सीखाना , कंकड़ से स्थानीय मान का ज्ञान , सामूहिक खेल के माध्यम से पहाड़ा व गिनती सीखाना आदि । यह सभी कार्य शासन के कोविड – 19 संबंधी दिशा निर्देशों का पालन करते हुए कराया जा रहा है ।

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