EXCLUSIVE- गंगा मैया मंदिर में इस बार नहीं लगेगा नवरात्र का मेला, तो किस तरह से होगी व्यवस्था देखिये खबर, दर्शन व्यवस्था रहेगी कैसी, क्या है प्रबंधन की तैयारी?



बालोद। बालोद जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल गंगा मैया मंदिर में इस बार नवरात्र का मेला महोत्सव नहीं लगेगा, ना ही कोई बड़ा आयोजन होगा। पिछले नवरात्र के समय से कोरोना का खतरा शुरू हुआ था उस समय भी यहां कोई मेला का आयोजन नहीं हुआ था। यही स्थिति दोबारा निर्मित हो गई है क्योंकि अब खतरा और भी ज्यादा बढ़ चुका है। जिसे देखते हुए गंगा मैया मंदिर समिति ने तय किया है कि इस बार भी मेला का आयोजन नहीं करेंगे। लेकिन जोत जलाया जाएगा और लोगों को दर्शन करने दिया जाएगा। लेकिन दर्शन किस तरह से होगा कितने की संख्या में भक्तों को मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा यह सब अभी मंदिर समिति तय नहीं कर पाई है। इसके लिए शासन प्रशासन से भी मार्गदर्शन मांगा गया है ।मंदिर समिति के प्रबंधक सोहनलाल टावरी का कहना है कि हमने जिला प्रशासन से इस संबंध में मार्गदर्शन मांगा है। यह तो तय है कि मेला इस बार नहीं लगाएंगे, ना ही कोई बड़ा आयोजन होगा, जिससे भीड़ बढ़े । लेकिन पूजा-पाठ चलता रहेगा। जोत भी जलेंगे।

हम चाहते हैं कि लोगों को दर्शन करने की अनुमति भी दी जाए। जिसके लिए निर्धारित संख्या में ही प्रवेश दिया जाएगा। इस संबंध में क्या-क्या व्यवस्था रखनी है किन किन नियमों का पालन करना है, इसकी गाइडलाइन प्रशासन से मांग की गई है। जिला प्रशासन को हमने आवेदन देकर मार्गदर्शन मांगा है ताकि जो निर्देश प्राप्त हो उस हिसाब से दर्शन की व्यवस्था बनाई जा सके। इस बार जोत जलाए जा रहे हैं। स्वभाविक है जिनकी जोत है वह दर्शन के लिए आएंगे ही। इसलिए उन्हें कम से कम मंदिर में प्रवेश की अनुमति मिले और कम संख्या में प्रवेश कर सुरक्षा के मापदंडों का पालन कर मंदिर से बाहर निकले इस तरह की व्यवस्था बनाने की तैयारी की जा रही है। प्रशासन से गाइडलाइन आने के बाद आगे की तैयारी होगी। मेला महोत्सव तो नहीं होगा। लोगों से अपील की गई है कि वे धैर्य रखें और भीड़ ना बढ़ाएं। नवरात्र में खासतौर पर इसी नवरात्रि में यहां लाखों की भीड़ जुटती है। पंचमी के दिन भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि मंदिर में पैर रखने तक की जगह नहीं होती है। ऐसी स्थिति इस बार शायद फिर नहीं आएगी। क्योंकि कोरोनावायरस में मेला भी नहीं लगेगा और लोगों को इस तरह भीड़ में प्रवेश की इजाजत भी नहीं मिलेगी। ज्ञात हो कि बालोद जिले के अलावा गंगा मैया मंदिर छत्तीसगढ़ी नहीं बल्कि दूसरे राज्यों में भी प्रसिद्ध है। यहां पर दूसरे राज्य के अलावा विदेश तक के लोग भी यहां पर जोत जलाते हैं। गंगा मैया के प्रति विशेष आस्था के चलते इसकी ख्याति विश्व के कई देशों तक फैली हुई है ।ज्ञात हो कि जब तांदुला डैम व नहर का निर्माण चल रहा था तब एक जगह पर खुदाई के दौरान जमीन के भीतर गंगा मैया की मूर्ति निकली हुई थी। कई धार्मिक मान्यताओं व विश्वासों के चलते इसका महत्व बढ़ गया और आज लोगों की आस्था भी इससे जुड़ी हुई है और लोग मन्नते मांग कर इस मंदिर में जोत जलाते हैं। नवरात्रि हो चाहे कोई भी दिन हो यहां दर्शन करने के लिए लोग आते हैं लेकिन जब से कोरोनावायरस आया है वहां पर प्रवेश पर प्रतिबंध लगा हुआ है और लोग बाहर से ही दर्शन करते हैं। इस नवरात्रि में भी दर्शन को लेकर भक्त तरस सकते हैं। शासन प्रशासन से दिशा-निर्देश प्राप्त होने के बाद दर्शन को लेकर योजना बन रही है।

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